CG News : वीरेन्द्र गहवई, बिलासपुर. हाईकोर्ट ने स्टॉक जांच में धान नहीं होने की बात कहते हुए किसान का पूरा धान नहीं लेने के खिलाफ पेश याचिका में कलेक्टर सक्ती, हसौद मंडी सहित अन्य को याचिकाकर्ता का बकाया 84 क्विंटल धान 30 दिवस के अंदर लेने का आदेश दिया है. कोर्ट ने इसके साथ याचिका को निराकृत किया है. मामले की सुनवाई जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की सिंगल बेंच में हुई.


याचिकाकर्ता लक्ष्मण कुमार चंद्रा निवासी ग्राम हसौद, जिला सक्ती ने अधिया के आधार पर खेती की. कटाई के बाद, शेष 84 क्विंटल धान बटाईदार के घर भंडार में रखा गया था. भंडार के भौतिक सत्यापन की तारीख 20.01.2026 को, 84 क्विंटल धान याचिकाकर्ता के सीधे कब्जे में नहीं पाया गया, जिसके कारण समिति प्रबंधक/अध्यक्ष, कृषक सेवा सहकारी समिति अध्यक्ष, कृषक सेवा सहकारी समिति मर्यादित, हसौद ने उक्त धान की खरीद से इनकार कर दिया. इसके खिलाफ किसान ने अधिवक्ता योगेश कुमार चंद्रा के जरिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई. जिसमें कहा गया, कि याचिकाकर्ता एक किसान है, जिसने खरीफ साल 2025-26 के लिए उसकी 3.7800 हेक्टेयर खेती की ज़मीन किसान पोर्टल पर रजिस्टर्ड थी. 196 क्विंटल धान की खरीद के लिए सहकारी समिति हसौद ने याचिकाकर्ता को 196 क्विंटल का टोकन भी जारी किया था. किसान ने 111.20 क्विंटल धान बेचा है. याचिकाकर्ता का शेष 84 क्विंटल धान लिए जाने का निर्देश दिए जाने की मांग की गई.
जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी ने याचिकाकर्ता एवं प्रतिवादियों का पक्ष सुनने के बाद अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड के अवलोकन से पता चलता है कि याचिकाकर्ता की खरीफ वर्ष 2025-26 के लिए उनकी 3.7800 हेक्टेयर कृषि भूमि किसान पोर्टल पर किसान के तहत पंजीकृत की गई थी. इसके अलावा, पिटीशनर के 196 क्विंटल धान की खरीद के लिए टोकन जारी किया गया था. हालांकि 196 क्विंटल धान की बिक्री की एंट्री किसान पोर्टल पर रजिस्टर्ड है और इसके लिए टोकन भी जारी किया गया था, लेकिन सिर्फ़ 111.20 क्विंटल ही बेचा गया है. पिटीशनर के अनुसार, एक किसान के तौर पर, उसने एक बटाईदार (बटाईदार) के साथ एक अधिया के ज़रिए 84 क्विंटल धान की कटाई की, और यह हिस्सा बटाईदार के स्टोरेज एरिया में स्टोर किया गया था. रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे पता चले कि पिटीशनर ने उस धान की कटाई गैर-कानूनी तरीके से की थी. कोर्ट ने कलेक्टर सक्ती, सहकारी समिति सहित अन्य को याचिकाकर्ता की बाकी 84 क्विंटल धान बेचने और उठाने की इजाज़त देने का निर्देश दिया है. इसके लिए सही प्रोसेस कर 30 दिनों के अंदर धान लेने का निर्देश दिया है. इसके साथ कोर्ट ने याचिका को निराकृत किया है.
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