हेमंत शर्मा, इंदौर। अरे भिया! इंदौर की राजनीति में चल क्या रहा है? एक तरफ तो जनता एक-एक बाल्टी पानी के लिए तरस रही है, विधायक और मंत्री बैठकों में आपस में ही ‘तंज-बाज़ी’ का खेल खेल रहे हैं और दूसरी तरफ हमारे महापौर पुष्यमित्र भार्गव जी आज की प्यास बुझाने के बजाय सीधा 2055 का ‘टाइम ट्रैवल’ करा रहे हैं! जी हां, खबर आई है कि जब शहर में पानी को लेकर हाहाकार मचा है और नेताओं की खींचतान चरम पर है, तब महापौर जी अचानक जलूद जा पहुंचे और 2055 तक के पानी का इंतज़ाम करने का दावा ठोक दिया!

शुक्रवार को महापौर पुष्यमित्र भार्गव, जलकार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा ‘बबलू’ और अफसरों की पलटन के साथ जलूद में चल रहे नर्मदा के चौथे चरण के काम का निरीक्षण करने पहुंचे। वहां 1,650 एमएलडी क्षमता के इंटेक वेल का जायजा लेते हुए दावा किया गया कि इस प्रोजेक्ट से इंदौर को लगभग दोगुना पानी मिलेगा और अगले 30-35 सालों तक जल सुरक्षा की टेंशन खत्म हो जाएगी! सुनने में तो बात बड़ी चमकदार और विज़नरी लगती है, लेकिन इंदौरी जनता कह रही है कि “अरे भिया! 2055 की चिंता बाद में कर लेना, पहले 2026 की इस तपती गर्मी में नलों में दो बूंद पानी तो छुड़वा दो!”

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2055 का मास्टरप्लान, आज के जल संकट से ध्यान भटकाने का पैंतरा

एक तरफ कैलाश विजयवर्गीय की जल संकट बैठक में 5-5 विधायक पानी की किल्लत और अफ़सरों के ढीले रवैये से नाराज़ होकर हाज़िरी तक नहीं लगाते… मालिनी गौड़ मैडम साफ़-साफ़ कह देती हैं कि “जब काम ही नहीं होना तो बैठक का स्वांग क्यों?” और दूसरी तरफ महापौर जी आज के जल संकट से नज़रें चुराकर 2055 की लंबी-चौड़ी फाइलों का फीता काट रहे हैं!
अब शहर की जनता के मन में सीधा सवाल उठ रहा है कि क्या 2055 का यह ‘मास्टरप्लान’ आज के जल संकट से ध्यान भटकाने का पैंतरा है?

आज का पानी गायब, कल के सपनों का भरा जा रहा ड्रम

आज जब नगर निगम की पाइपलाइनें सूखी पड़ी हैं, टैंकरों के लिए मारामारी मची है और अफसर जनप्रतिनिधियों की एक सुनने को तैयार नहीं हैं, तो फिर 30 साल बाद का पानी किसके काम आएगा? कुल मिलाकर इंदौर में आज का पानी गायब है और कल के सपनों का ड्रम भरा जा रहा है! अब देखना यह है कि महापौर जी की यह ‘2055 वाली छलांग’ जनता की प्यास बुझा पाती है या फिर यह भी बैठकों की तरह सिर्फ एक और कागजी गुब्बारा बनकर रह जाती है!

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