68500 सहायक अध्यापक भर्ती में आरक्षण विसंगति को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने सोमवार को लखनऊ में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के सरकारी आवास पर सुंदरकांड पाठ किया. अभ्यर्थियों ने ओबीसी आरक्षण के लाभ के अनुसार परिणाम संशोधित करने, नियुक्ति देने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की.
लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 68500 सहायक अध्यापक भर्ती में आरक्षण संबंधी विसंगति को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने सोमवार को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के सरकारी आवास पर प्रदर्शन किया. पिछले कई सप्ताह से धरने पर बैठे अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए वहां सुंदरकांड का पाठ किया.
पुलिस ने ईको गार्डन भेजा
मंत्री के आवास पर अभ्यर्थियों के पहुंचने के बाद पुलिस ने मौके पर व्यवस्था संभाली. प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों को बसों में बैठाकर ईको गार्डन भेज दिया गया.
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे तूफान सिंह और आशुतोष वर्मा ने कहा कि अभ्यर्थी राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेशों को लागू कराने की मांग कर रहे हैं. उनके मुताबिक, आंदोलन 55 दिनों से अधिक समय से जारी है.
आरक्षण विसंगति दूर करने की मांग
अभ्यर्थियों की मांग है कि ओबीसी वर्ग के पात्र उम्मीदवारों को आरक्षण का पूरा लाभ दिया जाए और 150 में से 60 अंक यानी 40 प्रतिशत के आधार पर परिणाम में संशोधन किया जाए. उन्होंने योग्य अभ्यर्थियों को जल्द नियुक्ति देने की मांग भी उठाई.
आंदोलनकारियों ने भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण संबंधी विसंगति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है.
क्रमिक भूख हड़ताल का ऐलान
धरना प्रभारी नवीन चौधरी ने कहा कि अभ्यर्थी अब क्रमिक भूख हड़ताल शुरू करेंगे. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से ठोस और लिखित निर्णय आने तक धरना जारी रखा जाएगा.
अभ्यर्थियों ने ‘दस्तक दो’ अभियान चलाने की भी घोषणा की है. इसके तहत वे रोजाना किसी जनप्रतिनिधि के सरकारी आवास पर जाकर भर्ती नियमों के अनुसार अपना अधिकार दिलाने और आयोगों के आदेश लागू कराने की मांग रखेंगे.
महिला अभ्यर्थियों ने भी उठाई आवाज
प्रदर्शन में शामिल महिला मोर्चा की प्रतिनिधि रंजना जायसवाल ने कहा कि दूर-दराज के क्षेत्रों से आई महिलाएं भी लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं. उन्होंने कहा कि जब आयोगों की जांच में आरक्षण संबंधी विसंगति सामने आ चुकी है, तो सरकार को हस्तक्षेप कर उसे जल्द दूर करना चाहिए.
अभ्यर्थियों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि भर्ती में आरक्षण से जुड़ी विसंगति दूर कराने और आयोगों के आदेशों को लागू कराने के लिए है.

