सतीश सिंह, लखनऊ. श्रावण मास के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम एक भावनात्मक ‘योगी की पाती’ जारी कर सनातन संस्कृति, प्रकृति संरक्षण, जल संवर्धन और सामाजिक सहभागिता का संदेश दिया है. मुख्यमंत्री ने श्रावण को केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि लोकमंगल, श्रम-सम्मान और सामूहिकता का उत्सव बताते हुए इसे सेवा, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के जनआंदोलन में बदलने का आह्वान किया.
मुख्यमंत्री ने भगवान शिव के समुद्र मंथन के दौरान हलाहल विषपान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संपूर्ण सृष्टि की रक्षा के लिए किए गए सर्वोच्च त्याग का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि शिव की जटाओं में बहती गंगा, मस्तक पर चंद्रमा, कंठ का सर्प, नंदी और उनके गण मानव को प्रकृति के साथ सहअस्तित्व और संतुलन का संदेश देते हैं.
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सीएम योगी ने श्रावण की हरियाली और ग्रामीण जीवन का भी भावपूर्ण चित्रण किया. उन्होंने कहा कि बारिश के बाद खेतों में धान की रोपाई, गांवों में सामूहिक श्रम और सहभोज की परंपरा भारतीय संस्कृति की सामाजिक एकजुटता का जीवंत उदाहरण है. वहीं, शिवालयों में उमड़ती श्रद्धालुओं की भीड़ सेवा, स्वच्छता और सामाजिक समरसता का वातावरण तैयार करती है.
मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में लगभग 20 हजार अमृत सरोवर विकसित किए जा चुके हैं, जो जल संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं. उन्होंने राजधानी लखनऊ की एक आवासीय सोसाइटी की सराहना की, जहां आरओ और एयर कंडीशनर से निकलने वाले प्रतिदिन करीब 50 हजार लीटर पानी को रेन वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए भूजल पुनर्भरण में इस्तेमाल किया जा रहा है. इसे उन्होंने पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक पहल बताया.
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अपने संदेश के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे श्रावण माह को सेवा, स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और सामाजिक सहभागिता का महीना बनाने का संकल्प लें. उन्होंने कहा कि “प्रकृति से जितना लें, उतना उसे लौटाने का भी संकल्प होना चाहिए. प्रत्येक बूंद का सम्मान और प्रत्येक पौधे का संरक्षण ही श्रावण का वास्तविक संदेश है. यही समृद्ध, सुरक्षित और विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत आधारशिला बनेगा.”


