Business Desk – 8th Pay Commission Update : आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपए से बढ़कर सीधे 69,000 रुपए हो जाएगी? सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से वायरल हो रहा है.

हालांकि, मार्केट एक्सपर्ट और फाइनेंशियल एनालिस्ट संजय कथूरिया का कहना है कि इस दावे के पीछे का गणित समझना जरूरी है. उन्होंने बताया कि 69,000 रुपए का आंकड़ा एक संभावित गणना है, लेकिन इसे अंतिम फैसला मानना सही नहीं होगा.

बेसिक सैलरी क्यों होती है सबसे अहम?

हर 10 साल में केंद्र सरकार महंगाई, जीवन-यापन की लागत और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए नया वेतन आयोग गठित करती है. लेकिन कर्मचारियों की सैलरी सिर्फ हाथ में आने वाले वेतन से तय नहीं होती. इसकी नींव बेसिक पे होती है. किसी भी कर्मचारी की ग्रॉस सैलरी में बेसिक पे के अलावा महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और अन्य भत्ते शामिल होते हैं. इसके बाद एनपीएस (NPS), इनकम टैक्स और अन्य कटौतियों के बाद नेट सैलरी कर्मचारी के खाते में आती है.

नए वेतन आयोग के लागू होने पर सबसे पहले मौजूदा महंगाई भत्ते (DA) को शून्य करके उसे नई बेसिक सैलरी में मर्ज किया जाता है. यही वजह है कि नई बेसिक पे पुरानी बेसिक सैलरी की तुलना में काफी अधिक दिखाई देती है.

क्या है फिटमेंट फैक्टर, जिससे तय होगी नई सैलरी?

आठवें वेतन आयोग में कर्मचारियों की नई बेसिक सैलरी का सबसे बड़ा आधार फिटमेंट फैक्टर होगा. यह वही गुणांक (Multiplier) है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा करके नई बेसिक सैलरी तय की जाती है.

फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपए है. कर्मचारी संगठनों ने सरकार से 3.83 फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग की है. अगर सरकार इस मांग को स्वीकार करती है, तो गणित कुछ इस प्रकार होगा.

18,000 × 3.83 = 68,940 रुपए

यानी नई न्यूनतम बेसिक सैलरी करीब 69,000 रुपए हो सकती है. यही आंकड़ा इन दिनों सोशल मीडिया और कई प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहा है.

क्या सरकार वास्तव में 69,000 रुपए बेसिक सैलरी दे सकती है?

मार्केट एक्सपर्ट संजय कथूरिया के मुताबिक, केवल कर्मचारी संगठनों की मांग के आधार पर वेतन तय नहीं होता. सरकार को वेतन बढ़ाने से पहले कई आर्थिक पहलुओं पर विचार करना पड़ता है. इनमें राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit), रक्षा खर्च, कच्चे तेल की कीमतें, सामाजिक कल्याण योजनाओं पर खर्च, केंद्र और राज्यों की वित्तीय स्थिति जैसे कई कारक शामिल होते हैं. इसी वजह से कई पॉलिसी एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार 2.0 से 2.6 के बीच फिटमेंट फैक्टर तय कर सकती है.

तो कितनी हो सकती है नई बेसिक सैलरी?

यदि फिटमेंट फैक्टर 2.0 से 2.6 के बीच रहता है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी लगभग 36,000 रुपए से 47,000 रुपए के बीच हो सकती है. वहीं अंतिम सिफारिशों और वेतन संरचना के आधार पर यह आंकड़ा 40,000 रुपए से 52,000 रुपए के बीच भी पहुंच सकता है. यानी फिलहाल 69,000 रुपए की बेसिक सैलरी को लेकर किया जा रहा दावा केवल एक संभावित गणना है, न कि सरकार का आधिकारिक फैसला.

बढ़ी हुई सैलरी कब मिलेगी?

आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों को जनवरी 2026 से लागू किए जाने की चर्चा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कर्मचारियों के खाते में उसी समय बढ़ा हुआ वेतन आ जाएगा. पिछले वेतन आयोगों के अनुभव को देखें तो सिफारिशें लागू होने और वास्तविक भुगतान के बीच काफी समय लगता है. ऐसे में संभावना है कि कर्मचारियों को बढ़ा हुआ वेतन और एरियर 2027 के आखिर या 2028 की शुरुआत तक मिल सके.

69,000 रुपए वाली खबर पर क्या है सच?

फिलहाल 18,000 रुपए से सीधे 69,000 रुपए न्यूनतम बेसिक सैलरी होने का कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है. यह आंकड़ा केवल उस स्थिति में संभव है, जब सरकार कर्मचारियों की मांग के अनुसार 3.83 फिटमेंट फैक्टर को मंजूरी दे.

हालांकि, मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए कई विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार इससे कम फिटमेंट फैक्टर पर फैसला ले सकती है. ऐसे में नई न्यूनतम बेसिक सैलरी 69,000 रुपए से कम रहने की संभावना अधिक मानी जा रही है.