VIDEO : राजधानी में सर्व आदिवासी समाज की हुँकार, बोले- जल-जंगल-ज़मीन पर वनवासियों का अधिकार…पाँचवीं अनुसूची-पेसा कानून का पालन करे सरकार

रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक बार से आदिवासी समाज अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत् हो गए हैं. राजधानी रायपुर में इसी कड़ी में सर्व आदिवासी समाज की ओर से वन स्वराज रैली का आयोजन किया गया. इस रैली में केन्द्र और राज्य सरकार के खिलाफ हुँकरा भरी गई. आदिवासियों ने कहा कि सरकारे पाँचवीं अनुसूची को सख्ती से लागू करे, पेसा कानून का पालन कराए, खदान और वन्यप्राणियों के नाम पर आदिवासियों को बेदखल करने की कार्रवाई बंद करे. आदिवासियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि जल-जंगल-जमीन की लड़ाई वो हर मोर्चें पर लड़ेंगे. वे अपना गाँव, अपनी ज़मीन नहीं छोड़ेंगे.

ये भीड़…ये नज़ारा राजधानी रायपुर में बूढ़ातालाब धरना स्थल का.  ये उन लोगों की भीड़ है…उन लोगों की तस्वीर है जिनका ये पूरा छत्तीसगढ़ है. ये मूलनिवासी, वनवासियों की भीड़ है. ये राजधानी में अपनी मांग को लेकर पहुँचे हैं…ये सरकार को अपनी ताकत दिखाने…उन्हें यह बताने के लिए पहुँचे कि उनके साथ अन्याय हो रहा है. ये तस्वीर वन स्वराज आंदोलन की है…रैली की है. प्रदेश भर से पहुँचे आदिवासियों ने सरकार के समक्ष अपनी पीड़ा को जाहिर करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में जल-जंगल-जमीन की लूट हो रही है. पाँचवीं अनुसूची, पेसा कानून का पालन नहीं हो रहा है. खदान, बांध और वन्यप्राणियों के नाम पर वनवासियों को बेदखल किया जा रहा है. सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष बीपीएस नेताम ने कहा कि किसी भी कीमत पे हम छत्तीसगढ़ को उजड़ने नहीं देंगे. जल-जंगल-जमीन पर वनवासियों का अधिकार है. क्या जंगल में सिर्फ़ जानवर रहेंगे वनवासी नहीं ? क्या जंगल सिर्फ पूँजीपतियों को बेचे जाते रहेंगे और आदिवासी विस्थापित होते रहेंगे ?

दूसरी ओर इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि हम आदिवासियों के साथ है. सरकार आदिवासी हितों की रक्षा के प्रतिबद्ध है. हम वन अधिकार पट्टा आदिवासियों को बाँट रहे थे. अब इस मामले में हाईकोर्ट ने स्टे लगा दिया है. मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया है. जहाँ तक प्रश्न खदान का है तो केन्द्र के अधीन है. लेकिन यह वादा करते हैं कि आदिवासियों का अहित नहीं होने देंगे.


फिलहाल आदिवासियों ने अपनी एक दिनी रैली कर सरकार को चेतावनी दे दी है कि मूलनिवासियों के साथ हो रहे शोषण को रोकिए नहीं तो उग्र आंदोलन के लिए हम बाध्य होंगे. इस आंदोलन को समर्थन देने बस्तर मनीष कुंजाम, उत्तर बस्तर से सोहन पोटाई, राजहरा से मुक्ति मोर्चा के जनठाकुर, रायपुर से सीपीएम के संजय पराते सहित अन्य किसान संगठन के नेताओं से साथ दिया. लेकिन आदिवासियों के इस आंदोलन से यह तो साफ हो गया कि वे जल-जंगल-जमीन की लड़ाई किसी भी कीमत में नहीं छोड़ेंगे फिर चाहे सरकारे भाजपा की हो या कांग्रेस की.

देखिए पूरी बातचीत

Related Articles

Back to top button
survey lalluram
Close
Close
धन्यवाद, लल्लूराम डॉट कॉम के साथ सोशल मीडिया में भी जुड़ें। फेसबुक पर लाइक करें, ट्विटर पर फॉलो करें एवं हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें।