रायपुर। “दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि ब्यापा॥” रामचरितमानस की इस प्रसिद्ध चौपाई का आशय ही कि रामराज्य में किसी भी व्यक्ति को दैहिक, दैविक और भौतिक ताप छू भी नही पाते हैं। ऐतिहासिक काल से ही राजमराज्य को एक आदर्श शासन व्यवस्था के रूप में देखा जाता रहा है।

भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में किसी भी प्रधानमंत्री का मूल्यांकन महज़ उनके दलों के लोकप्रिय नारों, चुनावी वादों या राजनीतिक समर्थन-विरोध से नहीं बल्कि उनकी नीतियों, निर्णयों और उनकी योजनाओं का देश के नागरिकों के जीवन पर पड़ रहे प्रत्यक्ष प्रभाव से किया जाता है। आज भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी का जन्मदिन है। 17 सितंबर का यह दिन उनके सार्वजनिक जीवन, 25 वर्षों की राजनैतिक-यात्रा और भारत की बदलती राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक दिशा का तथ्यात्मक आकलन करने के लिए भी उपयुक्त दिन है।

गुजरात के वडनगर में आज से लगभग 76 साल पहले 17 सितंबर 1950 को जन्मे नरेंद्र मोदी ने साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी में कुशलता पूर्वक संगठनात्मक दायित्व निभाने के बाद वर्ष 2001 में नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने। लगभग तेरह वर्षों तक गुजरात का नेतृत्व करने के बाद वर्ष 2014 में भारत के प्रधानमंत्री बने। 2019 और 2024 के आम चुनावों के बाद लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेकर उन्होंने स्वतंत्र भारत के लंबे समय तक कार्यरत प्रधानमंत्री बनने का गौरव हासिल किया। वर्ष 2026 उनकी सफ़ल शासन-यात्रा का 25वां वर्ष माना जा रहा है।

मोदी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों की सूची में गरीब कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता से स्थान दिया जाता रहा है। प्रधानमंत्री जन-धन योजना, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, स्वच्छ भारत मिशन और बिजली तथा बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से सरकार ने उन वंचित वर्गों तक सेवाएँ पहुँचाने का प्रयास किया है जो अब तक विकास की मुख्य धारा से कटे हुए थे।

समर्थकों का मत है कि इन योजनाओं ने करोड़ों लोगों को सरकारी योजनाओं से सीधे जोड़ा और लाभ वितरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया। नरेंद्र मोदी की सरकार में डिजिटल भारत सबसे चर्चित रहा। आधार आधारित सेवाएँ,यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली, डिजिटल दस्तावेज़ और ऑनलाइन सरकारी सेवाओं ने अन्य प्रधानमंत्रियों की तुलना में नागरिकों और सरकार के बीच संपर्क के स्वरूप को बदला है। फिनटेक क्षेत्र में लगातार अपनी भूमिका बढ़ाते हुए भारत आज दुनिया की प्रमुख डिजिटल भुगतान अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाने लगा है।

आत्मनिर्भर भारत और विनिर्माण क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी मोदी सरकार ने अनेक कदम उठाए।रक्षा उत्पादन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर निर्माण, रेलवे, ऊर्जा और औद्योगिक बुनियादी ढाँचे में घरेलू निवेश को प्रोत्साहन दिया जाना राष्ट्रीय विकास की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हो रहा है।एक्सप्रेस-वे, रेल, सड़क, बंदरगाह, मेट्रो और हवाई अड्डों के विस्तार को सरकार ने आर्थिक विकास और कनेक्टिविटी की आधारशिला के रूप में देखा है।

महिला सशक्तिकरण और सामाजिक अभियानों में स्वच्छ भारत मिशन, पोषण, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, शौचालय निर्माण और स्वास्थ्य योजनाओं को व्यापक जनभागीदारी के साथ जोड़ा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उद्देश्य सामाजिक व्यवहार में परिवर्तन और मूलभूत सुविधाओं का विस्तार रहा।

सबसे लम्बे समय तक भारत में प्रधानमंत्रित्व पद पर बने रहने वाले नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर केंद्र सरकार द्वारा “सेवा संकल्प अभियान” की शुरुआत की गई है, जो लगभग एक महीने तक चलने वाला जनहित अभियान है। इसके जनहितकारी अभियान के अंतर्गत स्वच्छता अभियान, रक्तदान, स्वास्थ्य शिविर, वृक्षारोपण, पोषण जागरूकता, दिव्यांग सहायता, जनकल्याण कार्यक्रम और सामुदायिक सेवा जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। देश की केंद्रीय सरकार इसे जनभागीदारी और सेवा भावना का अभियान मान रही है।

हाल के वर्षों में सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा अभियानों, सड़क और संचार नेटवर्क, विकास योजनाओं और प्रशासनिक पहुँच को मजबूत करने में सफल होने का दावा किया है। केंद्रीय सरकार का कहना है कि देश के नक्सल प्रभावित क्षेत्र पहले की तुलना में काफी घटे हैं और “नक्सल मुक्त भारत” की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। हालांकि इस लक्ष्य की स्थायी सफलता का आकलन आने वाले समय में सुरक्षा, विकास और स्थानीय विश्वास निर्माण के आधार पर ही किया जा सकेगा।

इस लंबे शासनकाल में मोदी की राष्ट्रवादी सरकार को भी गंभीर चुनौतियों और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। कृषि कानूनों के विरोध में चले किसान आंदोलन को लोकतांत्रिक राजनीति की सबसे बड़ी घटनाओं में एक माना जाता है। लगभग एक वर्ष तक चले आंदोलन के बाद केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस लेने की घोषणा कर बैक फुट पर आई थी। अपने इस फ़ैसले को केंद्र सरकार ने जनभावनाओं के आधार पर लिया गया निर्णय कहा जबकि आलोचकों ने इसे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक झटका माना।

इसी प्रकार जंतर-मंतर पर विभिन्न सामाजिक और खिलाड़ी आंदोलनों ने महिला सुरक्षा, न्याय और जवाबदेही जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय बहस का विषय बनाने में मोदी सरकार के ख़िलाफ़ सफलता पाई है। विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने इन मामलों में सरकार की भूमिका पर कई आग्नेय प्रश्न उठाए थे जबकि सरकार ने इस पर महज़ कानूनी प्रक्रिया और संस्थागत कार्रवाई की बात कही। ऐसे आंदोलन लोकतांत्रिक राष्ट्र में नागरिक असहमति और जवाबदेही की आवश्यकता को भी रेखांकित करने वाले साबित हुए हैं।

मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत की विदेश नीति अन्य सरकारों की तुलना में अधिक सक्रिय दिखाई देती है।ब्रिक्स समिट की अध्यक्षता, जी-20 की अध्यक्षता, वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भागीदारी, अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ और रणनीतिक संबंधों के विस्तार को देश की मोदी सरकार अपनी उपलब्धियों में शामिल करती है। जबकि रोजगार, कृषि आय, महंगाई, सामाजिक असमानता और संस्थाओं की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर बहस, विरोध और आलोचना लगातार जारी रही।

नरेंद्र मोदी का नेतृत्व भारतीय राजनीति पर गहरा प्रभाव छोड़ चुका है और 25 वर्षों की उनकी सार्वजनिक यात्रा का निष्कर्ष भी यही है। नरेंद्र मोदी के समर्थक इसे परिवर्तन, विकास और मजबूत नेतृत्व का दौर मानते हैं, जबकि आलोचक सामाजिक चुनौतियों,नीतिगत निर्णयों और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े प्रश्न उठाते हैं। लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति का संतुलन भी इसी में है कि सरकार की उपलब्धियों का तथ्यात्मक मूल्यांकन हो, उनकी असफलताओं और चुनौतियों पर खुला विमर्श हो और राष्ट्र के भविष्य की दिशा पर निरंतर संवाद चलता रहे।

17 सितंबर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी का जन्मदिन यह याद दिलाने का अवसर भी है कि जनसेवा की सबसे बड़ी कसौटी अंततः केंद्र सरकार के प्रति आम जनता का स्वानुभव और लोकतांत्रिक जवाबदेही होती है।

संदीप अखिल,
सलाहकार संपादक,
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम