पटना। ​बिहार के पूर्व डीजीपी और 1991 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी विनय कुमार ने राज्य के नए मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में पदभार संभाल लिया है। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने राजभवन में आयोजित एक गरिमामयी समारोह में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य लोग मौजूद रहे।

​सर्वसम्मति से हुआ चयन और VRS की प्रक्रिया

​मुख्य सूचना आयुक्त के चयन को लेकर मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी। इस बैठक में सर्वसम्मति से विनय कुमार के नाम पर मुहर लगाई गई, जिसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने उनकी नियुक्ति की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी। उल्लेखनीय है कि विनय कुमार ने हाल ही में अपने पद से वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) के लिए आवेदन किया था, जिसे मात्र 24 घंटे के भीतर मंजूर कर लिया गया था। इससे पहले बिहार में पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय भी वीआरएस ले चुके हैं। उनका डीजीपी के रूप में दो साल का कार्यकाल 12 दिसंबर 2026 को पूरा होने वाला था, जबकि यह पद 31 जुलाई से खाली चल रहा था।

​स्वास्थ्य कारण और छुट्टियों की चर्चा

​सूत्रों के अनुसार, विनय कुमार ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पूर्व में अवकाश के लिए आवेदन किया था। उनकी किडनी में स्टोन की समस्या है, जिसके इलाज के लिए वे आईजीआईएमएस (IGIMS) में सर्जरी कराने वाले थे। इसके अलावा, अपने कार्यकाल के अंतिम चरण और निजी व्यस्तताओं के चलते उन्होंने छुट्टियों का प्रावधान किया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने सेवाकाल के दौरान पिछले 10 वर्षों से एलटीसी (LTC) का लाभ नहीं लिया था, जबकि आईपीएस अधिकारियों के लिए हर दो साल में इसका प्रावधान होता है।

​मुख्य सूचना आयुक्त की अहम जिम्मेदारियां

​राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में विनय कुमार पर सूचना का अधिकार (RTI) कानून से जुड़े मामलों की एक बड़ी जिम्मेदारी आ गई है। राज्य सूचना आयोग में लंबे समय से लंबित मामलों की सुनवाई, अपील और शिकायतों का तुरंत निपटारा करने में मुख्य सूचना आयुक्त की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसके जरिए नागरिकों को सरकारी विभागों से पारदर्शी तरीके से सूचनाएं प्राप्त करने में आ रही बाधाओं को दूर करने का कार्य किया जाता है।