वीडियोः डॉक्टर का स्टिंग, मरीज ने पैसे नहीं दिए तो देखिए क्या किया! कहा- ये तुम्हारा बिहार नहीं छत्तीसगढ़ है…

रायपुर. अंबेडकर अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों की दबंगई और अक्सर मरीज और उनके परिजनों के साथ गाली-गलौच करना कोई नई बात नहीं है. अस्पताल में एक मासूम के पिता पर एक जूनियर डॉक्टर का कहर तब गिरा जब उससे इलाज के नाम पर हजारों रुपए मांगे गए, पिता का कसूर बस इतना था कि वह डॉक्टर के बताए हिसाब से उन्हें रिश्वत नहीं दे पाया और डॉक्टरों ने मासूम की सर्जरी तो रोक दी, साथ ही पिता को मारने के लिए हाथ तक उठा दिया. वीडियों में इस बेरहम जूनियर डॉक्टर को उक्त पीड़ित पिता से न तो बात करने की तमीज थी और न तरीका. इतना ही नहीं गालियों की बौछार करते हुए जूनियर डॉक्टर ने तो पिता से यहां तक कह दिया कि ये तुम्हारा बिहार नहीं ये छत्तीसगढ़ है. ये पूरी घटना वहां मौजूद एक अन्य मरीज के परिजन ने अपने कैमरे में कैद कर लिया.

गाली बकने वाले डॉक्टर साहब! ये मुफ्त की नसीहत आपके लिए…

डॉक्टर साहब! आप ये भूल गए कि जैसी गालियां आप गरीब पिता को बक रहे है वो कतई छत्तीसगढ़ की संस्कृति नहीं है. यहां परदेश से आए मेहमानों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता. साहब! डॉक्टरी पेशे के साथ शायद आप ये भी भूल गए कि डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया जाता है, लेकिन आप जैसे चंद लोगों के कारण ही ये पेशा भी धीरे-धीरे बदनाम होता जा रहा है. डॉक्टर! आप जिस पीड़ित पिता को गाली बक रहे थे न, उनकी उम्र भी शायद आपके पिता से ज्यादा होगी. लेकिन आप ने एक पिता को ऐसे बेज्जत करने और गाली बकने के साथ-साथ अपने संस्कारों का भी परिचय दे दिया. खैर… हम उम्मीद करते है कि आपका ये वायरल वीडियो आपके परिजन और आपको जन्म देने वाले माता-पिता भी जरूर देखे. जिससे उनका ये वहम दूर हो कि उनका बेटा डॉक्टरी गरीब लोगों की सेवा के लिए नहीं बल्कि उनके साथ गाली-गलौच करने, रिश्वत न देने पर ऐसे बेज्जत करने के लिए कर रहा है और इसके साथ ही अपने माता-पिता के संस्कारों को बदनाम कर रहा है.

इस वीडियो के वायरल होने के बाद अस्पताल प्रबंधन डॉक्टर के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है ये देखना होगा. वहीं मरीज की छोटी सी गलती पर पूरे जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले जाते है और सभी डॉक्टर छात्रों के समर्थन में उतर जाते है, लेकिन इस वीडियो के सामने आने के बाद कितनी सहानुभूति मरीज और उनके परिजनों के साथ बरती जाती है या इस वीडियो के आने के बाद मरीज और उसके परिजनों को अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है.

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