दिल्ली के जनकपुरी इलाके में एक निजी स्कूल से जुड़े गंभीर आपराधिक मामले ने सनसनी फैला दी है। यहां एक तीन वर्षीय बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म का मामला सामने आया है, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना जनकपुरी स्थित एक निजी स्कूल में सामने आई, जहां स्कूल के एक केयरटेकर पर यह आरोप लगाया गया है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने बच्ची का मेडिकल परीक्षण कराया और उसके बयान के आधार पर मामला दर्ज किया। इस संबंध में दिल्ली पुलिस ने जांच शुरू करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

परिजनों ने इस मामले में कई गंभीर आरोप और सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वारदात के समय स्कूल परिसर में एक शिक्षिका भी मौजूद थी, लेकिन कथित तौर पर उस पर स्कूल प्रबंधन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। जनकपुरी स्थित इस निजी स्कूल मामले में परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि दुष्कर्म जैसे गंभीर मामले में केस दर्ज होने के बावजूद आरोपी को जमानत मिल गई, जिससे वे बेहद नाराज हैं। हालांकि, इस पूरे मामले में जमानत और कानूनी प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक पुष्टि अलग से जांच का विषय है। परिजनों ने पीड़ित बच्ची के लिए न्याय की मांग करते हुए कहा है कि स्कूल प्रशासन की भूमिका की भी गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि स्कूल के बेसमेंट में कमरे और बेड जैसी सुविधाओं की जरूरत क्यों थी और वहां किस उद्देश्य से इनका उपयोग किया जा रहा था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पीड़ित बच्ची अपने परिवार के साथ विकासपुरी इलाके में रहती है। परिजनों ने इसी शैक्षणिक सत्र में उसका दाखिला एक निजी स्कूल की नर्सरी कक्षा में कराया था। बताया गया कि बच्ची ने 28 अप्रैल से स्कूल जाना शुरू किया था और इसके कुछ ही दिनों बाद मामला सामने आया। पुलिस को इस घटना की जानकारी 30 अप्रैल की रात को मिली।

स्कूल जाने के बाद पहले दिन ही बिगड़ी तबीयत

बच्ची की मां के बयान के अनुसार, बच्ची 28 अप्रैल को स्कूल गई थी और वहां से लौटने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। अगले दिन, यानी 29 अप्रैल को भी बच्ची स्कूल गई। उस दिन जब परिजन उसे लेने स्कूल पहुंचे, तो वह घर लौट आई। घर आने के बाद बच्ची सो गई, जिसके बाद परिवार ने उसकी स्थिति पर ध्यान दिया। विकासपुरी से जुड़ी इस घटना में परिवार के अनुसार इन दोनों दिनों की गतिविधियों के बाद बच्ची की तबीयत और व्यवहार में बदलाव देखा गया, जिसके चलते परिजनों को संदेह हुआ और मामला आगे बढ़ा।

दोपहर को सोकर उठी तो बच्ची दर्द से कराहने लगी

बच्ची की मां के बयान के अनुसार, घटना 29 अप्रैल की दोपहर के बाद सामने आई। उन्होंने बताया कि करीब 4:30 बजे जब बच्ची सोकर उठी, तो वह तेज दर्द से रोने लगी और परेशान दिखाई दी। मां के अनुसार, जब उन्होंने बच्ची से कारण पूछा तो बच्ची ने स्कूल में हुई घटना का जिक्र किया, जिसके बाद उन्होंने तुरंत अपने पति को सूचना दी। इसके बाद परिवार बच्ची को लेकर एक निजी अस्पताल पहुंचा। परिजनों का आरोप है कि निजी अस्पताल में डॉक्टरों ने मामले को “पुलिस केस” बताते हुए इलाज शुरू नहीं किया और उन्हें सरकारी अस्पताल जाने की सलाह दी।

मेडिकल के बाद डॉक्टरों ने की रेप की पुष्टि

इसके बाद परिजन बच्ची को उपचार के लिए दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने मेडिकल जांच के दौरान बच्ची के साथ दुष्कर्म की पुष्टि की। घटना की गंभीरता सामने आने के बाद परिजनों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पीसीआर कॉल मिलने के बाद दिल्ली पुलिस की जनकपुरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची का विस्तृत मेडिकल परीक्षण कराया गया। मेडिकल रिपोर्ट में पुष्टि होने के बाद पुलिस ने बच्ची के बयान दर्ज किए।

पुलिस को खुद गोदाम में लेकर पहुंची बच्ची

मामले की जांच के तहत दिल्ली पुलिस की टीम 30 अप्रैल को बच्ची को लेकर स्कूल पहुंची। वहां स्कूल में मौजूद कर्मचारियों, जिनमें केयरटेकर और चौकीदार शामिल थे, की पहचान करवाई गई। इस दौरान बच्ची ने 57 वर्षीय केयरटेकर को आरोपी के रूप में पहचान लिया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, बच्ची जांच टीम को स्कूल परिसर के गोदाम में बने उस कमरे तक भी लेकर गई, जहां कथित तौर पर घटना को अंजाम दिया गया था। वहां उसने पुलिस को पूरी आपबीती बताई। जांच के दौरान पुलिस को कमरे में बिस्तर लगा हुआ मिला, जिसके बाद मौके से जरूरी साक्ष्य एकत्र किए गए। बच्ची की पहचान और शुरुआती जांच के आधार पर पुलिस ने आरोपी केयरटेकर को तत्काल गिरफ्तार कर लिया।

शिक्षिका और पुलिस पर लगे आरोप

पीड़ित बच्ची के परिजनों ने मामले को लेकर स्कूल प्रबंधन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बच्ची के पिता का आरोप है कि बच्ची ने पुलिस के सामने दिए बयान में बताया था कि वारदात के समय गोदाम में एक शिक्षिका भी मौजूद थी, लेकिन इसके बावजूद स्कूल प्रशासन ने संबंधित शिक्षिका के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। परिजनों का यह भी आरोप है कि दिल्ली पुलिस की ओर से उन्हें लगातार परेशान किया गया। उनका कहना है कि बच्ची और परिवार के सदस्यों को कई-कई घंटों तक थाने में बैठाकर रखा गया और बच्ची के बयान बार-बार दर्ज किए गए। परिवार का दावा है कि लगातार पूछताछ और बयान लेने की प्रक्रिया से बच्ची मानसिक सदमे में है। परिजनों ने मामले में संवेदनशीलता बरतने और जांच प्रक्रिया को बच्चों के अनुकूल तरीके से संचालित करने की मांग की है।

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