नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के खिलाफ मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया। सरकार ने ‘एयर पॉल्यूशन मिटिगेशन एक्शन प्लान-2026’ (वायु प्रदूषण शमन कार्य योजना–2026) लागू करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह पहल वर्ष 2026-27 के ऐतिहासिक ग्रीन बजट के तहत लाई गई है, जिसमें साफ हवा और पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार का उद्देश्य केवल प्रदूषण को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि स्थायी और दीर्घकालिक समाधान लागू करना है, जिससे आने वाले वर्षों में राजधानी के लोगों को स्वच्छ हवा मिल सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2026-27 के ग्रीन बजट में प्रदूषण से लड़ने के लिए हर जरूरी क्षेत्र में पर्याप्त फंडिंग की गई है। इसमें प्रमुख रूप से साफ परिवहन (क्लीन ट्रांसपोर्ट) को बढ़ावा , धूल प्रदूषण पर नियंत्रण , कचरा प्रबंधन में सुधार , हरियाली और वृक्षारोपण बढ़ाना , प्रदूषण की मॉनिटरिंग को मजबूत करना शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह योजना केवल कागजी घोषणा नहीं है, बल्कि इसे संसाधनों, आधुनिक तकनीक और सख्ती के साथ जमीन पर लागू किया जाएगा।
वैज्ञानिक आधार पर तैयार, 11 क्षेत्रों पर होगा काम
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह योजना वैज्ञानिक आधार पर तैयार की गई है, जिसमें प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों को ध्यान में रखा गया है। इनमें वाहनों से निकलने वाला धुआं सड़कों की धूल निर्माण कार्य फैक्ट्रियों से होने वाला प्रदूषण कचरा और बायोमास जलाना जैसे बड़े कारण शामिल हैं। सरकार के अनुसार, इस एक्शन प्लान के तहत 11 अहम सेक्टरों पर काम किया जाएगा, जिसमें अलग-अलग विभाग मिलकर समन्वय के साथ योजना को लागू करेंगे। हर कार्य के लिए स्पष्ट समय-सीमा और जिम्मेदारी तय की गई है, ताकि काम में देरी न हो। इसके साथ ही, योजना की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम भी विकसित किया गया है, जिससे प्रदूषण के स्तर और कार्रवाई की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा सके।
वाहन प्रदूषण पर सख्ती
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर अब बिल्कुल भी ढील नहीं दी जाएगी। सरकार ने ‘नो PUC, नो फ्यूल’ (बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र ईंधन नहीं) नियम को कड़ाई से लागू करना शुरू कर दिया है। इसके लिए ANPR कैमरे (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) और डिजिटल सिस्टम लगाए जा रहे हैं, जिससे नियमों का उल्लंघन करने वालों पर तुरंत कार्रवाई हो सके। सबसे बड़ा फैसला यह लिया गया है कि 1 नवंबर 2026 से दिल्ली में ऐसे मालवाहक वाहनों की एंट्री बंद होगी, जो BS-VI, CNG या इलेक्ट्रिक मानकों पर खरे नहीं उतरते। इसके अलावा, बिना जरूरी काम के राजधानी में आने वाले ट्रैफिक पर भी नियंत्रण किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जब प्रदूषण का स्तर अत्यधिक बढ़ेगा, तो सरकार तुरंत असर वाले कदम भी उठाएगी, जैसे दफ्तरों के समय में बदलाव वर्क फ्रॉम होम लागू करना प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर अतिरिक्त प्रतिबंध सरकार का कहना है कि इन उपायों का उद्देश्य केवल नियम लागू करना नहीं, बल्कि कम समय में हवा की गुणवत्ता सुधारना है, ताकि दिल्लीवासियों को राहत मिल सके।
सार्वजनिक परिवहन और EV पर जोर
राजधानी में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार अब सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर बड़ा निवेश कर रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2028-29 तक बसों की संख्या बढ़ाकर 13,760 करना है, जिसमें इलेक्ट्रिक बसों पर विशेष जोर दिया जाएगा। सरकार की योजना है कि मेट्रो और RRTS नेटवर्क के साथ फीडर बसों, ई-ऑटो और अन्य साझा परिवहन साधनों को जोड़ा जाए, ताकि लास्ट माइल कनेक्टिविटी बेहतर हो सके। इससे लोगों को निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए सरकार अगले चार वर्षों में 32,000 ईवी चार्जिंग पॉइंट स्थापित करेगी। साथ ही, आने वाली ईवी पॉलिसी 2026 में खास तौर पर दोपहिया और कमर्शियल वाहनों पर फोकस किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सरकारी वाहनों को धीरे-धीरे स्वच्छ ईंधन में परिवर्तित किया जाएगा, जिससे प्रदूषण में कमी आएगी और दिल्ली को लो-एमिशन (कम उत्सर्जन) और भविष्य के लिए तैयार परिवहन तंत्र की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।
धूल पर नियंत्रण के लिए बड़े कदम
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि इसके लिए आधुनिक तकनीक और मशीनों की व्यापक तैनाती की जा रही है। सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों में MRSM (मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीन) की तैनाती वॉटर स्प्रिंकलर का नियमित उपयोग एंटी-स्मॉग गन के जरिए धूल नियंत्रण शामिल हैं। इसके अलावा, सड़कों पर मिस्ट स्प्रे सिस्टम लगाए जा रहे हैं और बड़े भवनों में इसे अनिवार्य किया गया है, ताकि निर्माण और धूल से होने वाले प्रदूषण को रोका जा सके। इन सभी गतिविधियों की निगरानी के लिए GPS ट्रैकिंग और केंद्रीय डैशबोर्ड का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव हो रही है। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी उपाय लगातार और प्रभावी तरीके से लागू हों।
सड़क और निर्माण क्षेत्र में सुधार
वायु प्रदूषण पर काबू पाने के लिए दिल्ली सरकार अब बुनियादी ढांचे में बड़े सुधार और तकनीक आधारित निगरानी पर जोर दे रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि राजधानी में करीब 3,500 किलोमीटर सड़कों का व्यापक पुनर्विकास किया जा रहा है। इस पुनर्विकास के तहत पक्की और धूल-मुक्त सड़कें तैयार की जाएंगी सड़कों के किनारे हरित पट्टी (ग्रीन बेल्ट) विकसित होगी यूटिलिटी डक्ट बनाए जाएंगे, ताकि बार-बार खुदाई की जरूरत न पड़े सरकार वैज्ञानिक रोड एसेट मैनेजमेंट सिस्टम और समयबद्ध गड्ढा मरम्मत प्रणाली लागू कर रही है, जिससे धूल पैदा होने की समस्या को जड़ से खत्म करने और सड़कों को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने का लक्ष्य है।
निर्माण कार्यों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली लागू की जा रही है। इसके तहत AI आधारित C&D (कंस्ट्रक्शन एंड डेमोलिशन) पोर्टल 2.0 शुरू किया जाएगा, जिसमें रियल-टाइम मॉनिटरिंग जियो-टैगिंग ऑटोमैटिक प्रवर्तन (एनफोर्समेंट) जैसी सुविधाएं होंगी। इसके साथ ही, निर्माण और विध्वंस से निकलने वाले कचरे के वैज्ञानिक निपटान और रीसाइक्लिंग के लिए प्रोसेसिंग क्षमता भी बढ़ाई जा रही है।
कचरा प्रबंधन और लैंडफिल खत्म करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि राजधानी के पुराने लैंडफिल को चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जाएगा। सरकार ने इसके लिए स्पष्ट समयसीमा तय की हैओखला लैंडफिल – जुलाई 2026 तक खत्म करने का लक्ष्य , भलस्वा लैंडफिल – दिसंबर 2026 तक, गाजीपुर लैंडफिल – दिसंबर 2027 तक मुख्यमंत्री ने कहा कि ई-वेस्ट इको पार्क जैसे सर्कुलर इकोनॉमी प्रोजेक्ट्स के जरिए कचरे से होने वाले प्रदूषण को कम किया जाएगा और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
इसके साथ ही, सरकार ने बायोमास जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया है। लोगों को वैकल्पिक समाधान देने के लिए इलेक्ट्रिक हीटर का वितरण ,जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।सरकार ने साफ किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण पर काबू पाने के लिए अब औद्योगिक इकाइयों पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि सभी उद्योगों में ऑनलाइन उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (Online Emission Monitoring System) को अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार के अनुसार, उद्योगों को तय उत्सर्जन मानकों का सख्ती से पालन करना होगा। इसके लिए रियल-टाइम डेटा के जरिए लगातार निगरानी की जाएगी, ताकि किसी भी तरह की लापरवाही तुरंत पकड़ी जा सके।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जो उद्योग नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें इकाइयों को बंद करना भी शामिल है। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य केवल निगरानी बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रदूषण के स्रोत पर ही नियंत्रण करना है, ताकि राजधानी में वायु गुणवत्ता में स्थायी सुधार लाया जा सके।
रियल-टाइम निगरानी और जनभागीदारी
राजधानी में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार अब तकनीक और जनभागीदारी पर खास जोर दे रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि पर्यावरणीय प्रशासन को मजबूत करने के लिए एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। सरकार एक केंद्रीकृत ‘ग्रीन वॉर रूम’ और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित कर रही है, जहां से पूरे शहर की हवा की गुणवत्ता पर रियल-टाइम निगरानी रखी जाएगी। इसके अलावा, वार्ड स्तर पर ‘वायु रक्षक’ टीमें तैनात की जाएंगी, जो स्थानीय स्तर पर प्रदूषण से जुड़े मामलों पर तुरंत कार्रवाई करेंगी।
नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए 311 प्लेटफॉर्म को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि लोग प्रदूषण से जुड़ी शिकायतें सीधे दर्ज कर सकें और उन पर त्वरित कार्रवाई हो सके। हरित दिल्ली के लक्ष्य को लेकर मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2026-27 में 70 लाख पेड़, झाड़ियां और बांस लगाने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि दीर्घकालिक योजना के तहत यह संख्या एक करोड़ से अधिक तक पहुंचाई जाएगी। उन्होंने कहा कि रिज क्षेत्रों की सुरक्षा और हरित क्षेत्र का विस्तार प्रदूषण को प्राकृतिक रूप से कम करने में अहम भूमिका निभाएगा।
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