पूर्व IPS अधिकारी किरण बेदी (Kiran Bedi) ने सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे से जुड़ी जनहित याचिका में खुद को पक्षकार बनाए जाने की मांग की है। केंद्र सरकार ने उनकी इस मांग का दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) में विरोध किया है। सरकार की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि किरण बेदी इस मामले में पहले ही अपनी राय बना चुकी हैं। मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय दिया है। इसके बाद अदालत इस मामले में आगे की सुनवाई करेगी। बता दें कि दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पीजी इमारत गिरने की घटना में पांच छात्रों समेत 7 लोगों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद इमारत की स्थिति और निर्माण नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।

बार एंड बेंच के मुताबिक, मामले की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ कर रही है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि प्रशासन के क्षेत्र में किरण बेदी के व्यापक अनुभव का इस मामले में इस्तेमाल किया जा सकता है। अदालत के इस रुख के बाद किरण बेदी की जनहित याचिका में पक्षकार बनाए जाने की मांग पर आगे की सुनवाई होगी। हालांकि, केंद्र सरकार ने उनकी मांग का विरोध किया है और इस पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से तीन दिन का समय मांगा है।

सरकार ने जताया विरोध

केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और एमसीडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने किरण बेदी को जनहित याचिका में पक्षकार बनाए जाने की मांग का विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि सरकार इस मामले में बेदी की ओर से दायर पक्षकार बनाए जाने की अर्जी पर अपनी आपत्ति दर्ज कराएगी। चेतन शर्मा ने कहा कि सरकार की ओर से इस संबंध में विस्तृत जवाब दाखिल किया जाएगा। उन्होंने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिसके बाद हाई कोर्ट ने सरकार को तीन दिन का समय दिया। इसके बाद अदालत किरण बेदी की अर्जी पर आगे विचार करेगी।

सरकार का तर्क- वह अपनी राय पहले ही बना चुकी हैं

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि किरण बेदी एक सजग नागरिक हैं और उनके पास प्रशासनिक क्षेत्र का व्यापक अनुभव है। अदालत ने इस मामले को बड़े जनहित से जुड़ा बताते हुए कहा कि उनके लंबे अनुभव का इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही अदालत ने सरकार से मामले को विरोधात्मक तरीके से नहीं लेने की बात कही। हालांकि, केंद्र, दिल्ली सरकार और एमसीडी की ओर से पेश एएसजी चेतन शर्मा ने किरण बेदी की ओर से दायर पक्षकार बनाए जाने की अर्जी का हवाला देते हुए इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि बेदी इस मामले में पहले ही अपनी राय बना चुकी हैं, इसलिए सरकार उनकी अर्जी पर आपत्ति दर्ज कराएगी। चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि सरकार की ओर से पक्षकार बनाए जाने की अर्जी पर जवाब दाखिल किया जाएगा। हाई कोर्ट ने सरकार को अपनी आपत्तियां दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय दिया है।

हादसे पर अदालत की टिप्पणी

दिल्ली हाई कोर्ट ने सत्य निकेतन में बहुमंजिला हॉस्टल की इमारत ढहने की घटना को लेकर सुनवाई के दौरान कहा कि यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं थी। इस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी, जिनमें अधिकतर छात्र थे। अदालत ने कहा कि जान गंवाने वाले छात्र अपने करियर और बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर छोटे शहरों से देश की राजधानी आए थे। लेकिन कुछ लोगों के “लापरवाह और आपराधिक आचरण” के कारण उनके सपने चकनाचूर हो गए।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m