उत्तर प्रदेश में बिजली की कमी के चलते गांवों और कस्बों में रात के समय तीन से चार घंटे तक कटौती हो रही है. तापीय बिजली उत्पादन में कमी और जल विद्युत की उपलब्धता प्रभावित होने से प्रदेश को दो से तीन हजार मेगावाट की कमी का सामना करना पड़ रहा है.

 लखनऊ. उत्तर प्रदेश में बिजली की कमी का असर ग्रामीण और कस्बाई इलाकों की बिजली आपूर्ति पर पड़ रहा है. प्रदेश में रात के समय गांवों और कस्बों में तीन से चार घंटे तक बिजली कटौती की स्थिति बनी हुई है. तापीय बिजली उत्पादन घटने और जल विद्युत की उपलब्धता प्रभावित होने से राज्य को दो से तीन हजार मेगावाट बिजली की कमी का सामना करना पड़ रहा है.

रात में ज्यादा संकट

लखनऊ में सोमवार को अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने बिजली संकट को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक की. उन्होंने बताया कि इन दिनों देशभर में बिजली की स्थिति प्रभावित है और उत्तर प्रदेश भी इससे अछूता नहीं है.

डॉ. गोयल के अनुसार, कोयला खदान वाले क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण कोयले की आपूर्ति प्रभावित हुई है. इसका असर सिंगरौली, रिहंद, खुर्जा, मेजा, लैंको, रोजा और बारा तापीय बिजली घरों के उत्पादन पर पड़ा है.

इसके अलावा तकनीकी कारणों से अनपरा, हरदुआगंज, जवाहपुर और ओबरा की इकाइयों का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है. तमाम प्रयासों के बावजूद प्रदेश में दो से तीन हजार मेगावाट बिजली की कमी बनी हुई है.

प्रदेश में अधिकतम बिजली मांग करीब 30 हजार मेगावाट है, जबकि उपलब्धता लगभग 27 हजार मेगावाट ही है. दिन के समय सौर ऊर्जा से मांग के अनुसार बिजली उपलब्ध हो जा रही है, लेकिन रात में अतिरिक्त बिजली की उपलब्धता कम होने से गांवों और कस्बों में कटौती करनी पड़ रही है.

कोयला आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश

पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष ने बताया कि केंद्रीय कोयला मंत्रालय से पर्याप्त कोयले की आपूर्ति के लिए अनुरोध किया गया है. इस बीच अनपरा से लैंको और बारा को कोयले की आपूर्ति में सुधार किया गया है, जिससे रात में 700 मेगावाट बिजली उत्पादन बढ़ाया गया है.

बंद पड़ी अन्य इकाइयों से भी जल्द उत्पादन शुरू कराने की कोशिश की जा रही है. डॉ. गोयल ने उम्मीद जताई कि करीब एक सप्ताह में बिजली की स्थिति सामान्य हो जाएगी.

जहां रात में निर्धारित रोस्टर के अनुसार बिजली की आपूर्ति नहीं हो पा रही है, वहां दिन में अतिरिक्त बिजली देकर इसकी भरपाई करने के निर्देश दिए गए हैं. निर्धारित शेड्यूल के अनुसार गांवों में 18 घंटे, बुंदेलखंड में 20 घंटे और नगर पंचायत तथा तहसील क्षेत्रों में 21.30 घंटे बिजली आपूर्ति का प्रावधान है.

जिला मुख्यालय, बड़े शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों को बिजली कटौती से मुक्त रखा गया है.

एक्सचेंज से भी राहत नहीं

प्रदेश में बिजली की कमी पूरी करने के लिए आमतौर पर इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से बिजली खरीदी जाती रही है. हालांकि, एक सितंबर से औसतन 16 घंटे तक अधिकतम 10 रुपये प्रति यूनिट की दर पर भी पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं हो पा रही है.

रात के समय एक्सचेंज से बिजली मिलने की स्थिति और खराब बताई गई है. जानकारों के मुताबिक, नेपाल को होने वाली जल विद्युत आपूर्ति में बदलाव का भी एक्सचेंज पर असर पड़ा है.

जानकारों का कहना है कि पहले नेपाल से एक्सचेंज को करीब डेढ़ हजार मेगावाट जल विद्युत मिलती थी. फिलहाल करीब 700 मेगावाट बिजली भारत से नेपाल को दी जा रही है.