नीरज काकोटिया, बालाघाट। शहर को जल प्रदूषण की समस्या से स्थायी निजात दिलाने के लिए एक बड़ी और महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी मिल गई है। बालाघाट में करीब 35 करोड़ रुपये की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) परियोजना शुरू होने जा रही है। इस परियोजना के तहत घरों, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाले गंदे व दूषित पानी का वैज्ञानिक तरीके से ट्रीटमेंट किया जाएगा, जिससे इस पानी को दोबारा उपयोग के योग्य बनाया जा सके।
ये भी पढ़ें: ‘उद्धव गुट के कई सांसद-विधायक NDA में आने को तैयार’, इंदौर में केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले का बड़ा दावा
इन 4 क्षेत्रों में स्थापित होंगे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
NGT के कड़े नियमों और दिशानिर्देशों के अनुरूप इस पूरी योजना का खाका तैयार किया गया है। इसके तहत शहर के चार प्रमुख क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है:
- एएचपी क्वार्टर (AHP Quarter)
- समता तालाब (Samta Talab)
- कोसमी (Kosmi)
- मोती नगर (Moti Nagar)
इन स्थानों पर प्लांट लग जाने से दूषित पानी बिना ट्रीटमेंट के सीधे तालाबों, नालों या अन्य जलस्रोतों में नहीं मिल पाएगा, जिससे शहर का पर्यावरण और जल स्तर दोनों सुरक्षित रहेंगे।

जमीन आवंटन के कारण काम में थोड़ी देरी, नपा जुटी समाधान में
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए नगर पालिका प्रशासन मुस्तैद है लेकिन फिलहाल दो चिन्हित स्थानों पर जमीन आवंटन की प्रक्रिया लंबित होने के कारण काम की रफ्तार थोड़ी प्रभावित हुई है। मामले को लेकर स्थानीय पार्षद और निवासी मनीष नेमा समेत अन्य नागरिकों ने भी अपनी बात रखी है।

नगर पालिका प्रशासन का दावा है कि जमीन से जुड़ी प्रशासनिक अड़चनों को जल्द से जल्द दूर कर लिया जाएगा। जैसे ही जमीन आवंटन की औपचारिकताएं पूरी होंगी, निर्माण कार्य तुरंत शुरू कर दिया जाएगा।

ये भी पढ़ें: इंदौर में गैस लाइन ब्लास्ट: बोरिंग के दौरान पाइप फटी, 4 घायल
18 महीनों में पूरा होगा लक्ष्य, जल संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
नगर पालिका के मुताबिक काम शुरू होने के बाद इस पूरी परियोजना को 18 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस प्लांट के शुरू होने से बालाघाट के पारंपरिक तालाबों और जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने में बड़ी मदद मिलेगी। साथ ही भूमिगत जल के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय जनता ने भी नगर पालिका की इस पहल का स्वागत करते हुए इसे शहर की स्वच्छता और पर्यावरण की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।

