Bastar News Update : दंतेवाड़ा. कुआकोंडा क्षेत्र में बारिश की आस ने सदियों पुरानी आदिवासी परंपरा को फिर जीवंत कर दिया. मंगलवार को 84 गांवों से दो हजार से ज्यादा ग्रामीण उदेला गांव में जुटे. यहां से ग्रामीण ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ पहाड़ की ओर रवाना हुए. करीब तीन किलोमीटर की कठिन चढ़ाई के बाद सभी भीमसेन शिला के पूजा स्थल पर पहुंचे. ग्रामीणों ने सबसे पहले जमीन में करीब पांच फीट गड़ी शिला को कीचड़ से स्नान कराया. इसके बाद पानी से शिला को नहलाकर अच्छी बारिश की कामना की गई. 84 गांवों के पुजारी और गायता ने मिलकर परंपरा के अनुसार शिला को हिलाने की रस्म निभाई. मान्यता है कि इस अनुष्ठान के बाद क्षेत्र में बारिश होती है और खेती के लिए अनुकूल मौसम बनता है. इस आयोजन में कुआकोंडा के साथ 60 से 70 किलोमीटर दूर के गांवों से भी ग्रामीण पहुंचे. बुरगुम, पोटाली, निलावाया, समेली, मुलेर और नहाड़ी सहित कई गांवों की भागीदारी रही. पूजा के बाद उदेला में ग्रामीणों ने साथ लाए राशन से सामूहिक भोजन तैयार किया. बारिश की उम्मीद के साथ निभाई गई यह परंपरा आज भी ग्रामीण जीवन और संस्कृति की मजबूत कड़ी बनी हुई है.
इलाज के लिए जुटाई रकम, सफर के दौरान पर्स में रखे तीन लाख गायब
दंतेवाड़ा. बहन के इलाज के लिए तीन लाख रुपये लेकर रीवा से दंतेवाड़ा पहुंची महिला के साथ सफर के दौरान चोरी की घटना हो गई. महिला अपनी घायल बहन के ऑपरेशन के लिए रकम लेकर यात्रा कर रही थी. जगदलपुर बस स्टैंड पहुंचने के बाद वह रॉयल बस की स्लीपर सीट पर बैठी हुई थी. उसने अपना साइड पर्स सीट के पास रखा था, जिसमें तीन लाख रुपये और मोबाइल रखा था. रात करीब 11 बजकर 55 मिनट पर मां का फोन आने के बाद महिला ने पर्स से मोबाइल निकाला. करीब पांच मिनट तक बातचीत करने के बाद जब उसने मोबाइल वापस रखने के लिए पर्स तलाशा तो वह गायब था. महिला ने बस में मौजूद यात्रियों के साथ चालक और परिचालक से भी पूछताछ की. लेकिन पर्स और रकम का कोई सुराग नहीं मिला. इसके बाद महिला ने पुलिस को घटना की जानकारी देकर शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. तीन महीने पहले मां ने बैंक से रकम निकालकर इलाज की जरूरत के लिए बेटी को दी थी. अब पुलिस बस और बस स्टैंड से जुड़े संभावित सुरागों के आधार पर चोरी की जांच में जुटी है.
केशकाल बायपास परियोजना को केंद्र से मंजूरी
कोंडागांव. केशकाल घाट से गुजरने वाले यात्रियों और भारी वाहनों के लिए लंबे इंतजार के बाद राहत की उम्मीद जगी है. करीब डेढ़ दशक से लंबित बायपास परियोजना को अब केंद्र से मंजूरी मिल गई है. करीब 307.96 करोड़ रुपये की लागत से 11.38 किलोमीटर लंबा फोरलेन बायपास प्रस्तावित है. इस परियोजना का सबसे बड़ा असर केशकाल घाट के मौजूदा यातायात पर पड़ने की उम्मीद है. घुमावदार सड़क और भारी वाहनों के दबाव के कारण यहां अक्सर यातायात प्रभावित होता है. वाहन खराब होने या दुर्घटना होने पर कई बार लंबा जाम लग जाता है. बायपास बनने के बाद लंबी दूरी के भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा. इससे घाट और केशकाल नगर के भीतर वाहनों का दबाव कम होने की संभावना है. रायपुर से बस्तर आने-जाने वाले यात्रियों के सफर को भी अधिक सुगम बनाने की उम्मीद है. परियोजना का असर सिर्फ यातायात तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापार और पर्यटन को भी गति मिल सकती है. स्थानीय स्तर पर लंबे समय से उठ रही मांग को अब स्वीकृति मिलने से क्षेत्र में उम्मीद बढ़ी है. केशकाल बायपास बस्तर की कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है.
दस से ज्यादा गांवों की राह बनी खतरे की पुलिया
कोंडागांव. बड़ेराजपुर ब्लॉक में एक जर्जर पुलिया अब सिर्फ आवाजाही की परेशानी नहीं, बल्कि हादसे का खतरा बन चुकी है. विश्रामपुरी से बड़बत्तर जामपारा को जोड़ने वाली पुलिया करीब दो साल से खराब हालत में है. बारिश के बीच संकरी और क्षतिग्रस्त पुलिया से ग्रामीणों को मजबूरी में गुजरना पड़ रहा है. यह रास्ता बड़बत्तर, कुल्दाडिही, पीढ़ापाल, गम्हरी, पिटिसपाल और हरवेल समेत कई गांवों को जोड़ता है. रोजाना ग्रामीणों के साथ स्कूली बच्चे, किसान और मरीज इसी रास्ते से आवाजाही करते हैं. शनिवार के साप्ताहिक बाजार के दौरान इस मार्ग पर वाहनों का दबाव और बढ़ जाता है. संकरे रास्ते पर दोपहिया और चारपहिया वाहनों की आवाजाही से दुर्घटना का खतरा बना रहता है. ग्रामीणों का कहना है कि लगातार सूचना देने के बावजूद अब तक स्थायी सुधार नहीं हुआ है. बारिश बढ़ने पर पुलिया के और क्षतिग्रस्त होने की आशंका ग्रामीणों की चिंता बढ़ा रही है. जलस्तर बढ़ा तो आसपास के कई गांवों का संपर्क प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है. ग्रामीणों ने पुलिया की मरम्मत या नए निर्माण की मांग को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी है. अब निगाह प्रशासन पर है कि गांवों की इस महत्वपूर्ण कड़ी को सुरक्षित बनाने के लिए कब ठोस कदम उठाया जाता है.
जंगल में छिपा विस्फोटकों का जखीरा बरामद, सुरक्षा बलों की सतर्कता से टला खतरा
सुकमा. चिंतलनार थाना क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के एक डंप का पता लगाकर बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की है. यह कार्रवाई ग्राम इत्तलंका से करीब 300 मीटर दूर जंगल में की गई. सूचना मिलने के बाद सीआरपीएफ और चिंतलनार थाना पुलिस ने संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया. संभावित आईईडी खतरे को देखते हुए बम निरोधक दस्ते को भी अभियान में शामिल किया गया. सघन तलाशी के दौरान जवानों को जंगल में कपड़े में लिपटा एक संदिग्ध बैग मिला. सुरक्षा मानकों के तहत जांच करने पर बैग से बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री सामने आई. बरामद सामान में 25 जिलेटिन स्टिक और 16 बीजीएल हेड शामिल हैं. इसके अलावा दो इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, डेटोनेटर केस और कार्डेक्स वायर भी बरामद हुआ. जवानों को बैग से बीजीएल से जुड़ी अन्य सामग्री, वायर और बैटरी कनेक्टर भी मिले. सुरक्षा बल अब बरामद सामग्री के स्रोत और इसे जंगल में छिपाने वालों की जानकारी जुटा रहे हैं. समय रहते डंप का पता लगना सुरक्षा बलों और ग्रामीणों के लिए संभावित खतरे को टालने में अहम माना जा रहा है. सुकमा के जंगलों में चल रहे अभियान के बीच इस बरामदगी ने सुरक्षा बलों की सतर्कता को भी रेखांकित किया है.
आश्रम और स्कूलों की निगरानी पर प्रशासन का फोकस
दंतेवाड़ा. दंतेवाड़ा में आश्रम छात्रावासों की व्यवस्था और विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं की निगरानी अब और सख्त करने के निर्देश दिए गए हैं. कलेक्टर नम्रता जैन ने समय-सीमा की बैठक में नोडल अधिकारियों को नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए. अधिकारियों को छात्रावासों में रह रहे विद्यार्थियों की सुविधाओं और व्यवस्थाओं की स्थिति देखने को कहा गया है. निरीक्षण के बाद संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी. प्रशासन का जोर इस बात पर है कि शासन की योजनाओं का लाभ विद्यार्थियों तक समय पर पहुंचे. छात्रावासों में भोजन, रहने की व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं की नियमित निगरानी पर जोर दिया गया है. इसी बैठक में स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर भी सख्त रुख अपनाया गया. शिक्षकों को निर्धारित समय पर विद्यालय पहुंचकर जिम्मेदारी निभाने के निर्देश दिए गए हैं. बिना उचित कारण समय पर स्कूल नहीं पहुंचने वाले शिक्षकों पर नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. डीईओ को ऐसे मामलों में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. स्कूलों में गणवेश, पाठ्यपुस्तक और साइकिल वितरण का काम भी समय-सीमा में पूरा करने को कहा गया है. यानी प्रशासन का फोकस अब सिर्फ स्कूल और छात्रावास चलाने पर नहीं, बल्कि वहां की व्यवस्था की जवाबदेही तय करने पर है.
अबूझमाड़ के जंगलों में सुरक्षा के बाद नई चुनौती, वन्यजीव संरक्षण की परीक्षा
नारायणपुर. अबूझमाड़ में सुरक्षा और प्रशासनिक पहुंच बढ़ने के साथ जंगलों की वन्यजीव सुरक्षा एक नई चुनौती के रूप में सामने आ रही है. करीब 3900 वर्ग किलोमीटर में फैले इस दुर्गम क्षेत्र की जैव विविधता लंबे समय तक सीमित निगरानी में रही है. हालिया कार्रवाई में धौड़ाई वन क्षेत्र में तीन संदिग्धों से तेंदुए की खाल बरामद होना चिंता बढ़ाने वाला मामला है. वन विभाग ने गायतापारा सड़क के पास दो मोटरसाइकिलों से जा रहे संदिग्धों को पकड़ा था. अब जांच का अहम सवाल यह है कि तेंदुए का शिकार किस इलाके में हुआ और खाल कहां ले जाई जा रही थी. अगर इसके पीछे संगठित तस्करी का नेटवर्क है तो उसकी कड़ियां तलाशना वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती होगी. अबूझमाड़ आसपास के बड़े वन क्षेत्रों से जुड़े प्राकृतिक वन्यजीव गलियारे का हिस्सा है. इंद्रावती टाइगर रिजर्व से लेकर महाराष्ट्र और ओडिशा के वन क्षेत्रों तक वन्यजीवों की आवाजाही होती है. ऐसे में अबूझमाड़ में होने वाला शिकार केवल एक क्षेत्र के वन्यजीवों को नुकसान नहीं पहुंचाता. सुरक्षा परिस्थितियां बदलने के बाद अब जंगलों तक प्रशासन की पहुंच भी बढ़ रही है. इसी के साथ कैमरा ट्रैप, ड्रोन, नियमित गश्त और संवेदनशील मार्गों की निगरानी मजबूत करने की जरूरत बढ़ गई है. तेंदुए की खाल की बरामदगी अबूझमाड़ के जंगलों को सुरक्षित रखने के लिए नई वन्यजीव सुरक्षा रणनीति की जरूरत का संकेत दे रही है.
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