Automobile Desk : Modular Platform : ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में जब भी कोई नई कार बाजार में कदम रखती है, तो उसका अट्रैक्टिव लुक, केबिन डिजाइन और धांसू फीचर्स सबसे पहले लोगों का ध्यान खींचते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ही शोरूम में खड़ी दो बिल्कुल अलग दिखने वाली गाड़ियों की आत्मा, यानी उनका अंडरपिनिंग्स और बेसिक स्ट्रक्चर एक ही हो सकता है? आज के दौर में ऑटोमेकर्स बिना हर कार के लिए नया ढांचा तैयार किए, एक ही बुनियादी आर्किटेक्चर पर हैचबैक, सेडान और कॉम्पैक्ट SUV तक तैयार कर रहे हैं। इस अनोखी इंजीनियरिंग अप्रोच को ऑटोमोबाइल जगत में ‘शेयर्ड प्लेटफॉर्म’ या ‘मॉड्यूलर आर्किटेक्चर’ कहा जाता है।

सरल शब्दों में समझें तो यह किसी अपार्टमेंट की नींव और पिलर्स की तरह है। पिलर्स और फ्लोर प्लान का दायरा तय रहता है, लेकिन उसके ऊपर कमरों का लेआउट, बालकनी की चौड़ाई और इंटीरियर की सजावट पूरी तरह बदली जा सकती है। कार प्लेटफॉर्म में भी गाड़ी का अंडरबोडी स्ट्रक्चर, व्हीलबेस की बुनियादी गुंजाइश, फ्रंट-टू-रियर एक्सल रेशियो और सस्पेंशन माउंटिंग प्वाइंट्स पहले से तय होते हैं। इसके बाद डिजाइनर्स और इंजीनियर्स इसी बेस के ऊपर गाड़ियों की लंबाई, चौड़ाई, ग्राउंड क्लीयरेंस और बॉडी टाइप में मनचाहा बदलाव करके अलग-अलग सेगमेंट के वाहन खड़े कर देते हैं।
इस टेक्नोलॉजी को अपनाने का सबसे मुख्य कारण रिसर्च, डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग में लगने वाली बेतहाशा लागत को नियंत्रित करना है। किसी भी नए कार प्लेटफॉर्म को शून्य से डिजाइन करने, उसकी क्रैश टेस्टिंग कराने और फैक्ट्री में असेंबली लाइन सेट करने में सालों का वक्त और अरबों रुपये का निवेश लगता है। अगर कंपनियां हर गाड़ी के लिए अलग ढांचा बनाने लगें, तो नई गाड़ियों की कीमतें आम खरीदार की पहुंच से बाहर हो जाएंगी। एक ही फ्लेक्सिबल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने से पार्ट्स की सामूहिक खरीदारी (Bulk Sourcing) आसान हो जाती है, जिससे सप्लायर से बेहतर डील मिलती है और प्रोडक्शन का समय आधा रह जाता है।
ग्राहकों के लिए इस पूरी प्रक्रिया का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जो एडवांस्ड सेफ्टी फीचर्स, स्टेबिलिटी और इलेक्ट्रॉनिक्स सिर्फ महंगी और लक्जरी गाड़ियों तक सीमित थे, वे अब कम कीमत वाली एंट्री-लेवल कारों में भी आसानी से मिलने लगे हैं। एक ही मजबूत और टेस्टेड क्रैश-सेफ्टी आर्किटेक्चर पर बनी होने के कारण बजट गाड़ियों की बिल्ड क्वालिटी और रोड होल्डिंग कैपेसिटी में जबरदस्त सुधार आया है।
हालांकि, अक्सर लोगों के मन में यह भ्रम रहता है कि एक ही प्लेटफॉर्म पर बनी दो कारें चलाने में बिल्कुल एक जैसी होंगी। हकीकत इससे काफी अलग है। कार कंपनियां व्हील साइज, सस्पेंशन की डैम्पिंग, स्टीयरिंग रिस्पॉन्स और इंजन ट्यूनिंग को हर मॉडल के कैरेक्टर के हिसाब से अलग सेट करती हैं। इसलिए, एक ही बेस पर बनी फैमिली सेडान जहां सस्पेंशन के मामले में बेहद सॉफ्ट और आरामदायक महसूस होगी, वहीं उसी प्लेटफॉर्म पर बनी स्पोर्टी SUV सड़क पर ज्यादा सख्त और एग्रेसिव हैंडलिंग दे सकती है।
डिजिटल क्रांति के इस दौर में अब प्लेटफॉर्म सिर्फ लोहे के चेसिस तक सीमित नहीं रह गए हैं। आज ऑटोमेकर्स ‘स्केटबोर्ड आर्किटेक्चर’ और ‘सॉफ्टवेयर-डिफाइंड प्लेटफॉर्म्स’ तैयार कर रहे हैं। इन आधुनिक प्लेटफॉर्म्स का सबसे बड़ा फायदा यह है कि एक ही असेंबली लाइन पर पेट्रोल-डीजल इंजन, हाइब्रिड सेटअप और प्योर इलेक्ट्रिक (EV) बैटरी पैक वाली गाड़ियों का निर्माण एक साथ किया जा सकता है। इससे ऑटो कंपनियों को बदलती मार्केट डिमांड के हिसाब से तुरंत अपने मॉडल्स अपडेट करने की आजादी मिलती है।



