Lalluram Desk. ईरान के बंदर अब्बास में एक सदी पुराना ऐतिहासिक विष्णु मंदिर है, जिसकी तस्वीरें बॉलीवुड के दिग्गज अमिताभ बच्चन द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर करने के बाद अचानक दुनिया भर का ध्यान खींचने लगा है.
अभिनेता की इंस्टाग्राम पोस्ट ने लाखों फॉलोअर्स को पश्चिम एशिया के सबसे अनोखे सांस्कृतिक स्थलों में से एक से परिचित कराया — एक ऐसा हिंदू मंदिर जो 19वीं सदी के आखिर में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के अंदर बनाया गया था. यह रील तेज़ी से वायरल हो गई, जिससे भारत और ईरान के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंधों को लेकर लोगों में फिर से दिलचस्पी जाग उठी, जिन्हें कई लोग भूल चुके थे.
इन तस्वीरों के साथ कैप्शन में बच्चन ने लिखा: “ईरान के बंदर अब्बास में स्थित प्राचीन हिंदू विष्णु मंदिर… 1892 में कजार काल के दौरान बना यह मंदिर, शहर में काम करने वाले भारत के हिंदू व्यापारियों के लिए बनवाया गया था. साथ में बज रहा गाना… फ़ारसी भाषा में है.”
इस पोस्ट पर हज़ारों लोगों की प्रतिक्रियाएँ आईं; कई यूज़र्स ने इस बात पर हैरानी जताई कि ईरान में भी कोई हिंदू मंदिर मौजूद है, जबकि अन्य लोगों ने दोनों सभ्यताओं के बीच सदियों से चले आ रहे सांस्कृतिक संबंधों की सराहना की.
ईरान में एक मंदिर?
विष्णु मंदिर बंदर अब्बास में स्थित है — फ़ारसी खाड़ी के किनारे बसा एक रणनीतिक बंदरगाह शहर, जो ऐतिहासिक रूप से फ़ारस (ईरान), भारत और अरब जगत को जोड़ने वाले एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र के रूप में काम करता था.
1892 में ईरान के कजार राजवंश के शासनकाल के दौरान बना यह मंदिर, भारत से आए उन हिंदू व्यापारियों और सौदागरों के लिए बनवाया गया था, जो व्यापार के सिलसिले में इस हलचल भरे बंदरगाह शहर में आकर बस गए थे. 19वीं और 20वीं सदी की शुरुआत में बंदर अब्बास में भारतीय कपड़े, मसाले और अन्य सामानों का ज़ोरदार व्यापार होता था.
इतिहासकारों के अनुसार, गुजरात और सिंध जैसे क्षेत्रों से आए कई व्यापारियों ने खाड़ी क्षेत्र में अपने व्यापारिक नेटवर्क स्थापित किए थे, और अपने पीछे ऐसे सांस्कृतिक निशान छोड़े थे जो आज भी वहाँ मौजूद हैं.
यह मंदिर ईरान में हिंदू धार्मिक वास्तुकला के दुर्लभ उदाहरणों में से एक है, और भारतीय उपमहाद्वीप तथा फ़ारस के बीच सदियों पुराने समुद्री व्यापारिक संबंधों की याद दिलाता है.
वास्तुकला में भारतीय प्रभाव की झलक
इस इमारत का डिज़ाइन भारतीय और फ़ारसी वास्तुकला शैलियों का एक अनूठा मेल है. मंदिर का सफ़ेद गुंबद, प्रतीकात्मक चिह्न और प्रार्थना कक्ष, पश्चिमी भारत में पाए जाने वाले हिंदू मंदिरों से काफ़ी मिलते-जुलते हैं — हालाँकि इन्हें स्थानीय ईरानी सौंदर्यबोध के अनुरूप थोड़ा-बहुत ढाला गया है.
हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक, भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर, एक समय इस क्षेत्र में रहने वाले भारतीय व्यापारियों के लिए एक आध्यात्मिक और सामुदायिक केंद्र के रूप में काम करता था. हालाँकि अब यहाँ पहले की तरह बड़े पैमाने पर नियमित पूजा-पाठ नहीं होता, फिर भी इस जगह को एक ऐतिहासिक स्मारक और पर्यटन स्थल के तौर पर सहेजकर रखा गया है.
भारत और ईरान के सांस्कृतिक संबंध बहुत गहरे हैं.
विष्णु मंदिर के फिर से सामने आने से भारत और ईरान के बीच के उन पुराने संबंधों पर चर्चाएँ फिर से शुरू हो गई हैं, जो आज की भू-राजनीति से भी कहीं ज़्यादा पुराने हैं.
सदियों तक फ़ारसी संस्कृति ने भारतीय कला, भाषा, वास्तुकला और शासन-प्रशासन पर गहरा असर डाला, खासकर मुग़ल काल के दौरान. उसी समय, भारतीय व्यापारियों और समुदायों ने फ़ारसी खाड़ी के बंदरगाहों, पूर्वी अफ़्रीका और मध्य एशिया में अपनी जगह बनाई.
विशेषज्ञ अक्सर यह बताते हैं कि इन दोनों क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान सिर्फ़ साम्राज्यों और कूटनीति के ज़रिए ही नहीं, बल्कि व्यापारियों, कवियों, यात्रियों और आध्यात्मिक परंपराओं के ज़रिए भी हुआ.
बंदर अब्बास में स्थित यह मंदिर उसी साझा विरासत का एक जीता-जागता प्रतीक है.
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएँ
बच्चन की पोस्ट के बाद, सोशल मीडिया यूज़र्स ने कमेंट सेक्शन में अपनी प्रतिक्रियाओं की झड़ी लगा दी; ये प्रतिक्रियाएँ हैरानी से लेकर तारीफ़ तक, हर तरह की थीं.
कई लोगों ने इस मंदिर को एक “छिपा हुआ अनमोल रत्न” बताया, जबकि दूसरों ने कहा कि यह इमारत इस बात का सबूत है कि आज के ज़मानें की सीमाओं और राजनीतिक बँटवारों से बहुत पहले, अलग-अलग सभ्यताएँ आपस में कितनी गहराई से जुड़ी हुई थीं.
इस नए सिरे से मिली चर्चा ने भारतीय यात्रियों और इतिहास के शौकीनों के मन में भी जिज्ञासा जगा दी है; ये लोग विदेशों में बसे भारतीय समुदाय से जुड़े उन कम-ज्ञात ऐतिहासिक स्थलों के बारे में और ज़्यादा जानने को उत्सुक हैं.
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