व्यापमं घोटाला- 592 के खिलाफ चार्जशीट, 245 नए आरोपी, 200 के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी

 

भोपाल। मध्यप्रदेश के बहुचर्चित व्यावसायिक परीक्षा मंडल यानि व्यापमं घोटाला मामले की जांच कर रही सीबीआई की विशेष अदालत में कल देर रात ढाई बजे तक कार्यवाही चली. कोर्ट में प्री मेडिकल टेस्ट 2012 में अनियमितताओं के मामले में 592 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर किए जाने के बाद ये सुनवाई हुई.

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सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ 1500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है. भोपाल की सीबीआई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान प्राइवेट मेडिकल कॉलेज के संचालकों समेत 30 आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी.

चार्जशीट में 245 नए नाम

सीबीआई ने चार्जशीट में 245 नए लोगों को आरोपी बनाया है. इसमें भोपाल के कई बड़े चेहरे शामिल हैं. सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने कहा कि “इस घोटाले ने सैकड़ों स्टूडेंट्स के भविष्य को बर्बाद कर दिया”. वहीं सुनवाई में प्रेजेंट नहीं रहने पर कोर्ट ने 200 लोगों के खिलाफ अरेस्ट वारंट भी जारी किया है.

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वहीं आरोपी देश छोड़कर नहीं भाग सकें, इसलिए 30 नवंबर तक पासपोर्ट जमा करने का आदेश भी सीबीआई कोर्ट ने दिया है.

पीपुल्स ग्रुप के सुरेश एन विजयवर्गीय, चिरायु के डॉ अजय गोयनका भी आरोपी

सीबीआई ने व्यापमं घोटाला मामले में राजधानी भोपाल के रिनाउंड पीपुल्स ग्रुप के सुरेश एन विजयवर्गीय, चिरायु के डॉ अजय गोयनका समेत एलएन मेडिकल के जयनारायण चौकसे को भी आरोपी बनाया है.

कई आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

 

30 आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की गई है, जिसमें मेडिकल कॉलेज संचालक डॉ अजय गोयनका, सुरेश एन विजयवर्गीय, कैप्टन अंबरीश शर्मा, डॉ डी के सत्पथी, डॉ विजय कुमार पांडे और अन्य लोग शामिल हैं.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने राज्य सरकार के तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा संचालक एस सी तिवारी, व्यापमं के तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारी पंकज त्रिवेदी, तत्कालीन सीनियर सिस्टम एनालिस्ट नितिन मोहिन्द्र, तत्कालीन डिप्टी सिस्टम एनालिस्ट अजय कुमार सेन और तत्कालीन प्रोग्रामर सी के मिश्रा के खिलाफ भी चार्जशीट दायर किया है. इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के अध्यक्ष सुरेश सिंह भदौरिया और एल एन मेडिकल कॉलेज के अध्यक्ष जे एन चौकसे के नाम भी आरोपपत्र में शामिल हैं.

सीबीआई ने जांच में पाया कि इन मेडिकल कॉलेजों ने प्रिया गुप्ता बनाम छत्तीसगढ़ एवं अन्य के मामले में उच्चतम न्यायालय के आठ मई 2012 के दिशानिर्देशों का न केवल उल्लंघन किया, बल्कि आरक्षण नियमों की भी अनदेखी की.

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