Rajasthan News: राजस्थान के उच्च शिक्षा क्षेत्र से एक बेहद डराने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जहाँ प्रदेश की 15 सरकारी यूनिवर्सिटी में से 7 ऐसी हैं जिनमें एक भी नियमित शिक्षक तैनात नहीं है। राज्य सरकार की वार्षिक रिपोर्ट और विधानसभा में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के महाविद्यालयों में शिक्षकों के करीब 31.66% और विश्वविद्यालयों में 65.64% पद खाली पड़े हैं, जिससे लाखों युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है।

यूनिवर्सिटी बनीं पर शिक्षक भर्ती करना भूली सरकार
प्रदेश के उच्च शिक्षा ढांचे की हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई विश्वविद्यालय बनने के बाद से आज तक नियमित स्टाफ की राह देख रहे हैं। प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित राजस्थान विश्वविद्यालय (RU) की स्थिति भी नाजुक है, जहाँ शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक मिलाकर लगभग 60% पद रिक्त हैं। आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान यूनिवर्सिटी में स्वीकृत 949 शैक्षणिक पदों में से 555 पद खाली पड़े हैं, वहीं गैर-शैक्षणिक स्टाफ के 1692 पदों में से 1034 पर कोई नियुक्ति नहीं है।
इन 7 विश्वविद्यालयों में जीरो नियमित शिक्षक
विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान की 7 प्रमुख यूनिवर्सिटी ऐसी हैं जहाँ स्वीकृत पदों के बावजूद एक भी नियमित प्रोफेसर नहीं है। भीमराव अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय (जयपुर) में सभी 40 शैक्षणिक पद खाली हैं। इसी तरह बृज यूनिवर्सिटी (भरतपुर) के 30, पंडित दीनदयाल शेखावाटी यूनिवर्सिटी (सीकर) के 32, और MBM यूनिवर्सिटी (जोधपुर) के सभी 147 पद रिक्त चल रहे हैं। यही हाल बांसवाड़ा की जनजातीय यूनिवर्सिटी, कोटा यूनिवर्सिटी और मत्स्य यूनिवर्सिटी (अलवर) का है, जहां शून्य शिक्षक के साथ संस्थान चलाए जा रहे हैं।
महाविद्यालयों का भी बुरा हाल
विश्वविद्यालयों के साथ-साथ राजकीय महाविद्यालयों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। राजस्थान के सरकारी कॉलेजों में कुल 7,534 शिक्षक पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 2,386 पद खाली पड़े हैं। इस सत्र में इन कॉलेजों में 12.55 लाख से अधिक विद्यार्थी पंजीकृत हैं, जबकि पूरे प्रदेश में करीब 42 लाख अभ्यर्थी कॉलेज शिक्षा से जुड़े हैं। बिना शिक्षकों के इतने बड़े छात्र समूह का मार्गदर्शन केवल अतिथि विद्वानों या संविदा कर्मियों के भरोसे छोड़ा गया है।
प्रशासन और गैर-शैक्षणिक कार्यों पर संकट
शिक्षा के अलावा विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक कार्यों के लिए जरूरी गैर-शैक्षणिक स्टाफ की भी भारी कमी है। कई संस्थानों में क्लर्क से लेकर रजिस्ट्रार स्तर के पदों पर अस्थायी नियुक्तियां हैं। सरकार की ओर से नई भर्तियां न होने और रिटायरमेंट के कारण रिक्त पदों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जो प्रदेश की रैंकिंग को राष्ट्रीय स्तर पर नीचे गिरा रही है।
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