हेमंत शर्मा, इंदौर। शहर के बिगड़े ट्रैफिक और नियमों की खुलेआम अनदेखी को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने प्रशासन को आईना दिखाया है। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि सड़कों पर प्रशासन की कार्रवाई का असर नजर नहीं आ रहा। यहां तक कि हाईकोर्ट के सामने तक लोग ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते दिखाई दे रहे हैं।मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने गलत नंबर प्लेट, बिना नंबर प्लेट और हूटर-सायरन लगी गाड़ियों के सड़कों पर घूमने का मुद्दा उठा। कोर्ट ने सवाल किया कि अगर कार्रवाई और निगरानी के दावे किए जा रहे हैं, तो फिर सड़क पर हालात क्यों नहीं बदल रहे?गौरतलब है कि इसी तरह के मामले में हाईकोर्ट पहले भी निजी वाहनों में अवैध हूटर, फ्लैश लाइट, VIP स्टिकर और गलत नंबर प्लेट के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दे चुका है।
‘आपका काम सड़कों पर नजर नहीं आ रहा’—कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पूर्व पार्षद महेश गर्ग की ओर से अधिवक्ता मनीष यादव और अनस मकरानी ने पिछली सुनवाई के आदेश का हवाला देते हुए प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए।याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पिछली सुनवाई में प्रशासन से शहर में लगे CCTV कैमरों की संख्या और चौराहों पर तैनात ट्रैफिक जवानों की जानकारी शपथपत्र पर मांगी गई थी। सरकार की ओर से बताया गया कि शहर के विभिन्न चौराहों पर 660 CCTV कैमरे लगाए गए हैं और सभी प्रमुख स्थानों पर जवान तैनात हैं।लेकिन इस दावे पर याचिकाकर्ता की ओर से कड़ी आपत्ति जताई गई।
660 कैमरे, जवान भी तैनात… फिर सड़क पर बदहाली क्यों?
अधिवक्ताओं ने कोर्ट के सामने तर्क रखा कि अगर इतनी बड़ी निगरानी व्यवस्था और ट्रैफिक अमला मौजूद है, तो फिर शहर के हालात में सुधार क्यों नहीं दिख रहा?याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि पुलिस का ज्यादा जोर ड्रिंक एंड ड्राइव के चालान पर दिखाई देता है, जबकि गलत नंबर प्लेट, बिना नंबर प्लेट, हूटर-सायरन और अन्य ट्रैफिक उल्लंघनों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही।इसी पर हाईकोर्ट ने भी तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि उसे खुद मैदान में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा।
हाईकोर्ट के सामने तक नियमों की धज्जियां!
कोर्ट ने यहां तक कहा कि हाईकोर्ट के सामने तक लोग नियमों का उल्लंघन करते नजर आ रहे हैं।गलत या बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियां सड़कों पर घूम रही हैं और सिर्फ चालान काटने से समस्या का समाधान नहीं होगा।यानी जिस जगह न्यायपालिका खुद बैठकर कानून और व्यवस्था पर सुनवाई कर रही है, उसी के सामने अगर ट्रैफिक नियमों की अनदेखी दिखाई दे रही है तो शहर के बाकी हिस्सों का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
‘चालान बनाने से कुछ नहीं हो रहा’—अब कार्रवाई का असर चाहिए
हाईकोर्ट की टिप्पणी का सबसे अहम हिस्सा यही रहा कि सिर्फ चालान बनाने से ट्रैफिक व्यवस्था नहीं सुधरेगी। सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कितने चालान बनाए गए। सवाल यह है कि— कितने लोगों ने दोबारा नियम तोड़े? कितनी गलत नंबर प्लेट वाली गाड़ियों पर स्थायी कार्रवाई हुई? बिना नंबर प्लेट की गाड़ियां सड़क तक पहुंच ही कैसे रही हैं? और सबसे बड़ा सवाल— हूटर और सायरन लगाकर घूमने वाले वाहनों पर लगातार कार्रवाई क्यों नहीं दिख रही? पहले भी हाईकोर्ट ने निजी वाहनों से अवैध हूटर, फ्लैश लाइट, VIP स्टिकर और अनियमित नंबर प्लेट हटाने के निर्देश दिए थे। भारी वाहन दिन में शहर में कैसे घुस रहे हैं? सुनवाई के दौरान शहर में भारी वाहनों के प्रवेश का मुद्दा भी उठा। कोर्ट ने सवाल किया कि भारी वाहनों को शहर में प्रवेश से रोकने के लिए क्या व्यवस्था की गई है? याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया कि शहरों में दिन के समय भारी वाहनों की एंट्री को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
अब सरकार से अगली सुनवाई में इस मुद्दे पर विस्तृत जवाब मांगा गया है।
28 सितंबर वाले सप्ताह में फिर होगी सुनवाई
कोर्ट ने सरकार को अगली सुनवाई में विस्तृत जवाब पेश करने का अवसर दिया है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर वाले सप्ताह में निर्धारित की गई है। अब सवाल CCTV की संख्या का नहीं, उसके नतीजे का है!इंदौर में 660 CCTV कैमरे और चौराहों पर जवानों की तैनाती का सरकारी दावा अपनी जगह है, लेकिन हाईकोर्ट का सवाल इससे ज्यादा बड़ा है—इन सबके बावजूद सड़क पर बदलाव क्यों नहीं दिख रहा?अगर हाईकोर्ट के सामने तक गलत नंबर प्लेट और ट्रैफिक नियम तोड़ने वाली गाड़ियां दिखाई दे रही हैं, तो फिर शहर की बाकी सड़कों पर कार्रवाई की स्थिति क्या होगी? इंदौर को सिर्फ चालान का शहर नहीं, नियमों का पालन कराने वाला शहर बनाना होगा—और अब हाईकोर्ट ने प्रशासन से इसी कार्रवाई का हिसाब मांगना शुरू कर दिया है।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m



