राजेश वर्मा,नारायणगढ़। विश्व साइकिल दिवस के अवसर पर क्षेत्र के ऐसे लोगों से बातचीत की गई जिन्होंने दशकों से साइकिल को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाया हुआ है। इन लोगों का मानना है कि नियमित साइकिल चलाने की आदत ने उन्हें स्वस्थ, सक्रिय और ऊर्जावान बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वहीं नागरिक अस्पताल नारायणगढ़ के एसएमओ डॉ. प्रवीण कुमार ने भी साइकिलिंग को बेहतर स्वास्थ्य और स्वच्छ पर्यावरण के लिए अत्यंत लाभकारी बताया है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार नियमित रूप से साइकिल चलानी चाहिए। साइकिलिंग हृदय को मजबूत बनाती है, मांसपेशियों की शक्ति और लचीलेपन को बढ़ाती है तथा शरीर की सहनशक्ति में सुधार करती है। उन्होंने बताया कि मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीडि़त लोगों के लिए भी नियमित साइकिलिंग लाभकारी साबित हो सकती है। इसके अलावा साइकिल चलाने से तनाव कम होता है, मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है और पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आती है।
लगभग 84 वर्षीय सेवानिवृत्त मुख्याध्यापक जगदीशचंद वर्मा ने बताया कि छात्र जीवन से लेकर सरकारी सेवा के अंतिम दिनों तक उन्होंने साइकिल का निरंतर उपयोग किया। विभिन्न विद्यालयों में नियुक्ति के दौरान वे प्रतिदिन 40 से 50 किलोमीटर तक साइकिल चलाते थे। उनका कहना है कि नियमित साइकिलिंग ही उनके अच्छे स्वास्थ्य का प्रमुख आधार है। आज भी वे बाजार एवं अन्य दैनिक कार्यों के लिए साइकिल का उपयोग करते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में साइकिल को स्थान दें और प्रतिदिन कुछ समय साइकिल चलाकर स्वास्थ्य को बेहतर बनाएं।
नारायणगढ़ निवासी पंडित रमा शंकर ने बताया कि उनकी आयु लगभग 71 वर्ष है और वे वर्षों से नियमित रूप से साइकिल चला रहे हैं। वर्तमान में भी वे कालाआंब स्थित अपने कार्यस्थल तक साइकिल से ही आते-जाते हैं और प्रतिदिन लगभग 20 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं। उन्होंने बताया कि साइकिलिंग के साथ-साथ योगाभ्यास भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। उनका मानना है कि स्वस्थ जीवनशैली, नशामुक्त जीवन और नियमित व्यायाम व्यक्ति को शारीरिक एवं मानसिक रूप से मजबूत बनाते हैं।
गांव काठेमाजरा निवासी गुलजारा राम ने बताया कि वर्ष 1977 से उनका साइकिल से विशेष लगाव रहा है। स्कूल के दिनों में खरीदी गई पुरानी साइकिल से शुरू हुआ यह सफर आज भी जारी है। लगभग 64 वर्ष की आयु में भी वे प्रतिदिन 4 से 5 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं। उन्होंने बताया कि सरकारी सेवा के दौरान भी वे साइकिल से ही कार्यालय आते-जाते थे। आज भी खेती-बाड़ी और पशुपालन से जुड़े कार्यों में साइकिल उनकी पहली पसंद है।
गांव बड़ी बस्सी के युवा सुरेंद्र राणा ने कहा कि साइकिल केवल एक परिवहन का साधन नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन, स्वच्छ पर्यावरण और अनुशासित दिनचर्या का प्रतीक है। आज के समय में जब लोग छोटी-छोटी दूरियों के लिए भी मोटर वाहनों का उपयोग करने लगे हैं, ऐसे में साइकिल का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ता प्रदूषण और बदलती जीवनशैली गंभीर चिंता का विषय है। साइकिल एक ऐसा साधन है जो न तो पर्यावरण को प्रदूषित करता है और न ही ईंधन पर निर्भर है। यदि लोग अपने दैनिक जीवन में छोटी दूरी के लिए साइकिल का अधिक उपयोग करें तो प्रदूषण कम करने के साथ-साथ ईंधन की बचत भी की जा सकती है।
सुरेंद्र राणा ने युवाओं से आह्वान किया कि वे मोबाइल और सोशल मीडिया पर अधिक समय बिताने के बजाय खेलकूद, योग और साइकिलिंग जैसी गतिविधियों को अपनाएं। इससे न केवल उनका शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होगा, बल्कि आत्मविश्वास और कार्यक्षमता में भी वृद्धि होगी।
उन्होंने कहा कि विश्व साइकिल दिवस हमें यह संदेश देता है कि एक साधारण साइकिल भी समाज, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए बड़ा योगदान दे सकती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में साइकिल को स्थान देना चाहिए और आने वाली पीढिय़ों के लिए स्वस्थ एवं स्वच्छ वातावरण के निर्माण में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

गौरतलब है कि दैनिक जीवन में साइकिल के उपयोग को बढ़ावा देने और इसके प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 3 जून को विश्व साइकिल दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को साइकिल से स्वास्थ्य, सामाजिक और पर्यावरणीय लाभों के प्रति जागरूक करना है।
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