नई दिल्ली। भारत में एक अमेरिकी नागरिक की गिरफ्तारी से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक उच्च-स्तरीय मामले की जांच में कई अहम सुराग मिले हैं. मैथ्यू वैनडाइक उन सात विदेशियों में शामिल था, जिन्हें दो दिन पहले भारत के खिलाफ रची गई एक कथित साजिश के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था.
भारत की शीर्ष आतंकवाद-रोधी संस्था राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बताया कि आरोपी भारत के रास्ते अवैध रूप से म्यांमार में दाखिल हुआ था, ताकि वहां के जातीय सशस्त्र समूहों और भारत के कुछ प्रतिबंधित समूहों को प्रशिक्षण दे सके.
उसके सोशल मीडिया फुटेज और मोबाइल फोन की जांच करने पर अधिकारियों को अब पता चला है कि वैनडाइक पहले भी विदेशों में कई सैन्य संघर्षों और अभियानों से जुड़ा रहा है. अब जांच का मकसद यह पता लगाना है कि वह पूर्वोत्तर भारत तक पहुंचने में कैसे कामयाब हुआ और उसका मकसद क्या था.
अमेरिकी दूतावास ने पुष्टि की है कि उसे इस स्थिति की जानकारी है, लेकिन उसने इस बारे में और अधिक जानकारी देने से इनकार कर दिया.
वैनडाइक: आधुनिक युद्ध का विशेषज्ञ
वैनडाइक खुद को एक सुरक्षा विश्लेषक, डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता और युद्ध संवाददाता बताता था, लेकिन सूत्रों का कहना है कि इस रहस्यमयी शख्स के कई और भी पहलू हैं.
सूत्रों के अनुसार, यह अमेरिकी नागरिक एक भाड़े का सैन्य प्रशिक्षक था, जिसके बारे में कहा जाता है कि उसका पहले अमेरिकी सेना से भी जुड़ाव रहा था. उसने इराक और अन्य युद्ध क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दी थीं. सूत्रों ने यह भी बताया कि वह “विशेष बलों जैसी” (special forces-style) ट्रेनिंग देता था, जिसमें गुरिल्ला युद्ध, रणनीतिक अभियान, ड्रोन का इस्तेमाल और आधुनिक युद्ध तकनीकों जैसे विषय शामिल थे.
वैनडाइक के शुरुआती दिन
वैनडाइक को लीबियाई गृहयुद्ध के दौरान काफी शोहरत मिली थी. बताया जाता है कि यूनिवर्सिटी की पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने मोटरसाइकिल से पूरे उत्तरी अफ्रीका और मध्य-पूर्व की यात्रा की थी. इसी दौरान, उसकी लीबिया के लोगों से दोस्ती हो गई. जब वहां क्रांति भड़की, तो वह विद्रोही लड़ाकों के साथ शामिल हो गया. उसे गिरफ्तार कर लिया गया और करीब छह महीने तक बंदी बनाकर रखा गया. हालांकि, वह वहां से भाग निकलने में कामयाब रहा और 2011 में युद्ध खत्म होने के बाद अमेरिका लौट आया.
इसके बाद उसने सीरियाई क्रांति पर एक डॉक्यूमेंट्री बनाने की योजना बनाई, जो इसके तुरंत बाद ही शुरू हो गई थी. लेकिन, ISIS द्वारा उसके दो दोस्तों—अमेरिकी पत्रकार जेम्स फोली और स्टीवन सॉटलॉफ—की हत्या कर दिए जाने के बाद उसने अपनी योजना बदल दी और सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण देने पर ध्यान केंद्रित किया. इसके बाद उसने दुनिया भर के सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण देने और सलाह देने के लिए ‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल’ (SOLI) नामक संगठन की स्थापना की. ‘किराए के सैनिकों से अपील’
जांच के दौरान, अधिकारियों को कई रिकॉर्डिंग मिलीं, जिनमें कथित तौर पर वैनडाइक को दुनिया भर में होने वाले विद्रोहों का समर्थन करते हुए सुना गया. उसने कहा कि उसका मकसद सिर्फ़ विदेशी लड़ाकों को लड़ाई में भेजना नहीं था, बल्कि स्थानीय लोगों को खुद के लिए लड़ने के लिए प्रशिक्षित करना था.
वैनडाइक ने तो किराए के सैनिकों से वेनेज़ुएला, म्यांमार और ईरान में विद्रोही गुटों में शामिल होने के लिए वैश्विक अपील भी जारी की थी.
भारत में उसकी गिरफ्तारी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि माना जाता है कि उसका संबंध पूर्वोत्तर में सक्रिय हथियारबंद नेटवर्क से है. यह भी माना जा रहा है कि वैनडाइक ड्रोन संचालन और आधुनिक युद्ध तकनीकों में प्रशिक्षण दे रहा था.
उसकी गिरफ्तारी से सुरक्षा से जुड़े कई बड़े सवाल खड़े होते हैं, खासकर यह कि क्या भारतीय क्षेत्र का इस्तेमाल एक ट्रांज़िट कॉरिडोर (आवागमन के रास्ते) के तौर पर किया जा रहा था और क्या उसका भारत-विरोधी और प्रतिबंधित गुटों से कोई संबंध था. जासूसी और खुफिया जानकारी जुटाने के पहलुओं की भी जांच की जा रही है.
3 मुख्य सिद्धांत
सूत्रों के अनुसार, वैनडाइक की गिरफ्तारी के संबंध में तीन मुख्य संभावित सिद्धांतों की जांच की जा रही है. पहला सिद्धांत एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय पहल की ओर इशारा करता है, जो संभवतः भारत को अस्थिर करने की एक व्यापक रणनीति हो सकती है. यह परिकल्पना CIA पर दुनिया भर में गुप्त अभियान चलाने के आरोपों से उपजी है.
कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना है कि इसके पीछे यूक्रेन से जुड़ा कोई नेटवर्क हो सकता है, खासकर तब जब राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने विदेशी देशों में विशेष अभियानों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया था. इससे पहले, सूडान, माली, सीरिया और लीबिया जैसे संघर्ष वाले क्षेत्रों में भी यूक्रेन की मौजूदगी देखी गई थी.
विशेषज्ञ यह भी सुझाव देते हैं कि वैनडाइक का संबंध रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़े भू-राजनीतिक तनावों से हो सकता है; संभवतः यह यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने और उस देश के साथ रणनीतिक संबंध बनाए रखने का ही एक परिणाम हो.
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें
- मनोरंजन की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए करें क्लिक

