Lalluram Desk. जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम ने पहली बार रणजी ट्रॉफी जीतकर इतिहास रच दिया है. और जब आने वाले सालों में यह कहानी सुनाई जाएगी, तो एक नाम सबसे ज़ोरदार तरीके से गूंजेगा—अजय शर्मा याने अज्जू भाई का, जैसा कि टीम अब उन्हें प्यार से बुलाती है.
खिलाड़ी कभी उन्हें “तानाशाह” कहते थे और उन्हें अपने ड्रेसिंग रूम से बाहर करना चाहते थे, फिर भी अब उन्हें खिलाड़ियों की सोच बदलने का क्रेडिट दिया जाता है, सिर्फ़ हिस्सा लेने और टिके रहने से लेकर जीतने के लिए मुकाबला करने तक. “वह एक लेजेंड हैं” ये जम्मू-कश्मीर टीम के कप्तान पारस डोगरा के कोच के लिए शुरुआती शब्द हैं.
डोगरा ने द प्रिंट को बताया. “वह बहुत डिसिप्लिन्ड आदमी हैं. और, उन्होंने मिसाल कायम करते हुए रास्ता दिखाया. वह टीम में जीतने वाली सोच लेकर आए. उन्होंने हमारे साथ अपने बच्चों जैसा बर्ताव किया. वह एक सख़्त माता-पिता की तरह थे,”
अजय शर्मा ने 31 वन डे इंटरनेशनल और 1 टेस्ट मैच में इंडिया को रिप्रेजेंट किया, और उनके नाम 10,000 से ज़्यादा रन के साथ एक शानदार डोमेस्टिक करियर है. उनके बहुत ज़्यादा अनुभव, टैक्टिकल समझ और प्लेयर-सेंट्रिक अप्रोच ने एक कॉन्फिडेंट, कॉम्पिटिटिव और डिसिप्लिन्ड जम्मू-कश्मीर टीम बनाने में अहम रोल निभाया है.
दिल्ली के लिए घरेलू क्रिकेट खेले अजय शर्मा का करियर मैच फिक्सिंग के आरोपों के कारण खत्म हो गया. इसके बाद सालों तक गुमनाम रहे और अब जम्मू-कश्मीर के रणजी ट्राफी जीतने के बाद अज्जू भैया के नाम से चर्चा में आए. मैच फिक्सिंग के आरोपों से बरी होने से पहले अजय शर्मा 15 साल तक क्रिकेट से दूर रहे.
जम्मू-कश्मीर के कोच के तौर पर फिर से देशभर में सुर्खियां बटोर रहे 61 वर्षीय अजय शर्मा कहते हैं कि यह अजय शर्मा का पुनर्जन्म है. मुकदमे के कारण कोई नाम नहीं ले रहा था. लेकिन अब जिन्होंने सालों फोन या मैसेज नहीं किया अब संपर्क कर रहे हैं, लेकिन मुझे इसका मलाल नहीं है. इन खिलाड़ियों ने मुझ पर जो प्यार और भरोसा दिखाया है उसके लिए मैं शुक्रगुजार हूं.
Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें
- खेल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें


