करीब 12 साल तक सीरिया की सरज़मीन पर डटे रहने के बाद अब अमेरिका ने वहां से अपने बोरिया-बिस्तर समेट लिए हैं. करीब 12 साल की सैन्य मौजूदगी के बाद अब अमेरिका ने सीरिया से अपने सभी सैनिक निकाल लिए हैं और सैन्य ठिकाने खाली कर दिए हैं. 16 अप्रैल 2026 की तारीख इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई है. जब सीरिया के हसाका के कसराक एयरबेस से आखिरी अमेरिकी काफिला धूल उड़ाता हुआ बाहर निकल गया. इसके साथ ही सीरिया में अमेरिका की मिलिट्री मौजूदगी का पूरी तरह खात्मा हो गया है.
जैसे ही आखिरी अमेरिकी फ़ौजी ने बेस छोड़ा, सीरियाई सरकार की फौज ने फौरन इन ठिकानों को अपने कंट्रोल में ले लिया और अब वहां सीरियाई परचम लहरा रहा है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की कि करीब 2000 सैनिक जॉर्डन जा रहे है. अमेरिका ने हसाका, रुमैलान और देइर एज-जोर में मौजूद कम से कम सात बड़े ठिकाने खाली किए. आखिरी ठिकाना कसराक एयरबेस था. अब इस पर सीरियाई सेना का नियंत्रण है.
अमेरिकी फ़ौज ने हसाका, रुमैलान और दैर- अल-ज़ोर जैसे इलाकों में मौजूद अपने कम से कम सात बड़े आर्मी बेस खाली किए हैं. कसराक एयरबेस वो आखिरी मोर्चा था जहाँ से अमेरिकी फ़ौज का ऑपरेशन चल रहा था. लेकिन अब इस पर सीरियन आर्मी का पूरा कब्जा है. लंबे वक़्त से चल रही खींचतान और जंग के बाद इन बेस का खाली होना मिडिल ईस्ट की सियासत में एक बहुत बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि इन इलाकों पर कब्जे को लेकर पर काफी ख़ून ख़राबा हो चुका है.
सीरियाई सरकार और SDF के बीच समझौता
इस बीच, सीरिया सरकार और SDF के बीच हुए समझौते के बाद कुर्द लड़ाकों को राष्ट्रीय सेना में शामिल किया जा रहा है. हसाका और क़ामिशली जैसे शहरों में सरकारी बल तैनात हो चुके हैं और सीमाई इलाकों पर भी दमिश्क का नियंत्रण बढ़ा है. इसी साल दोनों पक्षों के बीच झड़पें भी हुई थीं, जिसके बाद मार्च में एक नया समझौता हुआ. इसके तहत SDF और कुर्द प्रशासनिक ढांचे को धीरे-धीरे राज्य में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हुई.
सीरिया ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय एंटी-ISIL गठबंधन में शामिल होकर अपनी भूमिका बदली है. इससे अमेरिका के लिए सीरिया में सैन्य मौजूदगी का आधार कमजोर हुआ और अब वह क्षेत्र में अपनी रणनीति को नए सिरे से तय कर रहा है. SDF एक कुर्द-नेतृत्व वाला गठबंधन है, जिसे 2015 में बनाया गया था और इसमें कुर्द, अरब और दूसरे स्थानीय समूह शामिल हैं. सीरिया के गृहयुद्ध के दौरान जब सरकार कमजोर हुई, तब कुर्द लड़ाकों ने उत्तर-पूर्वी इलाकों पर कब्जा कर लिया. बाद में यही SDF के रूप में मजबूत ताकत बन गया.
अमेरिका की वापसी से SDF पर असर
अमेरिका के हटने के बाद सबसे बड़ा असर सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस (SDF) पर पड़ा है. पिछले एक दशक में उत्तर-पूर्वी सीरिया के बड़े हिस्से पर इसी संगठन का नियंत्रण रहा था. यह पूरी तरह अमेरिकी समर्थन पर टिका हुआ था. हालांकि SDF और सीरियाई सरकार के बीच रिश्ते बेहतर हो रहे हैं. सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शारा ने दमिश्क में SDF के कमांडर मजलूम अब्दी और राजनीतिक प्रमुख इलहम अहमद से मुलाकात की है. विदेश मंत्री असाद हसन अल-शैबानी भी मौजूद थे. यह बैठक SDF को राष्ट्रीय ढांचे में शामिल करने की प्रक्रिया का हिस्सा थी.
इससे पहले जनवरी 2025 में दमिश्क और SDF के बीच समझौता हुआ था. इसके तहत कुर्द लड़ाकों को सीरियाई सेना में शामिल किया जा रहा है. सीमा चौकियों और सरकारी संस्थानों का नियंत्रण दमिश्क को सौंपा जाएगा.
अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी में SDF खुद को सुरक्षित मानता था
अमेरिका की वापसी इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी टर्निंग पॉइंट साबित हुई. जब तक अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद थे, SDF खुद को सुरक्षित मानता था. वह एक तरह से स्वतंत्र ताकत की तरह काम कर रहा था. जैसे ही अमेरिका ने अपने बेस खाली किए, SDF अकेला पड़ गया और उसे सीरियाई सरकार की शर्तें माननी पड़ीं. इसका सीधा असर संसाधनों पर पड़ा. सीरिया के बड़े तेल और गैस क्षेत्र, जैसे अल-उमर और कोनिको, जो पहले SDF के नियंत्रण में थे, अब सरकार के हाथ में आने लगे. इससे उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई.
तुर्किये का दबाव भी एक बड़ा फैक्टर रहा, क्योंकि तुर्किये SDF को आतंकवादी संगठन मानता है. अमेरिका की मौजूदगी में तुर्किये खुलकर कार्रवाई नहीं कर पा रहा था. उसके हटते ही SDF को संभावित हमले का खतरा बढ़ गया. इसी दबाव और बदलते हालात ने SDF को सरकार के साथ समझौते की राह पर ला दिया. अमेरिका के जाने के बाद सीरिया में सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी सरकार पर है. ISIS के बचे हुए नेटवर्क अब भी सक्रिय हैं और खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.
अमेरिका और सीरिया के के बीच सुधर रहे संबंध
अमेरिका और सीरिया के संबंध दशकों तक तनावपूर्ण रहे, लेकिन दिसंबर 2024 में बशर अल-असद की सत्ता गिरने के बाद इनमें तेजी से सुधार हुआ. मई 2025 में सऊदी अरब में ट्रम्प और शरा की पहली मुलाकात हुई, जिसके बाद अमेरिका ने सीरिया पर लगे अधिकांश प्रतिबंध हटाने की घोषणा की. अमेरिका और सीरिया के राजनयिक संबंधों की शुरुआत 1835 में हुई थी. हालांकि, 2011 में शुरू हुए सीरियाई गृहयुद्ध के बाद हालात बदले. 2012 में अमेरिका ने दमिश्क से अपने राजनयिक संबंध तोड़ लिए और सीरिया को आतंकवाद प्रायोजक राज्य घोषित किया.
असद सरकार पर मानवाधिकार उल्लंघन, रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल और ईरान और हिजबुल्लाह को समर्थन देने के आरोप लगे. अमेरिका ने सीरियाई विपक्ष का समर्थन किया और 2014 से इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया. इसके तहत पूर्वी सीरिया में सैकड़ों अमेरिकी सैनिक तैनात किए गए.
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