भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते शुरू से ही खराब रहे है, 2014 के बाद से तो ये अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहा है. दोनों देशों के बीच आजादी के बाद से ही आपसी दुश्मनी बनी हुई है. दोनों देश कई बार जंग भी लड़ चुके हैं, सभी में भारत ने पाकिस्तान को पटखनी दी है. आज वर्तमान दौर में स्थिति ऐसी है कि दोनों देशों में राजनयिक संबंध न के बराबर है. इस बीच पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य प्रवक्ता ने भारत की बढ़ती सैन्य क्षमताओं को स्वीकार किया है, साथ ही यह भी स्वीकार किया कि इस्लामाबाद नई दिल्ली के साथ किसी भी तरह से हथियारों की होड़ में शामिल नहीं है.
अल अरबिया इंग्लिश को दिए एक इंटरव्यू में पाकिस्तान के लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी से पूछा गया कि भारत की वायु रक्षा, मिसाइल और पारंपरिक हमले की क्षमताओं में हो रहे विकास को लेकर पाकिस्तान कितना चिंतित है, तो इसके जवाब में, उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भारत की सैन्य क्षमताओं का पूरा “सम्मान” करता है और अपने रक्षा शस्त्रागार में निवेश करने के नई दिल्ली के प्रयासों को भी समझता है.
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान भी अपनी रक्षात्मक क्षमताओं पर ध्यान केंद्रित कर रहा है और किसी भी देश के खिलाफ उसकी कोई “आक्रामक मंशा” नहीं है. पाक सैन्य अफसर ने कहा, “हम भारतीय सैन्य क्षमताओं का पूरा सम्मान करते हैं. हम उनके सैन्य शस्त्रागार और सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने में बहुत सारा पैसा और संसाधन खर्च करने की उनकी इच्छा को समझते हैं.” उन्होंने यह भी कहा, “हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हम भारतीयों के साथ किसी तरह की हथियारों की होड़ में शामिल हैं.”
ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब भारत अपने स्वदेशी रक्षा विनिर्माण आधार का विस्तार कर रहा है और साथ ही एडवांस्ड मिलिट्री प्लेटफार्मों पर स्थापित भागीदारों के साथ काम कर रहा है.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत डिफेंस सेक्टर में लगातार कर रहा निवेश
पिछले साल पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद से भारत के प्रयासों को और गति मिली है, जिसमें ऐसी क्षमताओं को मजबूत करने पर अधिक जोर दिया गया है जो संभावित डबल फ्रंट वाली सुरक्षा स्थिति में प्रासंगिक हो सकती हैं.
मई 2025 में, भारत ने 1,460 करोड़ रुपये की नवदुर्गा डिफेंस टेस्टिंग रेंज की आधारशिला रखी. इस जुलाई 2026 में, प्रोजेक्ट कुशा के तहत, भारत ने स्वदेशी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल कार्यक्रम के तहत पहली फ्लाइट टेस्ट किया, जिसकी अधिकतम सीमा 400 किमी तक किए जाने की योजना है.
अग्नि सीरीज और आकाश के जरिए मजबूत सुरक्षा
पिछले महीने ही, सरकार ने अपने पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों के लिए DRDO टेक्नोलॉजीज को भारतीय कंपनियों को हस्तांतरित करने को भी मंजूरी दी, इससे प्राइवेट सेक्टर को ऐसी प्रणालियों के विकास और उत्पादन में बड़ी भूमिका मिली.
भारत के एयर डिफेंस नेटवर्क में आकाश, आकाश-NG, QRSAM और VSHORADS जैसे सिस्टम शामिल हैं. वहीं, ब्रह्मोस भारत-रूस का साझा कार्यक्रम है, जबकि MRSAM को भारत और इजरायल दोनों के सहयोग से तैयार किया जा रहा है.
अग्नि सीरीज और K-सीरीज की पनडुब्बी से लॉन्च की जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स हैं जो भारत की परमाणु निवारक क्षमता का हिस्सा हैं और व्यापक औद्योगिक भागीदारी के लिए खोली जा रही पारंपरिक मिसाइल प्रौद्योगिकियों से अलग हैं.
रूस के साथ संबंधों का एक और अहम पहलू
भारत अपनी अत्याधुनिक रक्षा नीति में आत्मनिर्भर भारत की नीति की शुरुआत की है. ऐसे में उसने अपने घरेलू प्रोग्राम के साथ-साथ, भारत रूस जैसे अहम साझेदारों के साथ भी रक्षा सहयोग बढ़ा रहा है. ब्रिक्स समिट के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दिल्ली दौरे के दौरान, ऐसी खबरें आईं कि मॉस्को ने भारत के Su-30MKI बेड़े के आधुनिकीकरण में मदद के लिए एक एडवांस्ड इंजन देने का प्रस्ताव दिया है.
साथ ही भारत और रूस 260 Su-30MKI विमानों के लिए करीब 11 अरब डॉलर के “सुपर सुखोई” अपग्रेड प्रोग्राम पर बातचीत कर रहे हैं, जिसके शुरुआती चरण में 84 विमान शामिल होने की उम्मीद है. इसके अलावा रूस ने भारत में Su-57 पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स के संयुक्त उत्पादन का प्रस्ताव भी दिया है, साथ ही अतिरिक्त S-400 एयर डिफेंस सिस्टम और नए S-500 सिस्टम का प्रस्ताव भी रखा है. मॉस्को ने भारत में S-400 के रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल की सुविधा स्थापित करने का प्रस्ताव भी दिया है.
इसके अलावा, भारत अपने घरेलू एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के जरिए पांचवीं पीढ़ी के फाइटर प्रोग्राम पर भी काम कर रहा है. हालांकि इसकी तुलना में पाकिस्तान अभी भी बहुत पीछे नजर आता है. पाकिस्तान अपने सैन्य साझेदारियों के लिए खासकर चीन और तुर्की पर हद से ज्यादा निर्भर है.
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