कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। एमपी के ग्वालियर में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छर जनित बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए इस बार स्वास्थ्य विभाग ने जैविक हथियार की रणनीति अपनाई है। शहर के करीब 650 जलभराव वाली जगहों पर नौ लाख गंबूसिया मछलियां छोड़ी जाएंगी, जो मच्छरों के लार्वा को खा जाती है, जिससे मच्छर जनित बीमारी फैलने से बच जाती है। हालांकि, इस अभियान के सामने स्टाफ की कमी भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।

दरअसल, ग्वालियर में मलेरिया विभाग ने शहर के 250 स्थायी और लगभग 400 अस्थायी जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान की है। इनमें तालाब, नाले, गड्ढे और अन्य ऐसी जगह शामिल हैं जहां लंबे समय तक पानी जमा रहता है। विभाग का मानना है कि केवल रासायनिक दवाओं के छिड़काव से समस्या का समाधान संभव नहीं है, इसलिए जैविक नियंत्रण के तहत गंबूसिया मछलियों को छोड़ा जाएगा।

जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विनोद कुमार दोनेरिया ने बताया हे कि गंबूसिया मछली को मच्छरों के लार्वा का प्राकृतिक दुश्मन माना जाता है। यह पानी में मौजूद लार्वा को खाकर उनकी संख्या कम करती है, जिससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया फैलाने वाले मच्छरों के प्रजनन पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। बारिश के बाद चरणबद्ध तरीके से यह अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए मत्स्य विभाग के सहयोग से इनकी संख्या हैचरी में बढ़ाई जा रही है।

बता दें कि इस अभियान के सामने स्टाफ की कमी बड़ी बाधा बन रही है। विभाग को सहयोग देने वाली एमपीएड परियोजना बंद हो चुकी है और भोपाल से मिलने वाला 24 सदस्यीय स्क्वॉड भी अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाया है। पहले 18 परियोजना कर्मचारी और 24 सदस्यीय स्क्वॉड फील्ड में मदद करते थे,लेकिन अब पूरा अभियान विभाग के केवल 26 कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रहा है।

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