स्वदेशी लड़ाकू विमान के मिशन में भारत को झटका लगने के संकेत मिल रहे हैं, क्योंकि देश के प्रमुख एयरबेस में एक और स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान के क्रैश होने की खबर सामने आई है। हाल के कुछ सालों में यह तीसरा मामला है, जब कोई तेजस जेट इस तरह से दुर्घटनाग्रस्त हुआ है। इसके चलते भारतीय वायुसेना ने तेजस की पूरी फ्लीट की उड़ानों पर ही रोक लगा दी है।

जानकारी के मुताबिक, हादसे में विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, हालांकि पायलट सुरक्षित बाहर निकल गया और उसे गंभीर चोट नहीं आईं। भारतीय वायुसेना ने दुर्घटनाग्रस्त हुए विमान को पूरी तरह से अनुपयोगी घोषित कर दिया है। फरवरी में हुए इस हादसे पर भारतीय वायु सेना ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

अब तक तीन विमान दुर्घटनाग्रस्त

जानकारी के मुताबिक, भारतीय वायु सेना में शामिल होने के बाद से यह तीसरी बार है, जब तेजस लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ है। इससे पहले मार्च 2024 में जैसलमेर के पास हुई थी। विमान एक सैन्य प्रदर्शन से लौट रहा था तभी यह हादसा हुआ। उस घटना में भी पायलट सुरक्षित बाहर निकल गया था।

दूसरी घटना की बात करें नवंबर 2025 में दुबई एयरशो में एक हवाई करतब के दौरान हादसा हुआ। पायलट, विंग कमांडर नमांश स्याल, गंभीर रूप से घायल हो गए और उनकी मृत्यु हो गई। घटनास्थल से प्राप्त तस्वीरों में विमान को जमीन पर गिरते और आग की लपटों में घिरते हुए दिखाया गया है। उस दुर्घटना की जांच अभी भी जारी है।

अब ताजा हादसा ऐसे समय में हुआ है, जब तेजस एमके1ए कार्यक्रम पहले से ही देरी का सामना कर रहा है। भारतीय वायु सेना द्वारा 180 एमके1ए लड़ाकू विमानों का ऑर्डर दिए जाने के बावजूद, डिलीवरी लगभग दो साल देरी से चल रही है।

97 तेजस की खरीद के लिए हुआ था समझौता

गौरतलब है कि पिछले सितंबर में रक्षा मंत्रालय ने 97 तेजस एमके-1ए हल्के लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए 62,370 करोड़ रुपये का एक और समझौता किया। एमके-1ए एक बहु-भूमिका लड़ाकू विमान है जिसे हवाई रक्षा, समुद्री टोही और आक्रमण अभियानों को संभालने के लिए डिज़ाइन किया गया है। भारतीय वायु सेना ने अभी तक आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। फिलहाल, भारतीय वायु सेना ने फरवरी 2026 की घटना पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। जांच आगे बढ़ने पर अधिकारियों द्वारा प्रारंभिक निष्कर्ष साझा किए जाने की उम्मीद है। तेजस प्रोजेक्ट की बात करें तो रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता हासिल करने के भारत के प्रयासों का एक अहम हिस्सा है। हाल की दुर्घटनाओं के बावजूद, रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि छिटपुट दुर्घटनाओं का मतलब यह नहीं है कि डिजाइन में कोई खामी है।

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