चंडीगढ़। हर नागरिक के वोट की कीमत बराबर है। अमीर हो या गरीब, संविधान सभी को एक वोट का अधिकार देता है। लेकिन अगर संविधान बनाने का अधिकार भाजपा के पास होता, तो वोट के अधिकार का गणित ही कुछ और होता। यह तंज हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी संजय दत्त ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कसा है। उन्होंने उद्योगपति मुकेश अंबानी और गौतम अडानी का जिक्र कर वोट चोरी के मुद्दे पर सत्तारूढ़ पार्टी को घेरा।

संजय दत्त ने कहा कि अगर बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का संविधान नहीं होता और भाजपा आज संविधान बना रही होती, तो अंबानी को दो लाख और अडानी को एक लाख वोटों का अधिकार मिलता। वहीं, आम जनता को केवल एक वोट से संतोष करना पड़ता। उनके इस बयान का मकसद भाजपा पर आरोप लगाना था कि उसकी नीतियां बड़े उद्योगपतियों के पक्ष में हैं और आम लोगों के हितों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा।

वोट चोरी के मुद्दे पर भाजपा को घेरा

कांग्रेस नेता ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है, जब वोट चोरी का मुद्दा कांग्रेस के राजनीतिक हमलों में प्रमुखता से उठ रहा है। विपक्ष चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर भाजपा पर सवाल उठाता रहा है। संजय दत्त ने भी अपने बयान के जरिए इसी बहस को आगे बढ़ाते हुए संविधान में दिए गए समान मताधिकार की अहमियत पर जोर दिया।

संविधान और समान मताधिकार पर सियासी बहस

भारत में लोकतंत्र की बुनियाद इस सिद्धांत पर टिकी है कि हर पात्र मतदाता के वोट का समान महत्व है। किसी व्यक्ति की संपत्ति, कारोबार या आर्थिक हैसियत के आधार पर उसके वोट की ताकत नहीं बढ़ती। संजय दत्त ने अंबानी और अडानी का उदाहरण देकर इसी संवैधानिक व्यवस्था की तुलना एक काल्पनिक स्थिति से की और भाजपा पर उद्योगपतियों के हितों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया।

उनके बयान से राजनीतिक बहस में एक बार फिर संविधान, चुनावी प्रक्रिया और उद्योगपतियों के साथ सरकार के संबंधों का मुद्दा सामने आया है। हालांकि, वोट चोरी से जुड़े विशिष्ट आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित तथ्यों और साक्ष्यों को अलग से देखना जरूरी है।

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