नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली अपने ऐतिहासिक स्मारकों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए दुनियाभर में जानी जाती है। यहां स्थित विश्व धरोहर स्थलों से लेकर कई प्राचीन स्मारक हर साल लाखों घरेलू और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इन स्मारकों का न केवल ऐतिहासिक महत्व है, बल्कि ये राजधानी के पर्यटन और आर्थिक विकास में भी अहम योगदान देते हैं। आमतौर पर दिल्ली के पर्यटन की बात होते ही लाल किला (Red Fort) का नाम सबसे पहले लिया जाता है, लेकिन ताजा आंकड़े एक अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। दरअसल, बीते वर्ष के आंकड़ों के अनुसार कुतुब मीनार (Qutub Minar) को देखने के लिए सबसे ज्यादा पर्यटक पहुंचे। यह स्मारक न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया भर के पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

क्या कहते हैं ASI के आंकड़े

Archaeological Survey of India (एएसआई) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, राजधानी का ऐतिहासिक स्मारक कुतुब मीनार घरेलू पर्यटकों के बीच जबरदस्त लोकप्रिय बना हुआ है। बीते साल यहां करीब 32.04 लाख घरेलू पर्यटक पहुंचे, जिसके साथ यह देश के सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थलों में तीसरे स्थान पर रहा। वहीं, लाल किला इस सूची में चौथे स्थान पर रहा, जहां करीब 28.84 लाख घरेलू पर्यटक पहुंचे। कुतुब मीनार न सिर्फ देशी बल्कि विदेशी सैलानियों को भी खूब आकर्षित कर रहा है। सल्तनत कालीन इस स्मारक की ऐतिहासिक और वास्तुकला की भव्यता इसे खास बनाती है।

 वहीं, देशी-विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद पर ताजमहल यहां बीते साल 62 लाख घरेलू और 6 लाख विदेशी पर्यटक आए। भारत में दूसरा पसंदीदा पर्यटन स्थल ओडिशा का कोणार्क सूर्य मंदिर है। यहां बीते साल करीब 40 लाख पर्यटक आए थे।  तीसरे स्थान पर कुतुब मीनार यहां बीते साल करीब 32.04 लाख पर्यटक आए थे। चौथे स्थान पर लाल किला यहां बीते साल करीब 28.84 लाख पर्यटक आए थे। 

आज स्मारकों में निशुल्क प्रवेश

एएसआई के मुताबिक, इस खास मौके पर सभी स्मारकों में प्रवेश पूरी तरह निशुल्क रहेगा, जिससे अधिक से अधिक लोग देश की ऐतिहासिक धरोहरों का दीदार कर सकें। एएसआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य लोगों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना और खासकर युवाओं में ऐतिहासिक स्थलों के प्रति रुचि बढ़ाना है।

इंडो-इस्लामी वास्तुकला की बेहतरीन मिसाल

विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी बारीक नक्काशी और इंडो-इस्लामिक वास्तुकला है, जो इसे अन्य स्मारकों से अलग बनाती है। करीब 73 मीटर ऊंची यह मीनार लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से निर्मित है। इसकी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व के कारण हर साल लाखों पर्यटक यहां पहुंचते हैं। इतिहास के अनुसार, इस मीनार का निर्माण 13वीं सदी की शुरुआत में कुतुब-उद्दीन ऐबक ने शुरू कराया था, जिसे बाद में उनके उत्तराधिकारी इल्तुतमिश ने पूरा करवाया। वहीं, Red Fort भी दिल्ली की ऐतिहासिक पहचान का अहम हिस्सा है। यह किला मुगल सम्राटों का मुख्य निवास स्थान रहा है। साल 1638 में शाहजहां ने अपनी राजधानी आगरा से दिल्ली स्थानांतरित की और दिल्ली के सातवें शहर शाहजहांबाद की नींव रखी, जहां लाल किले का निर्माण किया गया।

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