बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने शनिवार को कहा कि शेख हसीना का प्रत्यर्पण दोनों देशों के बीच संबंधों में कोई बाधा नहीं बनेगा. मीडिया से खास बातचीत में फखरुल इस्लाम ने कहा कि हसीना के प्रत्यर्पण पर कोई भी कदम उचित कानूनी प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार होगा. उन्होंने कहा, ‘बांग्लादेश ने पहले ही भारत से शेख हसीना को प्रत्यर्पित करने की मांग की है. यह मौजूदा अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार ही होगा.’ बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल ने नवंबर 2025 में, शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी मानते हुए उन्हें मौत की सजा सुनाई थी.
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा कि बांग्लादेश को उम्मीद है कि भारत पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर सहयोग करेगा.
फखरुल इस्लाम ने स्वीकार किया कि बांग्लादेश और भारत के बीच पहले से ही प्रत्यर्पण संधि मौजूद है और कहा कि हम चाहते हैं कि वह वापस आएं. बीएनपी नेता ने कहा कि हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा भारत और बांग्लादेश के संबंधों में बाधा नहीं बनेगा.
उन्होंने कहा, ‘यह बांग्लादेश और भारत के संबंधों में कोई रुकावट नहीं बनेगा. भारत ने कभी इनकार नहीं किया कि शेख हसीना को उसने शरण दी है और यह भी नहीं कहा है कि हसीना को बांग्लादेश प्रत्यर्पित नहीं करेगा.’ फखरुल इस्लाम आलमगीर बीएनपी के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं और तारिक रहमान के करीबी सहयोगी हैं. उन्होंने रहमान के इंग्लैंड में निर्वासन में रहने के दौरान कई दशकों तक पार्टी का नेतृत्व किया है.
बांग्लादेश में हुए संसदीय चुनाव में बीएनपी को बड़ी जीत मिली है. शेख हसीना की अगुवाई वाली अवामी लीग को अंतरिम सरकार द्वारा चुनावी गतिविधियों में शामिल होने से प्रतिबंधित कर दिया गया था. इससे पहले, बीएनपी के एक अन्य नेता सलाहुद्दीन अहमद ने कहा था कि उनकी पार्टी शेख हसीना की वापसी के लिए कानूनी और कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से भारत के समक्ष मांग उठाती रहेगी.
शेख हसीना अगस्त 2024 से नई दिल्ली में रह रही हैं, जब उनकी सरकार के खिलाफ छात्रों के हिंसक आंदोलन ने उन्हें अपने पद से इस्तीफा देने और देश छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया था. बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल ने नवंबर 2025 में, शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी मानते हुए उन्हें मौत की सजा सुनाई थी. हालांकि, यह मुकदमा हसीना की अनुपस्थिति में चला और उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं मिला.
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