19 मार्च से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होने जा रही है. इस दौरान देशभर के शक्तिपीठ और सिद्धपीठ मंदिरों में मां दुर्गा की विशेष पूजा, व्रत, हवन और कन्या पूजन का आयोजन किया जाता है. लोगों के बीच प्रसिद्ध बुढ़िया माई मंदिर को लेकर कहा जाता है कि यह मंदिर लोगों को होने वाली अनहोनी से पहले चेतावनी देता है. यही वजह है कि इसे काल से जुड़ा मंदिर भी माना जाता है.

यह मंदिर गोरखपुर शहर से करीब 12 से 15 किलोमीटर दूर कुसम्ही जंगल के बीच स्थित है. जंगल के बीच होने के बावजूद नवरात्रि के समय यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर सिद्धपीठ माना जाता है और यहां मां की कृपा से अकाल मृत्यु भी टल सकती है.

प्रचलित लोककथा

मंदिर से जुड़ी एक प्रचलित लोककथा भी यहां की मान्यता को मजबूत करती है. बताया जाता है कि पहले यहां एक बड़ा नाला था, जिस पर लकड़ी का पुल बना हुआ था. एक बार एक बारात यहां से गुजर रही थी. पुल के पास खड़ी एक बुजुर्ग महिला ने बारातियों को पुल पर न जाने की चेतावनी दी, लेकिन लोगों ने उसकी बात को नजरअंदाज कर दिया. जैसे ही बारात पुल के बीच पहुंची, वह अचानक टूटकर गिर गया और अधिकांश बाराती नाले में समा गए. कहा जाता है कि इस घटना के बाद लोगों ने उस बुजुर्ग महिला को देवी का रूप मानते हुए यहां पूजा-अर्चना शुरू कर दी और धीरे-धीरे यही स्थान बुढ़िया माई मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हो गया.