कुलदीप सिंह, फतेहपुर. जनपद में सरकारी तंत्र की लापरवाही का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक जीवित किसान को सरकारी अभिलेखों में ‘मृत’ घोषित कर दिया गया. इतना ही नहीं, बाकायदा उनका मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया. इस गंभीर चूक के चलते पीड़ित किसान की वृद्धावस्था पेंशन और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की किश्तें बंद हो गई हैं. अब पीड़ित खुद के जिंदा होने का सबूत देने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है.

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बता दें कि मामला खजुहा विकास खंड के चक कश्मीरी अरईपुर गांव का है. पीड़ित किसान शिवनंदन ने जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि सरकारी रिकॉर्ड में 20 अगस्त 2026 को उन्हें मृत दर्ज कर दिया गया. इसके बाद 15 सितंबर 2026 को उनका मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया. ​शिवनंदन का कहना है कि वे पूरी तरह स्वस्थ और जीवित हैं, लेकिन कागजों में मृत दर्ज होने के कारण उन्हें सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित कर दिया गया है.

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इस घटना ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सवाल उठ रहा है कि आखिर किस आधार पर और किसकी रिपोर्ट पर एक जीवित व्यक्ति को कागजों में मार दिया गया. पीड़ित किसान शिवनंदन ने जिलाधिकारी से गुहार लगाते हुए जारी किए गए फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र को तत्काल निरस्त करने और संबंधित ग्राम विकास अधिकारी के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है.