लखनऊ. 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने सोमवार(28 सितंबर 2026) को नियुक्ति की मांग को लेकर लखनऊ में प्रदर्शन किया. बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के आवास का घेराव किया. प्रदर्शनकारी मंत्री के दरवाजे पर बैठ गए और ‘राजभर चाचा न्याय करो’ के नारे लगाए करीब आधे घंटे तक नारेबाजी के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई.
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‘आरक्षण की चोरी है’ के लगाए नारे
प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने ‘ऐसी क्या मजबूरी है-आरक्षण की चोरी है’ और ‘पिछड़ा आयोग ने माना है-आरक्षण घोटाला है’ जैसे नारे लगाए. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाने का प्रयास किया. अभ्यर्थियों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें जबरन हटाकर ईको गार्डन भेज दिया. कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बदसलूकी और कपड़े फाड़ने का भी आरोप लगाया है.
‘मंत्री-अधिकारियों ने भी माना घोटाला’
प्रदर्शन में शामिल नवीन ने दावा किया कि 10 सितंबर को अभ्यर्थियों की बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह और माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी से मुलाकात हुई थी. उनके मुताबिक, बैठक में दोनों विभागों के अधिकारी भी मौजूद थे. नवीन का आरोप है कि बैठक में भर्ती में गड़बड़ी की बात स्वीकार की गई. उन्होंने कहा कि राज्य और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेशों के बावजूद नियुक्ति को लेकर निर्णय नहीं लिया जा रहा है.
‘8 साल से नौकरी के लिए भटक रहे’
अभ्यर्थी आशुतोष वर्मा ने कहा कि 2018 में भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद से अभ्यर्थी लगातार नौकरी की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि जब तक भर्ती का शेड्यूल जारी नहीं होगा, आंदोलन जारी रहेगा. अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि भर्ती में आरक्षण संबंधी नियमों का पालन नहीं हुआ.
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5% छूट देकर नई चयन सूची की मांग
अभ्यर्थियों के मुताबिक, 2018 की भर्ती में दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 5 प्रतिशत की छूट का प्रावधान था. उनका दावा है कि इसका लाभ नहीं मिला. अब वे परीक्षा के पासिंग मार्क्स में 5 प्रतिशत छूट देकर परिणाम संशोधित करने और नई चयन सूची जारी करने की मांग कर रहे हैं. अभ्यर्थियों के अनुसार, 150 अंकों की परीक्षा में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत पर परिणाम तैयार किया जाना चाहिए.


