मनोज परिहार, विदिशा। मध्य प्रदेश में अजब-गजब कारनामों की फेरिस्त में एक और नया अध्याय जुड़ गया है। अब तक आपने किसानों को खेतों, खलिहानों या अपने घरों के आंगनों में फसल सुखाते देखा होगा, लेकिन विदिशा जिले की शमशाबाद तहसील से जो नजारा सामने आया है, उसे देखकर आप भी अपना सिर पीट लेंगे। यहां एक ‘तेज-तर्रार’ मंडी व्यापारी ने करोड़ों रुपये की लागत से बने सापन नदी के पुल को ही अपना निजी खलिहान समझ बैठा और उस पर मक्का सुखानी शुरू कर दी! हद तो तब हो गई जब जनाब ने मक्का सुखाने के चक्कर में सड़क के दोनों तरफ खंभे गाड़कर पूरा रास्ता ही बंद कर दिया।
सड़क पर कब्जा और पुलिस-प्रशासन ‘नौ दो ग्यारह’
भई वाह! जिस सड़क और पुल का निर्माण आम जनता और वाहनों की आवाजाही के लिए करोड़ों रुपये खर्च करके किया गया था, उसका इस्तेमाल अब मक्का की धूप-सिकाई के लिए हो रहा है। आम जनता परेशान होकर इधर-उधर भटक रही है और राहगीर सिर खुजाने को मजबूर हैं, लेकिन मजाल है कि प्रशासन के किसी जिम्मेदार अधिकारी के कान पर जूं रेंग जाए।
अब सबसे बड़ा और चुभने वाला सवाल यह है कि आखिर इस महाशय को सार्वजनिक सड़क और पुल पर कब्जा करके रास्ता बंद करने की ‘शाही अनुमति’ किसने दी? क्या तहसीलदार, पटवारी और एसडीएम साहब की नजरें इस रास्ते से कभी नहीं गुजरतीं? या फिर वे इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि जब पूरी मक्का अच्छे से सूख जाएगी, तब कोई औपचारिक आदेश जारी किया जाएगा?
जनता परेशान, अधिकारी मस्त!
व्यापारी महोदय ने तो अपनी मक्का फैलाकर चैन की नींद सो रहे हैं, लेकिन यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों और आम नागरिकों की सांसें अटकी हुई हैं। अब देखना यह होगा कि इस खबर के वायरल होने के बाद प्रशासन की नींद खुलती है या फिर जिम्मेदार अधिकारी इस ‘मक्का महामार्ग’ पर मक्की की रोटी पकने का इंतजार करते रहेंगे! तब तक जनता भगवान भरोसे ही सफर करने को मजबूर है।
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