Bastar News Update : जगदलपुर। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के कोटमसर गुफा कॉम्प्लेक्स में स्थित ग्रीन केव को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद मामला गंभीर हो गया है। कोर्ट ने पूछा है कि क्या गुफा को खोलने का उद्देश्य केवल इको-टूरिज्म के नाम पर राजस्व बढ़ाना है। मामले में केवीएनपी के निदेशक ने शपथपत्र दाखिल कर बताया कि पर्यटन और संरक्षण से जुड़े कदम उठाए गए हैं। हालांकि कोर्ट ने गुफा के प्रवेश पर बनाए गए सीमेंट गेट और सीढ़ियों को लेकर चिंता जताई है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्माण से बारिश के पानी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो सकता है। जिससे गुफा की पारिस्थितिकी और जैव विविधता को स्थायी नुकसान का खतरा है। गुफा में दुर्लभ प्रजातियों जैसे मांसाहारी चमगादड़ मेगाडर्मा लायरा और स्मॉल इंडियन सिवेट का आवास भी बताया गया है।

वैज्ञानिक शोधपत्र में यहां लगभग 10 दुर्लभ प्रजातियों पर खतरे की आशंका जताई गई है। गौरतलब है कि वन विभाग के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने भी ग्रीन केव को प्राकृतिक अवस्था में संरक्षित रखने की सलाह दी थी। इसी बीच निदेशक के शपथपत्र में दी गई कुछ जानकारियों पर भी सवाल उठने लगे हैं। अब हाईकोर्ट के रुख के बाद यह मामला पर्यटन और पर्यावरण संतुलन की बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है।

खराब चावल ने बढ़ाई राशन संकट की आशंका, 33 हजार क्विंटल मामला अधर में

दंतेवाड़ा। गीदम वेयरहाउस में खराब पाए गए 33 हजार क्विंटल चावल का मामला अभी भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है। निर्धारित समय सीमा खत्म होने के बावजूद खराब चावल की वापसी और नए चावल जमा करने की प्रक्रिया अधूरी है। इससे पूरे मामले में लीपा-पोती की आशंका भी जताई जा रही है। दरअसल जनवरी में चावल को बीआरएल करने का आदेश जारी किया गया था। मिलरों को 45 दिनों के भीतर खराब चावल उठाकर नया चावल जमा करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन अब तक केवल करीब 3400 बोरी चावल ही जमा हो पाया है। इस देरी का असर जिले के राशन वितरण पर भी पड़ने लगा है। फरवरी में कई उचित मूल्य दुकानों को चावल का आवंटन ही नहीं हो पाया। स्थिति संभालने के लिए अब मार्च में दो महीने का चावल एक साथ बांटने का निर्णय लिया गया है। खाद्य विभाग पूरे मामले की निगरानी कर रहा है, लेकिन जिम्मेदार एजेंसी खुलकर कुछ भी कहने से बच रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में खराब चावल का जिम्मेदार कौन है।

किराए के मकान में युवक-युवती की संदिग्ध मौत, फांसी पर लटके मिले दोनों

दंतेवाड़ा। शहर में एक युवक और युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से इलाके में सनसनी फैल गई। दोनों एक किराए के मकान में साथ रह रहे थे और रविवार शाम फांसी के फंदे पर लटके मिले। जानकारी के अनुसार युवक गीदम ब्लॉक के मड़से गांव का रहने वाला था। जबकि युवती गीदम के नयापारा की बताई जा रही है। घटना से पहले घर के अंदर से झगड़े और बहस की आवाजें सुनाई देने की बात सामने आई है। कुछ देर बाद अचानक आवाजें बंद होने पर पड़ोसियों को शक हुआ। पर्दा हटाकर देखने पर दोनों फंदे पर लटके मिले, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को नीचे उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्राथमिक जांच में इसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा है। हालांकि पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है। परिवार और परिचितों से पूछताछ के बाद ही घटना के पीछे की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी।

मासूम से गैंगरेप के आरोपी शहर में घुमाए गए, पुलिस ने दिखाई सख्ती

जगदलपुर। छह साल की मासूम से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों को शहर के मुख्य मार्गों पर घुमाते हुए जेल भेजा। घटना के बाद पूरे जिले में आक्रोश का माहौल है। जानकारी के मुताबिक आरोपियों ने बच्ची का अपहरण कर खेत में ले जाकर दुष्कर्म किया था। पीड़िता के बयान और बताए गए हुलिए के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की। जांच में अमित जैन उर्फ बिल्लू और रोहन जैन को संदिग्ध पाया गया। हिरासत में पूछताछ के दौरान दोनों ने अपराध स्वीकार कर लिया। घटना के विरोध में कई सामाजिक संगठनों ने कड़ी सजा की मांग उठाई है। निषाद-केवट समाज ने भी एसपी को ज्ञापन सौंपकर आरोपियों को फांसी देने की मांग की है। एसपी ने आश्वासन दिया है कि पुलिस छह महीने के भीतर कड़ी सजा दिलाने का प्रयास करेगी। साथ ही लोगों से निर्भय होकर गवाही देने और पीड़िता की पहचान गोपनीय रखने की अपील की गई है।

महिला दिवस पर महिलाओं का सम्मान, खेल और संवाद से बढ़ाया उत्साह

कोंडागांव। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कोंडागांव में महिलाओं के सम्मान में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन महिला कांग्रेस शहर अध्यक्ष हेमा देवांगन के नेतृत्व में किया गया। इस मौके पर महिलाओं के बीच विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं और संवाद कार्यक्रम आयोजित हुए। शहर, ग्रामीण और माकड़ी ब्लॉक से बड़ी संख्या में महिलाएं इसमें शामिल हुईं। कार्यक्रम का उद्देश्य राजनीति से ऊपर उठकर महिलाओं का उत्साह और भागीदारी बढ़ाना रहा। प्रतियोगिताओं में विजेता महिलाओं को सम्मानित कर पुरस्कार भी दिए गए। कार्यक्रम के समापन पर पूर्व मंत्री मोहन मरकाम और कांग्रेस जिलाध्यक्ष रवि घोष भी पहुंचे। उन्होंने महिलाओं को महिला दिवस की शुभकामनाएं दीं। मोहन मरकाम ने महिलाओं से जुड़े सवाल पूछकर सही जवाब देने वालों को पुरस्कृत भी किया। कार्यक्रम में कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और महिला प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रही। आयोजकों का कहना है कि ऐसे आयोजन महिलाओं के आत्मविश्वास और नेतृत्व को मजबूत करते हैं।

जंगल बचाने के लिए गांव ने लिया संकल्प, आग और अवैध कटाई पर सख्ती

कोंडागांव। गर्मी के मौसम में संभावित वनाग्नि को देखते हुए उमरगांव में वन संरक्षण को लेकर सम्मेलन आयोजित किया गया। वन प्रबंधन समिति और वन विभाग के अधिकारियों ने मिलकर जंगलों की सुरक्षा का संकल्प लिया। ग्रामीणों को बताया गया कि महुआ संग्रहण के दौरान कई बार पत्तों में आग लगाने से जंगल में बड़ी आग फैल जाती है। इससे वन संपदा और जैव विविधता को भारी नुकसान होता है। बैठक में ग्रामीणों से अपील की गई कि वनोपज संग्रहण के दौरान आग लगाने से पूरी तरह बचें। वन विभाग के अधिकारियों ने जंगलों के पर्यावरणीय महत्व की जानकारी भी दी। सम्मेलन में अवैध कटाई करने वालों पर कड़ी निगरानी और कार्रवाई का निर्णय लिया गया। यदि कोई व्यक्ति जंगल में आग लगाते या लकड़ी काटते पाया गया तो जुर्माना और कानूनी कार्रवाई होगी। अभियान में युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। ग्रामीणों का कहना है कि जब पूरा गांव मिलकर जिम्मेदारी निभाता है तो जंगल सुरक्षित रहते हैं। अब यह पहल आसपास के गांवों के लिए भी प्रेरणा बनती जा रही है।

नक्सल इलाके में ड्यूटी और पढ़ाई साथ-साथ, CRPF अफसर ने पास की UPSC

सुकमा। सुकमा के नक्सल प्रभावित जगरगुंडा क्षेत्र में तैनात सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट रॉकी कसाना ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 542 प्राप्त की है।
रॉकी ने अपनी ड्यूटी के दौरान कैंप में रहकर ही यूपीएससी की तैयारी की। दिन में सुरक्षा अभियान और रोड ओपनिंग ड्यूटी निभाने के बाद रात में पढ़ाई करते थे। कुंदेड़ का इलाका नक्सलियों की मजबूत मौजूदगी वाला क्षेत्र माना जाता है।
जब उनकी तैनाती हुई तब इलाके में कुख्यात नक्सली कमांडरों की सक्रियता भी थी। इसके बावजूद उन्होंने जिम्मेदारी निभाते हुए कई सफल ऑपरेशन का नेतृत्व किया।

रॉकी मूल रूप से उत्तरप्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले हैं। वह आईआईटी कानपुर से पढ़ाई कर चुके हैं और सीआरपीएफ में उनकी पहली पोस्टिंग यहीं हुई थी। कठिन परिस्थितियों में हासिल की गई यह सफलता अब जवानों के लिए प्रेरणा बन रही है।

जंगल रास्ते से मवेशी तस्करी का खुलासा, 171 पशु मुक्त, 9 आरोपी गिरफ्तार

बीजापुर। भोपालपटनम थाना क्षेत्र में पुलिस ने मवेशी तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। कार्रवाई में 171 कृषिक पशुओं को तस्करों के कब्जे से मुक्त कराया गया है। इस मामले में पुलिस ने 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सूचना मिली थी कि तस्कर जंगल के रास्ते गाय, बैल और बछड़ों को तेलंगाना ले जा रहे हैं। उल्लूर घाटी क्षेत्र में घेराबंदी कर पुलिस ने आरोपियों को पकड़ लिया। पूछताछ में आरोपियों ने महाराष्ट्र, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के निवासी होने की जानकारी दी। जांच के दौरान उनके पास पशुओं के स्वामित्व या परिवहन से जुड़े कोई वैध दस्तावेज नहीं मिले।
पुलिस ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और कृषिक पशु परिरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। सभी पशुओं को सुरक्षा के लिए भोपालपटनम के गौठान में रखा गया है। पुलिस का कहना है कि सीमा क्षेत्रों में मवेशी तस्करी के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।

जल जीवन मिशन अधूरा, कुरेंगा गांव में आज भी झिरिया का सहारा

बस्तर। तोकापाल ब्लॉक के कुरेंगा गांव में आज भी ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
गांव के कई पारा में एक भी हैंडपंप उपलब्ध नहीं है। ग्रामीणों को लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर पहाड़ के नीचे स्थित झिरिया से पानी लाना पड़ता है। यही पानी पीने, खाना बनाने और घरेलू जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी साफ नहीं है, लेकिन मजबूरी में पीना पड़ रहा है। जल जीवन मिशन के तहत गांव में पानी टंकी का निर्माण शुरू हुआ था। लेकिन काम अधूरा रह गया और पाइप लाइन विस्तार भी पूरा नहीं हो सका। महिलाओं और बच्चों को रोज पथरीले और फिसलन भरे रास्ते से पानी लाना पड़ता है। कई बार लोग इस रास्ते में गिरकर घायल भी हो चुके हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थायी जलस्रोत विकसित करने की मांग की है। चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन का रास्ता भी अपनाया जाएगा।

वनाग्नि रोकने के लिए अलर्ट मोड में वन विभाग, 112 अग्नि प्रहरी तैनात

सुकमा। गर्मी के मौसम में संभावित वनाग्नि को देखते हुए सुकमा वनमंडल ने तैयारी तेज कर दी है। जंगलों में आग की घटनाओं को रोकने के लिए 112 वन अग्नि प्रहरी चार माह के लिए तैनात किए गए हैं। उन्हें मासिक मानदेय और आग बुझाने के उपकरण भी दिए गए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में आग फैलने से रोकने के लिए फायर लाइन तैयार की गई है। गांवों में पोस्टर और दीवार लेखन के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। तेंदूपत्ता संग्रहण के दौरान भी ग्रामीणों को आग से बचाव के उपाय बताए जा रहे हैं। वनाग्नि की सूचना के लिए वन विभाग ने नियंत्रण कक्ष और हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। किसी भी घटना की सूचना तुरंत देने की अपील की गई है। वन विभाग का कहना है कि जंगलों की सुरक्षा में ग्रामीणों की भागीदारी सबसे अहम है। यदि समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं हुआ तो वन संपदा को भारी नुकसान हो सकता है। इसीलिए विभाग ने इस बार वनाग्नि रोकथाम को अभियान का रूप दिया है।