शिखिल ब्यौहार/ राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। राजधानी भोपाल में आज संविदा बिजली कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। नियमितीकरण की मांग को लेकर करीब 5 हजार कर्मचारी भोपाल के गोविंदपुरा स्थित बिजली कॉलोनी के निष्ठा परिसर में धरना-प्रदर्शन पर बैठे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि ऊर्जा विभाग ने 24 जुलाई 2026 को परिपत्र जारी कर विभागीय परीक्षा के माध्यम से 31 अक्टूबर तक नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया था। लेकिन 3 महीने बाद भी परीक्षा का नोटिफिकेशन तक जारी नहीं हुआ।
बिजली कर्मचारी संगठनों ने ऊर्जा मंत्री को ज्ञापन सौंपा था और 25 दिन पहले आंदोलन का नोटिस भी दिया था, पर सुनवाई नहीं हुई। प्रदेश में 500 पदों के लिए स्वीकृति मिली है, जबकि 5 हजार संविदा कर्मचारी इंतजार में हैं। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि दिवाली से पहले प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा। वहीं मप्र विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मंच ने भी 20 सूत्रीय मांगों को लेकर 3 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है।
यह है पूरी कहानी
24 जुलाई 2026 को ऊर्जा विभाग ने विभागीय परीक्षा लेकर संविदा कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश जारी किया था। पांच विद्युत कंपनियों के करीब पांच हजार संविदा कर्मचारी परीक्षा के दायरे में आए हैं। मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी जबलपुर को नोडल एजेंसी बनाया गया है। परिपत्र में प्रक्रिया 31 अक्टूबर 2026 तक पूरी करने का उल्लेख किया गया है।
इन विद्युत कंपनियों के हैं संविदा कर्मचारी
मप्र पूर्व क्षेत्र विविकं, जबलपुर
मप्र पश्चिम क्षेत्र विविकं इंदौर
मप्र मध्य क्षेत्र विविकं भोपाल
मप्र पावर ट्रांसमिशन कंपनी जबलपुर
एम पी पावर मैनेजमेंट कंपनी जबलपुर
कर्मचारियों को हर महीना 13 हजार से 43 हजार तक का नुकसान होगा। संविदा कर्मचारियों का वेतन अभी लगभग 27 हजार से लेकर 67 हजार रुपए तक है। परमानेंट होने पर कर्मचारियों का वेतन लगभग 40 हजार से लेकर एक लाख 10 हजार रुपए तक हो जाएगा।
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