Ashok Gehlot on Delhi Protest: दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को रोकने, बैरिकेडिंग और गिरफ्तारियों को लेकर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। रविवार को जयपुर स्थित अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में गहलोत ने कहा कि देश में लोकतांत्रिक परिस्थितियां चिंताजनक हो गई हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि अपनी बात रखने के लिए दिल्ली पहुंच रहे नागरिकों को रोकने की जरूरत क्यों पड़ रही है। गहलोत ने केंद्र से विपक्षी नेताओं के साथ संवाद करने और उनकी आपत्तियों का जवाब देने की अपील भी की।
प्रदर्शनकारियों को रोकने पर सरकार से सवाल
गहलोत ने कहा कि प्रदर्शन करने वाले लोग इसी देश के नागरिक हैं। इसके बावजूद उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने दिल्ली में बैरिकेडिंग और लोगों को एकत्र होने से रोकने की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
पूर्व मुख्यमंत्री के मुताबिक, देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग अपनी बात रखने के लिए दिल्ली पहुंच रहे हैं। उन्हें रोकने या तितर-बितर करने से उनकी आवाज नहीं दबाई जा सकती। सरकार को प्रदर्शनकारियों की समस्याएं सुननी चाहिए, न कि उनके साथ अनुचित व्यवहार करना चाहिए।
लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका अहम
अशोक गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र की बुनियाद असहमति का सम्मान करना है। विपक्ष की बात सुनना और उसकी आपत्तियों का समाधान करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और दूसरे विपक्षी नेताओं के साथ किए जा रहे व्यवहार पर भी सवाल उठाए।
गहलोत ने कहा कि विपक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उसे दुश्मन मानकर चलना उचित नहीं है। सरकार को उन मुद्दों पर बातचीत करनी चाहिए, जिनको लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है।
वोट चोरी और SIR पर भी मांगा जवाब
गहलोत ने चुनाव प्रक्रिया और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले डेढ़ से दो साल से वोट चोरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन सरकार और चुनाव आयोग विपक्ष की चिंताओं का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए हैं।
उन्होंने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची और मतदाताओं के नामों को लेकर उठे सवालों का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया पर संदेह दूर करना जरूरी है। गहलोत के अनुसार, यदि सरकार को लगता है कि विपक्ष की आपत्तियां गलत हैं, तो उसे तथ्यों के साथ अपनी बात रखनी चाहिए।
राहुल गांधी, खड़गे और अखिलेश यादव से बात करे केंद्र
पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिलेश यादव और इंडिया ब्लॉक के दूसरे नेताओं से बातचीत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी मुद्दे पर सहमति नहीं होने की स्थिति में भी संवाद के जरिए समाधान तलाशा जा सकता है।
गहलोत ने सवाल किया कि सरकार विपक्षी नेताओं से बातचीत क्यों नहीं कर रही है। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में टकराव के बजाय संवाद से रास्ता निकालना चाहिए।
न्यायपालिका में सुनवाई को लेकर भी चिंता
गहलोत ने न्यायपालिका में सुनवाई को लेकर उठ रही शिकायतों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल समेत कई वकील अदालतों में सुनवाई नहीं होने की बात कह रहे हैं। उनके अनुसार, न्यायपालिका में सुनवाई को लेकर ऐसी शिकायतें गंभीर चिंता का विषय हैं।
उन्होंने कहा कि देश किस दिशा में जा रहा है, इस पर हर नागरिक को विचार करना चाहिए। मौजूदा परिस्थितियों के भविष्य में क्या परिणाम होंगे, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।
प्रदर्शनकारियों से दुर्व्यवहार पर कार्रवाई की मांग
गहलोत ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े लोग प्रदर्शनकारियों के साथ अभद्रता कर रहे हैं और बच्चों के साथ भी मारपीट की गई है।
उन्होंने पुलिस से ऐसी घटनाओं का संज्ञान लेकर जांच करने की मांग की। गहलोत ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ हुए कथित व्यवहार को भी निंदनीय बताया।
भाजपा सरकार पर भी साधा निशाना
अशोक गहलोत ने दावा किया कि भाजपा सरकार का राजनीतिक ग्राफ नीचे आया है और अगली बार उसकी सरकार नहीं बनेगी। उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र के महत्व को समझना और नई पीढ़ी को इसके प्रति जागरूक करना जरूरी है।
गहलोत ने दोहराया कि सरकार को विपक्ष की आपत्तियों को अनसुना करने के बजाय बातचीत करनी चाहिए। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति का सम्मान और संवाद ही आगे का रास्ता है।
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