रोहित कश्यप, मुंगेली. देवगांव ग्राम पंचायत इन दिनों विकास कार्यों की बजाय सियासी और प्रशासनिक खींचतान के कारण सुर्खियों में है. वर्तमान सरपंच योगेश पटेल और जनपद सीईओ विक्रम सिंह ठाकुर के बीच विवाद इतना बढ़ गया है कि गांव का हर निर्माण कार्य अब सियासी रणनीति का हिस्सा बनता नजर आ रहा है. सरपंच का यह भी आरोप है कि ज़ब वे अपनी शिकायतों को लेकर जनपद सीईओ के पास पहुँचे थे, तब उन्हें दफ्तर से भी भगा दिया गया.

जानिए क्या है मामला
मामला शुरू हुआ पूर्व सरपंच कलेश्वरी पटेल के कार्यों के भुगतान को लेकर। वर्तमान सरपंच योगेश पटेल का आरोप है कि जिन कार्यों के लिए उन्हें भुगतान करने का दबाव बनाया जा रहा है, वे न तो जमीन पर पूरी तरह मौजूद हैं और न ही उनके दस्तावेज़ पूरे हैं। भुगतान नहीं करने की स्थिति में उल्टे वर्तमान सभी निर्माण कार्यों की जांच हो रही है. योगेश पटेल कहना है कि यह पूरी कार्रवाई व्यक्तिगत द्वेष और दबाव की राजनीति के तहत की जा रही है।

सरपंच का आरोप- अवैध कार्रवाई और फर्जी दस्तावेज़
सरपंच योगेश पटेल ने जिला प्रशासन से शिकायत में बताया है कि पिछले एक माह से जनपद सीईओ विक्रम सिंह ठाकुर ने उनपर और पंचायत सचिव रामकुमार साहू पर अवैध तरीके से भुगतान करने का दबाव डाला गया। उन्होंने कहा कि पंचायत सचिव पर फर्जी दस्तावेज़ के माध्यम से दबाव, वर्तमान के सभी विकास कार्यों पर अवैध जांच के आरोप भी लगाया. पूर्व सरपंच के लिए तत्काल भुगतान, वर्तमान सरपंच पर नोटिस पे नोटिस की बात उनके द्वारा कही जा रही है. उन्होंने कहा विकास कार्य अब प्रशासनिक नोटिस और दबाव के पुलिया में फंस गए हैं l
कथित विवादित निर्माण कार्य
वार्ड क्रमांक 02 में बोर सफाई कार्य, वार्ड क्रमांक 06 और 13 में पाईप पुलिया निर्माण कार्य, वार्ड क्रमांक 12 में नाली एवं चेंबर निमार्ण कार्य और वार्ड क्रमांक 13 में बोर खनन एवं पावर पम्प स्थापना कार्य.
सरपंच का ये भी कहना है…
शिकायत कर्ता योगेश पटेल का का कहना है कि 20 फरवरी 2026 को जारी प्रपत्र में इन कार्यों का भुगतान पूर्व सरपंच के लिए तत्काल करने का आदेश था। लेकिन 2 मार्च 2026 के प्रपत्र में वही कार्य वर्तमान सरपंच के नाम कर अवैध कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। सरपंच योगेश पटेल का कहना है कि यह स्पष्ट रूप से सीईओ और पूर्व सरपंच की मिलीभगत दिखाता है l योगेश पटेल एवं ग्रामीणों का कहना है कि इस विवाद के कारण विकास काम ठप है। सरपंच का कहना है कि अवैध एवं द्वेषपूर्ण कार्रवाई के कारण पंचायत का पूरा वित्तीय ढांचा प्रभावित हुआ है। उनका कहना है कि जनपद सीईओ के द्वारा सचिव के डीएससी ( प्रशासकीय वित्तीय लेनदेन) पर रोक लगा दी गई थी, शिकायत के बाद कलेक्टर के निर्देश के बाद लगी रोक हटाए गए है. सरपंच का ये भी कहना है कि ज़ब वे अपनी शिकायतों को लेकर जनपद सीईओ के पास पहुँचे थे, तब उन्हें दफ्तर से भी भगाया गया.
कलेक्टर ने कही यह बात
कलेक्टर कुन्दन कुमार सिंह ने कहा कि शिकायत मिली है। जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने इस पुरे मामले की जांच और शिकायत के समाधान के लिए जिला पंचायत सीईओ प्रभाकर पाण्डेय को निर्देश दिए है.
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