चेटीचंड से नए साल की शुरुआत होती है, जहां जल, ज्योति और आस्था मिलकर बनाते हैं एक अदभुत उत्सव। 20 मार्च 2026, शुक्रवार का यह दिन झूलेलाल जयंती यानी चेटीचंड के रूप में मनाया जा रहा है यह तिथि सिंधी समुदाय के लिए नई शुरुआत, नई आशा और नई ऊर्जा का प्रतीक है। चेटीचंड धार्मिक पर्व होने के साथ ही साथ उनकी सांस्कृतिक पहचान, ऐतिहासिक चेतना और सामाजिक एकता का भी जीवंत उत्सव है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को आने वाला चेटीचंड सिंधी नववर्ष का शुभारंभ करता है।‘चेटी’ यानी चैत्र और ‘चंड’ यानी चंद्रमा अर्थात् नववर्ष का पहला चांद और यह चांद हर सिंधी परिवार के दिल में नई उम्मीदों की रोशनी लेकर आता है।

जल से जुड़ी आस्था, प्रकृति के प्रति श्रद्धा का है संदेश
चेटीचंड का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है, जल की पूजा। सिंधी समुदाय भगवान झूलेलाल को जल देवता यानी वरुण का अवतार मानते हैं । यह मान्यता एक धार्मिक विश्वास भी है और कि यह हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और संरक्षण का संदेश भी देती है।
आज जब दुनिया जल संकट और पर्यावरणीय चुनौतियों से जूझ रही है तब चेटीचंड हमें याद दिलाता है कि जल संसाधन भी है और जीवन का आधार है इसका संरक्षण किया जाना चाहिए। मानव और प्रकृति का रिश्ता अटूट है इस सत्य को स्थापित करने के लिए इस दिन नदी, झील और जल स्रोतों के किनारे जाकर ‘बेहराना साहिब’ का विसर्जन किया जाता है।

ज्योति जागरण से होती है अंधकार से प्रकाश की ओर गमन
चेटीचंड के दिन ‘ज्योति जागरण’ की परंपरा ख़ास महत्व रखती है। इसमें आटे के दीपक में पांच बत्तियां जलाकर की जाने वाली आराधना धार्मिकता के अलावा, अज्ञान, भय और नकारात्मकता के अंधकार को दूर कर ज्ञान, साहस और सकारात्मकता के प्रकाश को अपनाने का एक गहरा संकेत भी है।‘ज्योति जागरण’ की ज्योति हमें यह भी सिखाती है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न हों, विश्वास और भक्ति की रोशनी हमें सही मार्ग दिखा सकती है।

‘बेहराना साहिब’की शोभा यात्रा परंपरा और सामूहिकता का उत्सव
चेटीचंड में दीपक, मिश्री, फल, इलायची और सूखे मेवों से सजी थाली के साथ भगवान झूलेलाल की प्रतिमा को सजाकर शोभायात्रा निकाली जाती है, यही इस पर्व की खास पहचान है जिसे ‘बेहराना साहिब’कहा जाता है। सामूहिक उत्साह और एकता के प्रतीक इस शोभायात्रा में जब सैकड़ों लोग एक साथ “चेटी चंड जूं लख-लख वाधायूं” का जयघोष करते हैं तो यह केवल आवाज नहीं, बल्कि समुदाय की सामूहिक चेतना का स्वर बन जाता है।

एकता और मानवता का संदेश देती हैं झूलेलाल की शिक्षाएं
भगवान झूलेलाल की शिक्षाएं ही चेटीचंड का सबसे गहरा और प्रासंगिक पक्ष है। इतिहास और पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान झूलेलाल ने उस समय जन्म लिया जब सिंधी समाज पर अत्याचार हो रहे थे। “ईश्वर एक है, और हमें प्रेम व शांति के साथ मिलकर रहना चाहिए।” इस संदेश के साथ भगवान ने अपने समुदाय की रक्षा की। उनका यह संदेश आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है जब समाज में विभाजन और असहिष्णुता की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। झूलेलाल का जीवन हमें याद दिलाता है कि धर्म का मूल उद्देश्य, मानवता की सेवा और समाज में सौहार्द स्थापित करना ही है।
चेटीचंड बना पहचान और विरासत का प्रतीक
चेटीचंड का उत्सव अब केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि यह सिंधु सभ्यता और सिंधी पहचान का प्रतीक भी बन चुका है। भारत और दुनिया भर में फैले सिंधी समुदाय के लिए यह दिन अपनी जड़ों से जुड़ने और अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोने का एक सुअवसर बन चुका है। विभाजन के बाद विस्थापन का दर्द झेलने वाले सिंधी समाज ने संघर्ष और आत्मबल से चेटीचंड के माध्यम से अपनी पहचान को जीवित रखने का काम किया था।

सामाजिक समरसता और सेवा की भावना से ओतप्रोत है चेटीचंड
चेटीचंड में सेवा और दान की भी बड़ी महत्ता है। इस दिन गरीबों को भोजन, वस्त्र और आवश्यक वस्तुएं दानस्वरूप दी जाती हैं। दान की यह परंपरा हमें सिखाती है कि सच्ची पूजा केवल मंदिरों में नहीं बल्कि जरूरतमंदों की सहायता में भी होती है। चेटीचंड उत्सव में विभिन्न समुदायों के लोग भी शामिल होते हैं जो सामाजिक समरसता और भाईचारे का सुंदर उदाहरण बनते हैं।
आधुनिक संदर्भ में है चेटीचंड का महत्व
चेटीचंड जैसा त्योहार ही हमें आज के तेज़ी से बदलते और तनावपूर्ण जीवन में ठहरने, सोचने और अपने भीतर झांकने का अवसर देते हैं।चेटीचंड हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीना सिखाता है,समाज में एकता और सहयोग की भावना को बढ़ावा मिलता है, चेटीचंड हमें परंपराओं को आधुनिकता को साथ रखकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है और सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है चेटीचंड मानवता को सर्वोपरि रखता है।
आस्था ही नही जीवन का उत्सव है चेटीचंड
चेटीचंड केवल एक पर्व नहीं बल्कि जीवन का अदभुत उत्सव है जिसमें जल की शीतलता, ज्योति की उज्ज्वलता और आस्था की गहराई एक साथ देखने को मिलती है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि हर नया साल अपने विचार, व्यवहार और दृष्टिकोण में बदलाव लाने के लिए होता है।। आइए संकल्प करें कि इस साल का चेटीचंड केवल एक धार्मिक अनुष्ठान हीं ना बने बल्कि सकारात्मकता, एकता और मानवता को भी आगे बढ़ाया जाय क्योंकि जब जल की शुद्धता, ज्योति की पवित्रता और आस्था की शक्ति एक साथ मिलती है तो जीवन स्वमेव एक उत्सव बन जाता है।

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक न्यूज़ 24 /लल्लूराम डॉट कॉम

