बांग्लादेश में कानून अपने हाथ में लेने और भीड़ द्वारा कथित आरोपियों को खुद सजा देने की घटनाएं गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही हैं. मानवाधिकार संगठनों के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से अगस्त 2026 के बीच देश में भीड़ हिंसा की घटनाओं में कम से कम 154 लोगों की पीट-पीटकर हत्या की गई. फरवरी 2026 के संसदीय चुनाव के बाद BNP के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बावजूद भीड़ हिंसा की घटनाओं का सिलसिला खत्म नहीं हुआ.
पुलिस की कमजोरी, अफवाह और दोषियों पर कार्रवाई न होना इस संकट को और बढ़ा रहा है. कई मामलों में ऐसा देखा जा रहा है कि किसी व्यक्ति पर आरोप लगना ही उसके खिलाफ हिंसा शुरू करने के लिए पर्याप्त हो रहा है.
ढाका स्थित मानवाधिकार संगठन ऐन ओ सालिश केंद्र (ASK) के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से अगस्त 2026 के बीच बांग्लादेश में भीड़ हिंसा में कम से कम 154 लोगों की पीट-पीटकर हत्या की गई. इन घटनाओं में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि कई मामलों में भीड़ के पास आरोपी के खिलाफ कोई पुष्ट जानकारी या जांच का आधार नहीं होता. आरोप फैलता है और उसके बाद भीड़ खुद ही फैसला सुनाने लगती है.
2024 के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद बांग्लादेश की सत्ता व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया. समस्या यह है कि विरोध प्रदर्शन या सामूहिक दबाव की राजनीति कई जगहों पर कानून अपने हाथ में लेने की प्रवृत्ति से जुड़ती दिखाई दे रही है. अंतरिम सरकार के कार्यकाल की समीक्षा करते हुए ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल बांग्लादेश ने मांगों को मनवाने के लिए भीड़ जुटाने की बढ़ती प्रवृत्ति को चिंताजनक बताया था.
बांग्लादेश में सामने आए कई मामलों में लोगों पर चोरी या डकैती का संदेह, धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप या अन्य विवाद सामने आने के बाद भीड़ ने कानून अपने हाथ में लिया.
फरवरी 2026 के संसदीय चुनाव के बाद BNP के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बावजूद भीड़ हिंसा की घटनाओं का सिलसिला खत्म नहीं हुआ. इससे यह सवाल उठा कि समस्या केवल सत्ता में मौजूद राजनीतिक दल से जुड़ी है या फिर पुलिस, न्याय व्यवस्था और कानून लागू करने वाली संस्थाओं की प्रभावशीलता से भी इसका संबंध है.
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m

