Private Job Salary Structure: भारत में 1 अप्रैल 2026 से नया लेबर कोड (श्रम संहिता) लागू हो गया है। नए लेबर कोड (New Labour Code) के तहत मोदी सरकार ने प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए कई नियम में बदलाव किया है। उसमें से एक बदलाव प्राइवेट जॉब के सैलरी स्ट्रक्चर को लेकर है। नये सैलरी स्ट्रक्चर के तहत, जो बदलाव किया गया उसके तहत अब कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता, कुल सैलरी का 50% होनी चाहिए। बाकी 50 फीसदी अलाउंस रहेगा। इसका मतलब है कि आपकी इन-हैंड सैलरी कम हो जाएगी।
बेसिक पे और महंगाई भत्ता कुल सैलरी का 50 फीसदी होने के बाद, कर्मचारियों को हर महीने मिलने वाली इन-हैंड सैलरी में कमी आ सकती है। अगर आपकी कंपनी ने भी नया लेबर कानून नोटिफाई कर दिया है तो अप्रैल की सैलरी में कमी स्पष्ट तौर पर दिख जाएगी।

हालांकि, सरकार ने ये भी कहा है कि यह बदलाव 15,000 रुपये से ऊपर की बेसिक सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए ही होगा। जिनकी बेसिक सैलरी 15000 रुपये से कम होगी या 15000 रुपये तक होगी, उनपर ये नया सैलरी स्ट्रक्चर लागू नहीं होगा। इसका मतलब है कि उनकी इन-हैंड सैलरी कम नहीं होगी। लेकिन जिनका बेसिक पे 18,000 रुपये या 20,000 रुपये या उससे ज्यादा है तो उनपर 50 फीसदी सैलरी स्ट्रक्चर का नियम लागू होगा। अब आइए समझते हैं कि अगर आपकी मंथली सैलरी 50 हजार रुपये है तो आपकी इन-हैंड सैलरी कितनी कम हो जाएगी?
नया नियम क्या कहता है?
नए नियम के अनुसार बेसिक पे+DA+अन्य को मिलाकर कुल सैलरी का कम से कम 50% वेजेस में शामिल करना जरूरी है। HRA, स्पेशल अलाउंस, बोनस जैसी चीजें 50% तक छूट (एक्सक्लूजन) हैं। यदि ये 50% से ज्यादा हो जाए तो अतिरिक्त राशि वेजेस में जोड़ दी जाती है। इससे कई कंपनियों में कर्मचारियों की बेसिक पे बढ़ गई है। इसका असर उनके पीएफ, ग्रेच्युटी और ईएसआईसी (ESIC) जैसी चीजों पर दिखाई दे रहा है।
50,000 रुपये सैलरी पर कैलकुलेशन
अभी किसी की सैलरी 50 हजार होती है तो उसमें 20 हजार रुपये बेसिक सैलरी और 30 हजार रुपये अन्य अलाउंस जुड़े होते हैं। इसके बाद इसमें से 12% पीएफ में योगदान जाता है यानी 2400 रुपये की कटौती के बाद इन-हैंड सैलरी 47,600 रुपये आती है।
- बेसिक- ₹20,000
- अलाउंस- ₹30,000
कर्मचारी PF कंट्रीब्यूशन 12% ऑफ बेसिक सैलरी
- ₹20,000 × 12% = ₹2,400
इन-हैंड सैलरी = ₹50,000 – ₹2,400 = 47,600 रुपये
लेकिन अब नए बदलाव के बाद 20 हजार की बेसिक सैलरी 25,000 रुपये हो जाएगी। 30 हजार का अलाउंस घटकर 25,000 रुपये हो जाएगा। अब बेसिक सैलरी का 12 फीसदी पीएफ कंट्रीब्यूशन में जाएगा। ऐसे में 3000 रुपये की कटौती होगी. ऐसे में इन हैंड सैलरी 600 रुपये घटकर 47000 रुपये आएगी।
- बेसिक सैलरी- 25,000 रुपये
- अलाउंस- 25,000 रुपये
PF = बेसिक का 12%
- ₹25,000 × 12% = ₹3,000
इन-हैंड = ₹50,000 – ₹3,000 = 47,000 रुपये
फायदा क्या होगा?
600 रुपये पीएफ ज्यादा कटने से आपके रिटायरमेंट फंड में ज्यादा बढ़ोतरी होगी। साथ ही इसपर सालाना सरकार की ओर से ब्याज भी दिया जाएगा। इसके साथ ही ग्रेच्युटी में भी बढ़ोतरी मिलेगी।
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