नेपाल में आज हो रहे आम चुनाव को देश की राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. चुनाव आयोग ने कहा है कि 165 सीटों पर होने वाली सीधे मुकाबले की वोटिंग (फर्स्ट पास्ट द पोस्ट) के नतीजे मतपेटियां इकट्ठा होने के 24 घंटे के भीतर घोषित करने की कोशिश की जाएगी. हालांकि आनुपातिक प्रतिनिधित्व (PR) के तहत तय होने वाली 110 सीटों की गिनती में दो से तीन दिन लग सकते हैं. अगर आयोग तय समय पर परिणाम घोषित कर देता है तो यह बड़ा बदलाव होगा, क्योंकि 2022 के चुनाव में अंतिम नतीजे आने में दो हफ्ते से ज्यादा लग गए थे.

नेपाल में आज नई सरकार चुने जाने के लिए वोट डाले जाएंगे. 165 सीटों पर चुनाव होने हैं. चुनाव आयोग का कहना है कि मतपेटियां इकट्ठा होने के 24 घंटे के भीतर रिजल्ट जारी करने की कोशिश करेगा. पिछले साल हुए जेन-Z आंदोलन के बाद यह पहला बड़ा चुनाव है.

नेपाल सात प्रांतों में बंटा है- कोशी, मधेश, बागमती, गंडकी, लुंबिनी, कर्णाली और सुदूरपश्चिम. इन सभी क्षेत्रों में आज मतदान हो रहा है. चुनाव मैदान में कई बड़े दल और नए राजनीतिक समूह आमने-सामने हैं.

प्रमुख पार्टियों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP), नेपाली कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल- UML, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (NCP), राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (RPP), जनता समाजवादी पार्टी-नेपाल (PSP-N), जनमत पार्टी और यूनिफाइड नेशनल पार्टी (UNP) शामिल हैं. इनके अलावा कई छोटे दल और स्वतंत्र उम्मीदवार भी चुनाव लड़ रहे हैं.

इस चुनाव में पुराने दिग्गज नेताओं और नए उभरते चेहरों के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है.

केपी शर्मा ओली: नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के प्रमुख नेता. विवादों के बावजूद वह एक बार फिर सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहे हैं.

गगन थापा: नेपाली कांग्रेस के प्रभावशाली नेता. उनका फोकस भ्रष्टाचार खत्म करने और रोजगार बढ़ाने पर है.

बालेन शाह: इस चुनाव के सबसे चर्चित नए चेहरे. काठमांडू के लोकप्रिय मेयर रह चुके बलेन शाह पहले रैपर और सिविल इंजीनियर रहे हैं. उनकी छवि एक सुधारवादी नेता की है और वह खास तौर पर युवाओं और शहरी वोटरों में लोकप्रिय हैं.

नेपाल में मिश्रित चुनाव प्रणाली लागू है, जिसमें सीधे चुनाव और आनुपातिक प्रतिनिधित्व दोनों शामिल हैं.

फर्स्ट पास्ट द पोस्ट: संसद की 165 सीटों पर सीधे चुनाव होता है. हर निर्वाचन क्षेत्र में सबसे ज्यादा वोट पाने वाला उम्मीदवार जीतता है.

प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन: 110 सीटें पार्टी को मिले कुल वोट प्रतिशत के आधार पर तय होती हैं. इस व्यवस्था का मकसद यह है कि छोटे दलों और अलग-अलग सामाजिक समूहों को भी संसद में प्रतिनिधित्व मिल सके और कोई एक पार्टी पूरी तरह हावी न हो.

Gen-Z ने सितंबर 2025 में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए थे. खासकर युवाओं ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ आंदोलन किया था. इन प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और झड़पें भी हुईं, जिसके बाद प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा. इसके बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी, जिसने छह महीने के भीतर चुनाव कराने का वादा किया था. 5 मार्च को हो रहा यह चुनाव उसी वादे का हिस्सा है.

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