10वीं की बोर्ड परीक्षा में असफल होने वाले विद्यार्थियों के लिए शिक्षा विभाग ने एक राहत भरी और प्रेरणादायक पहल की है। अब अनुत्तीर्ण छात्रों को निराश होने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उन्हें अपनी पढ़ाई और परीक्षा में दोबारा बेहतर प्रदर्शन करने का एक सुनहरा अवसर मिलने जा रहा है। शिक्षा विभाग ने ‘सेकेंड चांस हाई स्कूल सहयोग कार्यक्रम’ को हरी झंडी दे दी है और सभी जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों को इसके सुचारू संचालन के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
हर स्कूल में होगी नोडल शिक्षकों की नियुक्ति
इस कार्यक्रम को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक उच्च माध्यमिक विद्यालय में एक नोडल शिक्षक या शिक्षिका को नामित किया जाएगा। इन शिक्षकों की मुख्य जिम्मेदारी अनुत्तीर्ण छात्रों की दैनिक उपस्थिति, पढ़ाई और उनकी समग्र शैक्षणिक प्रगति पर लगातार नजर रखना होगी। इसके अतिरिक्त, विद्यालयों के पास इन छात्रों और उनके अभिभावकों का पूरा संपर्क विवरण भी सुरक्षित रहेगा, ताकि जरूरत पड़ने पर शिक्षक सीधे परिजनों से संवाद स्थापित कर सकें और बच्चों की कमियों पर चर्चा कर सकें।
प्रतिदिन दो घंटे की अतिरिक्त पढ़ाई और डिजिटल सहायता
इस विशेष अभियान के तहत छात्रों को विषयवार विशेष शिक्षा प्रदान करने के लिए रोजाना लगभग दो घंटे की अतिरिक्त कक्षाएं संचालित की जाएंगी। इस प्रक्रिया में प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन द्वारा नामित फैसिलिटेटर और सदस्य विद्यालय स्तर पर सक्रिय सहयोग प्रदान करेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य कमजोर विद्यार्थियों की बुनियादी शैक्षणिक दक्षताओं को मजबूत करना और आगामी परीक्षाओं के लिए उनकी पुख्ता तैयारी सुनिश्चित करना है।
आत्मविश्वास बढ़ाने और नियमित समीक्षा पर जोर
यह पहल केवल पारंपरिक कक्षाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके तहत बच्चों के अंदर छिपे आत्मविश्वास को जगाने और उनके मानसिक विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। छात्रों के लिए प्रेरणादायक गतिविधियों और मासिक संवाद सत्रों की व्यवस्था की गई है, जो उन्हें भविष्य की पढ़ाई और रोजगार के लिए मानसिक रूप से तैयार करेंगे। जिला शिक्षा पदाधिकारी हेमचंद्र के अनुसार, इस पूरे कार्यक्रम की स्कूल स्तर पर हर महीने नियमित समीक्षा की जाएगी, जिसमें प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के प्रतिनिधि भी अनिवार्य रूप से शामिल होंगे ताकि कोई भी छात्र शिक्षा की मुख्यधारा से वंचित न रहे।


