कुंदन कुमार, पटना। बिहार की राजनीति में सियासी हलचल तेज हो गई है। हाल ही में एनडीए गठबंधन के नेताओं के नामांकन कार्यक्रमों के दौरान राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने आगामी चुनावों में एनडीए उम्मीदवारों की प्रचंड जीत का दावा किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य की जनता एनडीए के विकास कार्यों के साथ है और गठबंधन के सभी उम्मीदवार भारी मतों से विजय प्राप्त करेंगे।
हालांकि, जब उपेंद्र कुशवाहा से यह सवाल पूछा गया कि उनकी पार्टी के कई बागी नेता स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर चुनाव मैदान में डटे हुए हैं, तो उन्होंने इस पर सीधी प्रतिक्रिया देने से बचते हुए चुप्पी साध ली। बागी नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने के सवाल पर उन्होंने कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया। कुशवाहा ने केवल इतना कहा कि इस चुनाव में हर किसी को अपनी दावेदारी पेश करने की छूट आ गई है, लेकिन अंततः जीत एनडीए गठबंधन की ही होगी।
राजनीतिक गलियारों में उपेंद्र कुशवाहा के इस रुख की काफी चर्चा हो रही है। जानकारों का मानना है कि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनावों में अपनों की बगावत से निपटने के लिए पार्टी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। एक तरफ जहां वे एनडीए की एकजुटता का संदेश दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ भीतरघात से पार पाना पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

