Social media accounts closed : हरियाणा के हांसी क्षेत्र के चैनत गांव में पानी की पाइपलाइन से टी-कनेक्शन हटाने का विवाद अब और गहरा गया है। इस मामले में पुलिस और प्रशासन ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। प्रशासन ने धरना दे रहे आंदोलनकारियों और किसान नेताओं के तीस से ज्यादा सोशल मीडिया खातों को पूरी तरह से बंद कर दिया है। इस गांव में पीने के पानी की उचित मांग को लेकर पिछले छियालीस दिनों से लगातार धरना और महापंचायत चल रही थी।
प्रशासन का मानना है कि आंदोलन से जुड़ी भड़काऊ बातें और वीडियो इंटरनेट पर तेजी से फैल रहे थे। इसी सूचना के प्रसार को रोकने के लिए पुलिस ने यह कार्रवाई की है। इसमें करीब दस फेसबुक खाते और बीस से ज्यादा सोशल मीडिया चैनल शामिल हैं। जिन प्रमुख लोगों के खाते बंद किए गए हैं, उनमें आंदोलन से जुड़े अनूप चैनत, सुरेश कौथ, हर्ष छिक्कारा, सरपंच प्रतिनिधि हिमांशु, सुखराम, दीपक और योगेश जैसे नाम शामिल हैं। वहीं धरना दे रहे लोगों का आरोप है कि सरकार इस तरह से उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है।
पूर्व सरपंच के पक्ष में लामबंद हुए ग्रामीण
दूसरी तरफ इस आंदोलन में शामिल रहे पूर्व सरपंच एसोसिएशन हरियाणा के प्रधान सोमेश सरपंच के पक्ष में चरखी दादरी के लोग और खाप पंचायतें खुलकर मैदान में आ गई हैं। क्षेत्र के करीब एक सौ बहत्तर गांवों और गौधड़िया खाप के चालीस गांवों ने सोमेश सरपंच को अपना पूरा समर्थन दिया है। खाप के बुजुर्गों और प्रतिनिधियों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सरकार को साफ चेतावनी दी है कि यदि सोमेश सरपंच के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई की गई, तो पूरे हरियाणा में एक बड़ा आंदोलन शुरू हो जाएगा।
बुजुर्गों की जान बचाने के लिए लगाया था कनेक्शन
खाप नेताओं ने बताया कि कुछ दिन पहले जब धरने पर बैठे पांच बुजुर्गों की तबीयत लगातार बिगड़ रही थी, तब सोमेश सरपंच ने दूसरों के साथ मिलकर एक घंटे के भीतर पाइपलाइन में टी-कनेक्शन लगवा दिया था ताकि गांव को पानी मिल सके और बुजुर्गों की जान बचाई जा सके। आसान भाषा में समझें तो मुख्य पाइपलाइन से गांव की तरफ पानी मोड़ने के लिए अंग्रेजी के टी अक्षर के आकार का एक जोड़ लगाया गया था। हालांकि सरकार ने बाद में इसे पूरी तरह अवैध बताते हुए वहां से हटवा दिया और सोमेश सरपंच पर कानूनी कार्रवाई की बात कही।
मुख्यमंत्री के साथ बातचीत भी रही बेनतीजा
इस बड़े विवाद को सुलझाने के लिए खुद मुख्यमंत्री ने धरना कमेटी के सदस्यों को बातचीत के लिए चंडीगढ़ बुलाया था। लेकिन इस बैठक में दोनों पक्षों के बीच कोई आपसी सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद सोमेश सरपंच ने एलान किया था कि यदि पच्चीस जून तक उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे खुद बेमियादी अनशन पर बैठ जाएंगे। हालांकि बाद में कमेटी के साथ कुछ आपसी मतभेदों के चलते उन्हें धरना स्थल पर आने से रोक दिया गया था, लेकिन अब खापों के आने से मामला दोबारा गरमा गया है।
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