दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव में जीत के बाद कथित तौर पर निकाले गए विजय जुलूस के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने बुधवार को दिल्ली विश्वविद्यालय से जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ कर रही है। पीठ के समक्ष यह मामला याचिकाकर्ता प्रशांत मनचंदा की ओर से दायर आवेदन पर आया। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद कुछ विजयी उम्मीदवारों ने चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद विजय जुलूस निकाले।
डूसू के सभी उम्मीदवारों को पहले ही कारण बताओ नोटिस
डूसू चुनाव के बाद कथित विजय जुलूस के मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मीदवारों को पहले ही कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है। इनमें चुनाव में जीत दर्ज करने वाले उम्मीदवार भी शामिल हैं। कोर्ट ने याचिकाकर्ता प्रशांत मनचंदा को कथित आदेश उल्लंघन से जुड़े सभी दस्तावेज और अन्य संबंधित सामग्री एक डोजियर के रूप में तैयार कर अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया। इसमें कथित विजय जुलूस से संबंधित उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों को शामिल करने को कहा गया है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ कर रही है।
हाईकोर्ट की टिप्पणी, कहा- चिंता धन और बाहुबल के प्रदर्शन की
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव के बाद कथित विजय जुलूस के मामले में सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसकी चिंता केवल चुनाव जीतने के बाद होने वाले जश्न या ढोल बजाने तक सीमित नहीं है। पीठ ने कहा कि असली समस्या धन और बाहुबल के प्रदर्शन को लेकर है। सुनवाई के दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद उम्मीदवारों के उत्साह और भावनाओं को नियंत्रित करना मुश्किल होता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस बार तो ढोल भी नहीं बजाए गए। इस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत की चिंता सिर्फ ढोल बजाने या जश्न मनाने को लेकर नहीं है, बल्कि चुनाव में धन और बाहुबल के प्रदर्शन को लेकर है।
140 उम्मीदवारों और छात्र संगठनों को जारी हुए थे नोटिस
दरअसल, 18 सितंबर को हाईकोर्ट ने डूसू चुनाव में कथित नियम उल्लंघनों को गंभीरता से लेते हुए 140 उम्मीदवारों और छात्र संगठनों को नोटिस जारी किए थे। अदालत ने निर्देश दिया था कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद दिल्ली की सड़कों, विश्वविद्यालय परिसर या छात्रावासों में किसी भी तरह का विजय जुलूस नहीं निकाला जाएगा। विजय जुलूस के कथित उल्लंघन को लेकर दायर आवेदन पर सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी नोट किया कि चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मीदवारों को पहले ही कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है, जिसमें विजयी उम्मीदवार भी शामिल हैं। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कथित उल्लंघन से जुड़े सभी दस्तावेज और अन्य सामग्री एक डोजियर में शामिल कर अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है।
लिंगदोह समिति की सिफारिशों के उल्लंघन पर हाईकोर्ट ने जताई चिंता
डूसू चुनाव के बाद कथित विजय जुलूस और चुनावी नियमों के उल्लंघन के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने लिंगदोह समिति की सिफारिशों के पालन को लेकर भी चिंता जताई है। अदालत ने चुनाव के दौरान निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। अदालत के निर्देशों के पालन की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस को दी गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि आदेश के उल्लंघन की स्थिति में इसे अदालत की अवमानना के साथ-साथ आपराधिक और प्रशासनिक कार्रवाई का आधार बनाया जा सकता है।
यह मामला वर्ष 2017 में दायर एक याचिका से जुड़ा है। याचिका में छात्रसंघ चुनाव के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और दीवारों सहित अन्य स्थानों पर प्रचार सामग्री लगाए जाने जैसे मामलों में कार्रवाई की मांग की गई थी। इसी मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनावी आचार-व्यवस्था और लिंगदोह समिति की सिफारिशों के पालन से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई।
ABVP ने तीन पदों पर दर्ज की जीत
डूसू चुनाव के नतीजों में ABVP ने केंद्रीय पैनल के चार में से तीन पदों पर जीत दर्ज की। वहीं, एनएसयूआई से टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने वाले दीपांशु शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर जीत हासिल की। कांग्रेस से संबद्ध एनएसयूआई के उम्मीदवार अध्यक्ष और संयुक्त सचिव पद पर मामूली अंतर से चुनाव हार गए। इसके साथ ही एनएसयूआई इस चुनाव में केंद्रीय पैनल की किसी भी सीट पर जीत दर्ज नहीं कर सकी।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m


