मलकानगिरी: मलकानगिरी ज़िले के गांववालों ने मथिली, कालीमेला, खैरापुट और चित्रकोंडा में 20 से ज़्यादा माओवादी “शहीद स्तंभ” गिरा दिए हैं।

ये स्मारक, जिन्हें CPI (माओवादी) कैडर ने सालों पहले बनवाया था, कभी इस इलाके में बागियों की हिंसा और बागियों के दबदबे की याद दिलाते थे।

लोगों ने कहा कि वे अब अपने इलाकों में बागियों की मौजूदगी के निशान नहीं देखना चाहते। उन्होंने ज़िले को बदलने का क्रेडिट सरकारी वेलफेयर स्कीम, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और बेहतर कनेक्टिविटी को दिया। गांववालों ने कहा, “अब हर जगह शांति है। हिंसा खत्म हो गई है, और हम अब बागियों का कोई निशान नहीं चाहते।”

गिराए गए स्ट्रक्चर उन इलाकों में थे जिन्हें कभी छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश से पास होने की वजह से माओवादियों का गढ़ माना जाता था। ये “कट-ऑफ” ज़ोन, जिन्हें अब स्वाभिमान अंचल के नाम से जाना जाता है, दशकों से घात लगाकर हमले, किडनैपिंग और झड़पें देखते आए हैं।

यह पहल इस साल की शुरुआत में मलकानगिरी को ऑफिशियली माओवादी-फ्री घोषित किए जाने के बाद हुई है। यह घोषणा खास कमांडरों के सरेंडर, लगातार सुरक्षा ऑपरेशन और डेवलपमेंटल आउटरीच प्रोग्राम के बाद की गई।