हेमंत शर्मा, इंदौर। वैलेंटाइन-डे के दिन जहां एक तरफ प्यार का इज़हार होता है, वहीं इंदौर के फैमिली कोर्ट में एक डॉक्टर-इंजीनियर दम्पत्ति की ज़िंदगी ने नया मोड़ ले लिया। तलाक की कगार पर पहुंचा यह रिश्ता कोर्ट की पहल से फिर से जुड़ गया। 14 फरवरी 2026 को पेशे से डॉक्टर पति ने अपनी आईटी सेक्टर में कार्यरत इंजीनियर पत्नी के खिलाफ शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाते हुए विवाह विच्छेद की याचिका दायर की थी। मामला कुटुम्ब न्यायालय में विचाराधीन था और पत्नी को नोटिस जारी किया गया था।
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वैलेंटाइन-डे के दिन जब दोनों पक्ष अदालत में पेश हुए, तब कोर्ट ने सिर्फ कानूनी पक्ष नहीं देखा, बल्कि रिश्ते को बचाने की कोशिश भी की। माननीय न्यायाधीश आर.के. जैन ने दोनों पक्षों की विस्तार से काउंसलिंग की। उन्होंने जीवन की लंबी यात्रा, आपसी समझ और पुरानी बातों को भूलकर नए सिरे से शुरुआत करने की सलाह दी। कोर्ट की इस पहल का असर हुआ। दोनों ने सहर्ष समझौता किया और तलाक की याचिका वापस ले ली। मामला निराकृत कर समाप्त कर दिया गया।
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हाई कोर्ट एडवोकेट कृष्ण कुमार कुन्हारे ने बताया कि फैमिली कोर्ट में प्राथमिक स्तर पर ही परामर्श और मीडिएशन के माध्यम से दाम्पत्य विवादों का समाधान करने का प्रयास किया जाता है, ताकि परिवार टूटने से बच सके। इस अनोखे वेलेंटाइन-डे पर कोर्ट परिसर में ही पति-पत्नी ने एक-दूसरे को गुलाब का फूल और मिठाई देकर पुराने गिले-शिकवे भुलाने का वादा किया। दोनों साथ-साथ कोर्ट से बाहर निकले—एक नई शुरुआत के साथ। इन्दौर फैमिली कोर्ट में यह दिन सिर्फ एक केस का अंत नहीं, बल्कि एक घर के बचने की मिसाल बन गया।
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