CG Naxal Surrender : महासमुंद. छत्तीसगढ़ में बीबीएम डिवीजन के 15 सशस्त्र माओवादी रविवार (1 मार्च) को भारत का तीरंगा और संविधान की किताब थाम कर मुख्यधारा में लौट चुके है. माओवादियों ने सरकार की पुनर्वास की नीति के तहत आज महासमुंद जिले में हथियारों के साथ पुलिस अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. इनमें 9 महिला और 6 पुरुष नक्सली शामिल हैं. यह भाकपा (माओवादी) के ओडिशा स्टेट कमेटी के पश्चिमी सब जोन अंतर्गत बरगढ़-बलांगीर-महासमुंद डिविजनल कमेटी के सदस्य थे, जिसमें से 14 छत्तीसगढ़ के निवासी हैं. इन नक्सलियों पर कुल 73 लाख रुपये का इनाम घोषित था. 

इस आत्मसमर्पण में सबसे बड़े स्तर का नक्सली स्टेट कमेटी सदस्य और बीबीएम डिवीजन प्रभारी विकास है. उसपर 25 लाख रुपए का ईनाम घोषित था. 1 स्टेट कमेटी सदस्य पर 25 लाख, 2 डिविजनल कमेटी सदस्य पर 8-8 लाख, 5 एरिया कमेटी सदस्य पर 5-5 लाख, 7 प्लाटून सदस्य पर 1-1 लाख का इनाम शामिल था. आत्मसमर्पण के दौरान कुल 14 अत्याधुनिक हथियार जमा किए गए, जिनमें 3 एक-47, 2 एसएलआर, 2 इंसास, 4 थ्री-नॉट-थ्री और 3 बारह बोर बंदूकें है.

नक्सल मुक्त हुआ रायपुर संभाग 

एडीजी नक्सल ने कहा कि रायपुर संभाग आज नक्सल मुक्त हो गया है ,वही आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली का कहना है कि आ रही कठिनाइयों के कारण आत्मसमर्पण का निर्णय लिया .

गौरतलब है कि महासमुंद में 15 सशस्त्र माओवादियों का आत्मसमर्पण न केवल जिले बल्कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा के लिए बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है. इस आत्मसमर्पण के बाद ओडिशा स्टेट कमेटी का पश्चिमी सब जोन पूरी तरह समाप्त हो गया है. रायपुर पुलिस रेंज के साथ-साथ ओडिशा का संबलपुर रेंज भी अब नक्सलमुक्त घोषित किया गया है. मार्च 2026 तक नक्सलवाद के समूल उन्मूलन के लक्ष्य की दिशा में इसे एक निर्णायक कदम माना जा रहा है.