कोंडागांव। जिले में वन्यजीव तस्करी के संगठित नेटवर्क का बड़ा खुलासा हुआ है। फरसगांव-बड़ेडोंगर मार्ग पर वन विभाग और उड़नदस्ता टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपी मोटरसाइकिल और इको वाहन से बोरी में बंद तेंदुए की खाल ले जा रहे थे। टीम ने पहले खरीददार बनकर जाल बिछाया और फिर मौके पर घेराबंदी कर रंगे हाथों पकड़ लिया। जब्त खाल की लंबाई 195 सेमी और चौड़ाई 45 सेमी पाई गई, जिसकी कीमत लाखों में आंकी जा रही है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि तेंदुए का शिकार करीब 7 महीने पहले भरमार बंदूक से किया गया था। मुख्य आरोपी को नारायणपुर के बोरावंड गांव से गिरफ्तार किया गया। उसके पास से शिकार में प्रयुक्त हथियार भी जब्त किया गया है।
इस गिरोह में बस्तर, दंतेवाड़ा और कोंडागांव के आरोपी शामिल हैं। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक कड़ी है, पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।
किताबों से बाहर की सीख: बच्चों को मिला ‘देश देखने’ का मौका
जगदलपुर। बस्तर में शिक्षा अब सिर्फ कक्षा तक सीमित नहीं रह गई है। पीएम श्री स्कूलों के मेधावी छात्रों को एक्सपोजर विजिट के जरिए देश के प्रमुख स्थलों का अनुभव कराया गया। शैक्षणिक भ्रमण से लौटे विद्यार्थियों ने कलेक्टर आकाश छिकारा से मुलाकात कर अपने अनुभव साझा किए। बच्चों ने ऐतिहासिक और वैज्ञानिक स्थलों से मिली सीख को उत्साह के साथ बताया। इस पहल से छात्रों के आत्मविश्वास और सोच में बड़ा बदलाव देखने को मिला। कलेक्टर ने बच्चों के अनुभव को सराहा और इसे शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने घोषणा की कि आने वाले सत्र में भी यह पहल जारी रहेगी। इससे ग्रामीण और शहरी बच्चों के बीच अवसर की खाई कम होगी। शिक्षकों ने भी इसे बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अहम बताया। प्रशासन का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम भविष्य की दिशा तय करते हैं। यह पहल बस्तर के छात्रों को राष्ट्रीय स्तर से जोड़ने की कोशिश है। अब शिक्षा सिर्फ किताब नहीं, अनुभव से भी गढ़ी जाएगी।

आस्था, परंपरा और उत्सव : चेट्रीचंड्र पर दिखी समाज की एकजुटता
जगदलपुर। सिंधी समाज का नववर्ष चेट्रीचंड्र इस बार शहर में उत्सव और एकता का प्रतीक बनकर उभरा। भगवा रंग में रंगे समाज ने पूरे शहर को भक्तिमय माहौल में बदल दिया। सिंधी गुरुद्वारा में बहराणा साहिब की पूजा के बाद भव्य शोभायात्रा निकाली गई झांकियों और पारंपरिक ‘छेज’ नृत्य ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। युवाओं और महिलाओं ने ‘आयो लाल झूलेलाल’ के जयकारों से माहौल गूंजाया। वाहन रैली से लेकर धार्मिक अनुष्ठानों तक पूरे दिन कार्यक्रमों की श्रृंखला चली। गोल बाजार और प्रमुख चौकों पर विशेष सजावट आकर्षण का केंद्र रही। महादेव घाट पर दीपों और आतिशबाजी के बीच विसर्जन किया गया। यह आयोजन जल और ज्योति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक माना जाता है। समाज के सभी वर्गों की भागीदारी ने एकजुटता का संदेश दिया। धार्मिक परंपरा के साथ सांस्कृतिक रंग भी इस आयोजन में झलका। शहर में पूरे दिन उत्सव का माहौल बना रहा।
मैराथन से पहले ‘ट्रैफिक लॉकडाउन’: शहर की रफ्तार पर ब्रेक
जगलदपुर। बस्तर हेरिटेज मैराथन को लेकर पुलिस ने शहर में सख्त ट्रैफिक प्लान लागू किया है। 22 मार्च को सुबह 4 बजे से दोपहर 12 बजे तक कई प्रमुख मार्ग पूरी तरह बंद रहेंगे। जगदलपुर से चित्रकोट तक का मार्ग नो व्हीकल जोन घोषित किया गया है। हजारों धावकों की सुरक्षा को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। केवल आपातकालीन सेवाओं को ही इस दौरान छूट दी जाएगी। शहर के प्रमुख चौक और बाजार भी आंशिक रूप से प्रभावित रहेंगे। पुलिस ने लोगों से वैकल्पिक मार्ग अपनाने की अपील की है। पंडरीपानी, केशलूर और तोकापाल मार्ग को विकल्प के तौर पर सुझाया गया है। सुबह के समय शहर में आवागमन पूरी तरह प्रभावित रहेगा। मैराथन लालबाग मैदान से शुरू होकर चित्रकोट में समाप्त होगी। प्रशासन इसे बस्तर की पहचान से जोड़कर देख रहा है, लेकिन आम लोगों के लिए यह दिन ट्रैफिक चुनौती भी बन सकता है।
अधूरी पुलिया, पूरा खतरा : हादसे का इंतजार क्यों?
बचेली। पुराना मार्केट क्षेत्र में निर्माणाधीन पुलिया अब लोगों के लिए खतरा बन चुकी है। धीमी गति से चल रहा निर्माण कार्य लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। सबसे बड़ी चिंता सुरक्षा इंतजामों की कमी को लेकर है। न तो चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और न ही पर्याप्त बैरिकेडिंग की गई है। कई जगहों पर रेलिंग तक नहीं होने से हादसे का खतरा बना हुआ है। रोजाना बाइक सवार और स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर गुजरते हैं। शाम और रात के समय स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटे हादसे पहले भी हो चुके हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। लोगों में प्रशासन की लापरवाही को लेकर नाराजगी है। मांग की जा रही है कि जल्द काम पूरा कर सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। अब सवाल यही है—क्या प्रशासन हादसे के बाद ही जागेगा?
ऑनलाइन लालच का जाल: बिहार से पकड़ा गया साइबर ठग
दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा पुलिस ने साइबर ठगी के बड़े मामले में फरार आरोपी को बिहार से गिरफ्तार किया है। आरोपी अजय कुमार महतो ‘टास्क पूरा करो, पैसा दोगुना पाओ’ का झांसा देता था। इस झांसे में फंसाकर करीब 7.91 लाख रुपये की ठगी की गई। मामला मार्च 2025 में दर्ज हुआ था, जिसके बाद से आरोपी फरार था। साइबर सेल और बचेली पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। 100 से ज्यादा बैंक खातों के ट्रांजेक्शन खंगालकर आरोपी की लोकेशन ट्रेस की गई। आधुनिक साइबर तकनीक और फाइनेंशियल ट्रैकिंग से गिरफ्तारी संभव हुई। आरोपी के पास से मोबाइल, दस्तावेज और नकदी जब्त की गई है। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेजा है। लोगों से अपील की गई है कि अनजान लिंक और ऑफर से सतर्क रहें। साइबर ठगी की शिकायत के लिए 1930 हेल्पलाइन जारी है। यह मामला डिजिटल सतर्कता की जरूरत को फिर से उजागर करता है।
इंसानियत की मिसाल: समाज ने दिया दिव्यांग परिवार को नया घर
नारायणपुर। नारायणपुर में सामाजिक एकजुटता की मिसाल देखने को मिली है। अंजुमन इस्लामिया कमेटी और मुस्लिम समाज ने एक दिव्यांग परिवार को पक्का मकान दिया। आबिद और उनकी मां लंबे समय से जर्जर कच्चे घर में रह रहे थे।
सरकारी योजनाओं का लाभ दस्तावेजों के अभाव में नहीं मिल सका। इसके बाद समाज ने पहल करते हुए चंदा एकत्र कर मकान बनवाया। 18 मार्च को धार्मिक रीति-रिवाज के साथ मकान का शुभारंभ हुआ। समारोह में विभिन्न समाजों के लोग भी शामिल हुए। नए घर की चाबी सौंपते हुए परिवार को नई जिंदगी की शुरुआत दी गई। यह पहल सामाजिक सौहार्द और सहयोग का उदाहरण बनी। समिति ने आगे भी ऐसे कार्य जारी रखने की बात कही। इस कदम ने जरूरतमंदों के लिए उम्मीद की नई किरण जगाई। संदेश साफ है जब व्यवस्था चूकती है, समाज आगे आता है।
खनिज से मालामाल, सुविधा में कंगाल: रेल मुद्दे पर उठे सवाल
जगदलपुर। बस्तर में खनिज संपदा से करोड़ों की कमाई हो रही है, लेकिन सुविधाएं अब भी नदारद हैं।।एनएमडीसी और ईस्ट कोस्ट रेलवे रोजाना करीब 40 करोड़ 86 लाख रुपये कमा रहे हैं। बैलाडीला से रोज हजारों टन लौह अयस्क बाहर भेजा जा रहा है। इसके बावजूद क्षेत्र में रेल सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। जगदलपुर-दुर्ग इंटरसिटी ट्रेन भी घाटे के नाम पर बंद कर दी गई। लोगों का सवाल है जब इतनी कमाई हो रही है तो घाटा कहां से? रेल परियोजनाएं वर्षों से अधूरी पड़ी हैं, जिनमें रावघाट लाइन प्रमुख है। स्थानीय लोगों ने जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए हैं। सीएसआर फंड भी क्षेत्र के बजाय बाहर खर्च होने का आरोप है। बस्तर को ‘अमीर धरती का गरीब निवासी’ कहा जाने लगा है। रेल कनेक्टिविटी की कमी विकास में बड़ी बाधा बनी हुई है। अब जरूरत है कि इस मुद्दे को मजबूती से उठाया जाए।

